बाहरी को न्यौता, स्थानीय कंपनी को जमीन नहीं...
- 137 कंपनियों के आवेदन को अमल का इंतजार
- किसी का आवेदन दो साल पुराना, किसी का सालभर
इंदौर, विनोद शर्मा ।
'घर की मुर्गी दाल बराबरÓ और 'दूर के ढोल सुहावने लगते हैंÓ जैसी कहावतों का मैदानी अमल देखना है तो कहीं जाने की जरूरत नहीं सिर्फ मप्र और यहां की सरकार का रवैया देखना भर ही काफी है। यहां इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर स्पेशल पैकेज के साथ देशी-विदेशी कंपनियों को जो सरकार न्यौता देती है उसी के पास स्थानीय निवेशकों के लिए जमीन नहीं है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो जमीनी जरूरत के इंतजार में अपने कारखानों को कागज में दफन करके बैठी ऐसी कंपनियों की तादाद एक-दो नहीं, बल्कि 140 है। यह वे कंपनियां हैं जो न सिर्फ मप्र में नया कारखाना लगाना चाहती हैं बल्कि वर्षों से संचालित कारखानों से सरकार को सालाना करोड़ों का कर और सैकड़ों परिवारों को रोटी-रोजगार देकर बैठी हैं। इनमे से कई हैं जो 20 से 60 करोड़ रुपए का निवेश करना चाहती हैं जबकि उसी क्षेत्र में ऐसी भी कंपनियां है जिन्हें जमीन का आवंटन बाद में होता है लेकिन मुख्यमंत्री कारखाने की आधारशिला पहले ही रख जाते हैं।
औद्योगिक केंद्र विकास निगम (एकेवीएन), इंदौर में 26 अपै्रल 2010 से लेकर 31 जुलाई 2012 के बीच कुल 137 कंपनियों ने आवेदन करके जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। इनमें सतगुरु इंजीनियरिंग प्रा.लि., डिलाइट कॉटन प्रा.लि., रचना टेक्सटाइल्स प्रा.लि., एस.के.मेटल प्रा.लि., जगदीप इस्पात एंड अलॉय प्रा.लि. और केशर ग्लोबल प्रा.लि. जैसी कंपनियां भी शामिल हैं जिनके प्रस्तावित प्रोजेक्ट की लागत 28 करोड़ से लेकर 61 करोड़ रुपए तक हैं। इनमें से 94 कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें 5,000 वर्गमीटर या उससे कम जमीन की दरकरार है। बाकी को 5000 से 94,000 वर्गमीटर की। कंपनी जमीन की मौजूदा कीमत देने को तैयार है जबकि एकेवीएन रियायती दरों पर मनमाने ढंग से जमीन बांट रहा है। 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री से शिलान्यास कराकर 29 अक्टूबर को एमओयू करने वाली केवियो पिनेकल इसका बड़ा उदाहरण है।
'पहले आओ और पहले पाओÓ पद्धती से इकट्ठा किए गए इन आवेदनों को नजरअंदाज करते हुए अक्टूबर में एकेवीएन ने केवियो पिनेकल को जमीन दी थी जिसकी प्रोजेक्ट लागत 50 से 100 करोड़ रुपए के बीच बताई जा रही है। रोचक बात यह है कि कंपनी का एमओयू 29 अक्टूबर को साइन हुआ लेकिन शिलान्यास मुख्यमंत्री ने 27 अक्टूबर को ही कर दिया जबकि कंपनी को जमीन आवंटन की सैद्धांतिक सहमति मिली 26 अक्टूबर की रात और औपचारिक सहमति मिली 12 नवंबर 2012 को। इस मामले में एकेवीएन को नोटिस भी जारी हो चुका है।
कितने निवेश पर कितनी रियायती जमीन
लागत (करोड़) जमीन
25 से 50 5 एकड़
50 से 100 10 एकड़
100 से 200 15 एकड़
200 से 500 20 एकड़
500 से अधिक शीर्ष स्तरीय निवेश संवर्धन नीति की अनुसंशा पर
जमीन तो है लेकिन....
ऐसा नहीं है एकेवीएन इंदौर के पास जमीन नहीं है। जमीन तो है लेकिन देने की सरकारी इच्छा नहीं है। 1007 और 109 हेक्टेयर जमीन अलग-अलग चरणों में अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है जबकि 1500 हेक्टेयर के लगभग जमीन अब भी उपलब्ध है।
मनमाने ढंग से 8 करोड़ की जमीन 4 करोड़ रुपए में दी जा रही है जबकि उसी 8 करोड़ की सरकारी गाइडलाइन वाली जमीन की 10 करोड़ से ज्यादा बाजार कीमत देने को तैयार है कंपनियां।
किस कंपनी का कितना बड़ा प्रोजेक्ट
सतगुरु इंजीनियरिंग प्रा.लि. 28 करोड़
डिलाइट कॉटन प्रा.लि. 61 करोड़
रचना टेक्सटाइल्स 31 करोड़
एस.के.मेटल प्रा.लि. 27 करोड़
जयदीप इस्पात प्रा.लि. 35 करोड़
केसर ग्लोबल प्रा.लि. 42 करोड़
सेक्टर -2 के लिए जमीन मांगी...
कंपनी आवेदन तारीख प्रस्तावित परियोजना
कच्छ मोटर्स 20 जून 2010 स्टील ब्राइट बार्स
शिवानी डिटरजेंट 30 सित. 2010 डिटरजेंट केक
श्रीनाथ पैकेजिंग 8 मई 2010 कोरूगेटेड बॉक्स
(कुल पांच कंपनियां)
सेक्टर -3 के लिए आवेदन
सतगुरु इंजीनियरिंग 6 अक्टूबर 10 इंजीनियरिंग कम्पोनेंट
डिलाइट कॉटन 19 अक्टूबर 10 कॉटन जिनिंग
रचना टेक्सटाइल्स 10 नवंबर 10 कॉटन यार्न
(कुल 89 कंपनियां)
पीथमपुर और सेक्टर-1 के लिए आवेदन
केसर ग्लोबल एक्जीम 22 नवंबर 11 इनगाट एंड बिल्लेट
तिरुपति पैकिंग 24 जुलाई 12 प्लास्टिक पैकिंग
मधु इंडस्ट्री 31 जुलाई 12 पीवीसी पाइप
(कुल 43 कंपनियां )
- 137 कंपनियों के आवेदन को अमल का इंतजार
- किसी का आवेदन दो साल पुराना, किसी का सालभर
इंदौर, विनोद शर्मा ।
'घर की मुर्गी दाल बराबरÓ और 'दूर के ढोल सुहावने लगते हैंÓ जैसी कहावतों का मैदानी अमल देखना है तो कहीं जाने की जरूरत नहीं सिर्फ मप्र और यहां की सरकार का रवैया देखना भर ही काफी है। यहां इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर स्पेशल पैकेज के साथ देशी-विदेशी कंपनियों को जो सरकार न्यौता देती है उसी के पास स्थानीय निवेशकों के लिए जमीन नहीं है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो जमीनी जरूरत के इंतजार में अपने कारखानों को कागज में दफन करके बैठी ऐसी कंपनियों की तादाद एक-दो नहीं, बल्कि 140 है। यह वे कंपनियां हैं जो न सिर्फ मप्र में नया कारखाना लगाना चाहती हैं बल्कि वर्षों से संचालित कारखानों से सरकार को सालाना करोड़ों का कर और सैकड़ों परिवारों को रोटी-रोजगार देकर बैठी हैं। इनमे से कई हैं जो 20 से 60 करोड़ रुपए का निवेश करना चाहती हैं जबकि उसी क्षेत्र में ऐसी भी कंपनियां है जिन्हें जमीन का आवंटन बाद में होता है लेकिन मुख्यमंत्री कारखाने की आधारशिला पहले ही रख जाते हैं।
औद्योगिक केंद्र विकास निगम (एकेवीएन), इंदौर में 26 अपै्रल 2010 से लेकर 31 जुलाई 2012 के बीच कुल 137 कंपनियों ने आवेदन करके जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। इनमें सतगुरु इंजीनियरिंग प्रा.लि., डिलाइट कॉटन प्रा.लि., रचना टेक्सटाइल्स प्रा.लि., एस.के.मेटल प्रा.लि., जगदीप इस्पात एंड अलॉय प्रा.लि. और केशर ग्लोबल प्रा.लि. जैसी कंपनियां भी शामिल हैं जिनके प्रस्तावित प्रोजेक्ट की लागत 28 करोड़ से लेकर 61 करोड़ रुपए तक हैं। इनमें से 94 कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें 5,000 वर्गमीटर या उससे कम जमीन की दरकरार है। बाकी को 5000 से 94,000 वर्गमीटर की। कंपनी जमीन की मौजूदा कीमत देने को तैयार है जबकि एकेवीएन रियायती दरों पर मनमाने ढंग से जमीन बांट रहा है। 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री से शिलान्यास कराकर 29 अक्टूबर को एमओयू करने वाली केवियो पिनेकल इसका बड़ा उदाहरण है।
'पहले आओ और पहले पाओÓ पद्धती से इकट्ठा किए गए इन आवेदनों को नजरअंदाज करते हुए अक्टूबर में एकेवीएन ने केवियो पिनेकल को जमीन दी थी जिसकी प्रोजेक्ट लागत 50 से 100 करोड़ रुपए के बीच बताई जा रही है। रोचक बात यह है कि कंपनी का एमओयू 29 अक्टूबर को साइन हुआ लेकिन शिलान्यास मुख्यमंत्री ने 27 अक्टूबर को ही कर दिया जबकि कंपनी को जमीन आवंटन की सैद्धांतिक सहमति मिली 26 अक्टूबर की रात और औपचारिक सहमति मिली 12 नवंबर 2012 को। इस मामले में एकेवीएन को नोटिस भी जारी हो चुका है।
कितने निवेश पर कितनी रियायती जमीन
लागत (करोड़) जमीन
25 से 50 5 एकड़
50 से 100 10 एकड़
100 से 200 15 एकड़
200 से 500 20 एकड़
500 से अधिक शीर्ष स्तरीय निवेश संवर्धन नीति की अनुसंशा पर
जमीन तो है लेकिन....
ऐसा नहीं है एकेवीएन इंदौर के पास जमीन नहीं है। जमीन तो है लेकिन देने की सरकारी इच्छा नहीं है। 1007 और 109 हेक्टेयर जमीन अलग-अलग चरणों में अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है जबकि 1500 हेक्टेयर के लगभग जमीन अब भी उपलब्ध है।
मनमाने ढंग से 8 करोड़ की जमीन 4 करोड़ रुपए में दी जा रही है जबकि उसी 8 करोड़ की सरकारी गाइडलाइन वाली जमीन की 10 करोड़ से ज्यादा बाजार कीमत देने को तैयार है कंपनियां।
किस कंपनी का कितना बड़ा प्रोजेक्ट
सतगुरु इंजीनियरिंग प्रा.लि. 28 करोड़
डिलाइट कॉटन प्रा.लि. 61 करोड़
रचना टेक्सटाइल्स 31 करोड़
एस.के.मेटल प्रा.लि. 27 करोड़
जयदीप इस्पात प्रा.लि. 35 करोड़
केसर ग्लोबल प्रा.लि. 42 करोड़
सेक्टर -2 के लिए जमीन मांगी...
कंपनी आवेदन तारीख प्रस्तावित परियोजना
कच्छ मोटर्स 20 जून 2010 स्टील ब्राइट बार्स
शिवानी डिटरजेंट 30 सित. 2010 डिटरजेंट केक
श्रीनाथ पैकेजिंग 8 मई 2010 कोरूगेटेड बॉक्स
(कुल पांच कंपनियां)
सेक्टर -3 के लिए आवेदन
सतगुरु इंजीनियरिंग 6 अक्टूबर 10 इंजीनियरिंग कम्पोनेंट
डिलाइट कॉटन 19 अक्टूबर 10 कॉटन जिनिंग
रचना टेक्सटाइल्स 10 नवंबर 10 कॉटन यार्न
(कुल 89 कंपनियां)
पीथमपुर और सेक्टर-1 के लिए आवेदन
केसर ग्लोबल एक्जीम 22 नवंबर 11 इनगाट एंड बिल्लेट
तिरुपति पैकिंग 24 जुलाई 12 प्लास्टिक पैकिंग
मधु इंडस्ट्री 31 जुलाई 12 पीवीसी पाइप
(कुल 43 कंपनियां )
No comments:
Post a Comment