Sunday, June 28, 2015

'आश्रयÓ से आस, 'रेशोÓ से उदास... SPECIAL

आश्रय निधि स्पष्ट होते ही खुले 3000 करोड़ की परियोजनाओं के रास्ते
2000 करोड़ की परियोजनाओं को रेशो डील की स्टॉम्प ड्यूटी में संशोधन का इंतजार
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इंदौर में बेलगाम बढ़ती जमीन की कीमतों से पहले ही परेशान कॉलोनाइजर और बिल्डरों की पचासों परियोजनाएं सरकार के आधे-अधूरे अस्पष्ट आदेशों ने अटका दी। आश्रय निधि को लेकर सरकार के इरादे स्पष्ट होते ही जहां टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम में दो साल से अटकी योजनाओं को गति मिलने की उम्मीदें जाग गई है वहीं रेशो एग्रीमेंट में लगने वाली स्टॉम्प ड्यूटी को लेकर बिल्डर लॉबी सरकारी की ओर सहानुभूति की आस लगाए बैठी है। जानकारों की मानें तो नियमों में संशोधन होते ही महीनेभर में 5000 करोड़ से ज्यादा की एक हजार से ज्यादा परियोजनाएं मंजूर होंगी। इनमें 500 लंबित है जबकि इतनी ही परियोजनाओं के लिए आवेदन किए जाना बाकी है।
आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो नए नियमों के इंतजार के कारण टीएंडसीपी और नगर निगम में 2000 करोड़ से ज्यादा 500 से ज्यादा परियोजनाएं लंबित है। नगर निगम की बिल्डिंग पर्मिशन शाखा और कॉलोनी सेल की मानें तो आश्रय निधि को लेकर 60 प्रकरण विचाराधीन है। वहीं 300 से ज्यादा लोग संशोघन के इंतजार में ही आवेदन रोककर बैठे थे। वहीं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की बात करें तो वहां 400 से ज्यादा आवेदन विचाराधीन है जबकि इतने ही आवेदन किए जाना है। कुल मिलाकर आश्रय निधि से बिल्डर लॉबी आशान्वित है। उनका मानना है कि निर्णय स्पष्ट होने के बाद 1200 से ज्यादा परियोजनाएं महीनेभर में मंजूर होगी। इन परियोजनाओं की लागत 3000 करोड़ से ज्यादा आंकी जा रही है।
वहीं तकरीबन 500 मामले रेशो एग्रीमेंट पर घटाई जाने वाली स्टॉम्प ड्यूटी के कारण विचाराधीन है। कुल मिलाकर दो नियमों के स्पष्ट न होने से 1700 परियोजनाएं अटकी है जिनकी अनुमानित लागत 5000 करोड़ से ज्यादा आंकी जा रही है।
रेशो एग्रीमेंट 1 से 3.50 प्रतिशत, 3.50 प्रतिशत से 1 प्रतिशत
कॉलोनी काटते वक्त या बिल्डिंग बनाते वक्त बिल्डर और जमीन मालिक के बीच जो रेशो एग्रीमेंट होते हैं उन पर 2010-11 तक 1 प्रतिशत स्टॉम्प ड्यूटी लगती थी। 2011-12 में सरकार ने ड्यूटी 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.50 प्रतिशत कर दी। वह भी निर्माण कीमत पर। इस निर्णय से जमीन खरीदने से रेशो एग्रीमेंट करना ज्यादा महंगा हो गया। बतौर उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति 1 करोड़ में 1 एकड़ जमीन खरीदता है तो उस पर 6.25 से 7 प्रतिशत तक स्टॉम्प ड्यूटी चुकाना पड़ती है। यानी 6.25 से 7 लाख रुपए। वहीं जब रेशो एग्रीमेंट किया जाता है तो 1 करोड़ की जमीन पर 6 करोड़ की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट जोड़कर 3.50 प्रतिशत की दर से बिल्डरों को 24.50 लाख रुपए चुकाना पड़ते हैं। बिल्डरों ने इसका जबरदस्त विरोध किया। 2011-12 में रेशो एग्रीमेंट गिनती के हुए। 28 फरवरी को पेश मप्र के बजट 2012-13 में सरकार ने गलती मानी। रेशो एग्रीमेंट पर स्टॉम्प ड्यूटी 3.50 से घटाकर दोबारा 1 प्रतिशत कर दी। हालांकि डेढ़ महीने बाद भी यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि 1 प्रतिशत ड्यूटी आखिर कब से लगेगी।
आश्रय निधि : छोटी कॉलोनियों को छूट
राज्य सरकार ने दो साल पहले (19 अप्रैल 2010) कॉलोनाइजर एक्ट में संशोधन कर गरीबों के लिए 15 प्रतिशत (ईडब्ल्यूएस) और कमजोर वर्ग के लिए (एलआईजी)10 प्रतिशत मकान बनाने की अनिवार्यता लागू की थी। लेकिन बिल्डरों ने इसका विरोध किया था। इसके बाद सरकार ने इस संशोधन पर पुनर्विचार करने के लिए नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर की अध्यक्षता में मंत्री परिषद की उप समिति का गठन किया था। नगरीय प्रशासन विभाग ने 19 अपै्रल को कॉलोनाइजर एक्ट में संशोधन का आदेश जारी कर दिया है।

क्या था नियम
पहले- किसी भी ग्रुप हाउसिंग व कालोनी के प्रोजेक्ट में कुल एरिया का 15' गरीबों और 10' मकान कमजोर के लिए बनाने की अनिवार्यता थी।
यह हुए संशोधन
1 . 15' प्रतिशत मकान दोनों वर्गों के लिए बनाने होंगे।
2. पांच एकड़ एरिया में कॉलोनी विकसित करने पर यदि कॉलोनाइजर दोनों वर्गों के लिए मकान नहीं बनाना चाहता तो उसे 15' मकानों की लागत आश्रय शुल्क के रूप में जमा करने की छूट। आश्रय शुल्क जमा करने की यह छूट ढाई एकड़ के ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में भी लागू होगी।
3 . पांच एकड़ से अधिक एरिया में कॉलोनी और ढाई एकड़ से अधिक एरिया में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट पर दोनों वर्गों के लिए 15' मकान बनाने की अनिवार्यता होगी।
क्या था नुकसान....
-- उच्च या मध्यम आय वर्ग को ध्यान में रखकर काटी गई कॉलोनी या बनाई गई बिल्डिंग में निम्रआय वर्ग को 25 फीसदी स्थान देने से बिल्डरों का परहेज। बिल्डर यदि 25 फीसदी स्थान देते भी हैं तो उच्च-मध्यम आय वर्ग वाले उन्हें स्वीकार नहीं करते।
-- बिल्डरों के मुताबिक 100 एकड़ की कॉलोनी में 25 एकड़ जमीन गरीबों या निम्र आयवर्ग के नाम करना मुश्किल नहीं लेकिन 5000 वर्गफीट में बनी 10 से 15 फ्लैट की मल्टी में 2 से 4 फ्लैट गरीबों के लिए छोड़ दिए तो बाकी फ्लैट में कौन रहेगा?
-- किन गरीबों को फ्लैट दिए जाना है इसका निर्णय कलेक्टर करेंगे। ऐसे में नेताओं के अठ्ठे-प_ों को फ्लैट मिलेंगे। शराबखोरी और दादागिरी के साथ झगड़ें की संभावनाएं बढ़ेगी।
-- आश्रय निधि के रूप में शासन को मोटी रकम मिलती है जो नहीं मिल पाएगी।
-- गरीब और कमजोर आय वर्ग वालों के आवास के लिए सरकार पैसा कहां से लाएगी।
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रेशो डील में छूट भी स्पष्ट हो जाए तो बात बन जाए
आश्रय निधि और रेशो डील की पेंचिदगियों के चक्कर में लोगों ने परियोजनाओं का विचार ही त्याग दिया था। अब चूंकि आश्रय निधि में छोटी कॉलोनी को छूट मिली है लिहाजा उम्मीद है कि अटकी परियोजनाएं आगे बढ़ेंगी। रेशो डील को लेकर अभी स्थति स्पष्ट नहीं है।
गोपाल गोयल, अध्यक्ष
के्रडाई
कर दिया आवेदन...
आठ महीनों से प्रोजेक्ट अटका था। सोमवार को गजट नोटिफिकेशन की फोटोकॉपी करके आवेदन कर दिया कि नगर निगम जल्द ही गणना करके स्पष्ट करे कि मुझे आश्रय निधि के तहत कितने रूपए जमा करने हैं।
विशमभाई मदान, विशाल कंस्ट्रक्शन
डीपीआर बनवाने का बोल दिया
जब तक आश्रय निधि स्पष्ट न हो तब तक कौन प्रोजेक्ट लॉन्च करके पचड़े में पड़े इसी सोच के साथ अब तक मैंने आवेदन नहीं किया था। हालांकि अब चूंकि आश्रय निधि को लेकर स्थिति स्पष्ट है मैंने भी प्रोजेक्ट की डीपीआर बनवाने का इंजीनियर को बोल दिया है।
रामबाबू अग्रवाल, बिल्डर

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