Monday, June 29, 2015

5000 करोड़ का 'अपै्रल फूलÓ SPECIAL

- महत्वकांक्षी योजनाओं के नाम पर इंदौर की आवाम को 15 साल से बनाया जा रहा है मुर्ख
इंदौर. विनोद शर्मा।
आरएनटी मार्ग पर एस्केलेटर युक्त फुटब्रिज, सेंट्रल जेल की जमीन पर फॉच्र्यून सिटी, राऊ में उपनगर और इंडस्ट्री हाउस से गीताभवन के बीच ग्रेड सेपरेटर...। ऐसी कई योजनाएं हैं लंबे-चौड़े सब्जबाग दिखाकर जिनकी बुनियाद तो रखी गई लेकिन मैदानी अमल नहीं हुआ। आगामी पांच साल में इन योजनाओं पर काम होगा इसके आसार भी नहीं दिखते। कुल मिलाकर महत्वकांक्षी योजनाओं के नाम पर जनप्रतिनिधि और अधिकारी वर्षों से इंदौर की आवाम को अपै्रल फूल बनाते आ रहे हैं। मेट्रो ट्रेन, ट्राम, मोनो रेल और नए रेलवे स्टेशन भी सब्जबाग का ही हिस्सा।
आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो बीते 15 साल में तथाकथित जरूरतें जताकर 5000 करोड़ से अधिक की दर्जनों योजनाओं की नींव रखी गई। यह योजनाएं नींव में ही दफन होकर रह गई। इसमें इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और हाउसिंग बोर्ड की योजनाएं शामिल हैं। इंदौर को अपै्रल फुल बनाने के चक्कर में नेताओं ने उन महत्वपूर्ण योजनाओं को भी अनदेखा कर दिया जिनसे शहर की 'रफ्तारÓ बढ़ती। फिर रिंग रोड की आधी-अधूरी रिंग को पूरा करने का काम हो या रिवर साइड कॉरिडोर और जीवन रेखा (संजय सेतू से हरसिद्धी) जैसी अहम योजनाएं। खान नदी शुद्धीकरण, नवलखा झील और नहर भंडारा झील जनप्रतिनिधियों के अहम से पनपी योजनाओं का हश्र भी निराशाजनक ही रहा। तमाम दावों के बावजूद न शहर आवारापशुमुक्त हुआ। न अतिक्रमण मुक्त। न कचरामुक्त।
नगर निगम
रिवर साइड कॉरिडोर : 315.17 करोड़ की लागत से मंजूर यह रोड खान नदी के किनारे बनेगी। रोड लालबाग से एमआर-10 को जोड़ेगी।
कॉसमो सर्कल : 1997-08 से योजना पर शुरू हुआ दस्तावेजी काम आज दिन तक मैदान में नहीं दिखा। लागत बढ़कर 50 करोड़ पहुंची।
ग्रेड सेपरेटर : इंडस्ट्री हाउस से गीताभवन के बीच प्रस्तावित सेपरेटर जनप्रतिनिधियों के वैचारिक मतभेद के बीच उलझकर रह गया। लागत थी 30 करोड़। 1 करोड़ सर्वे पर खर्च हो चुके थे।
फुटब्रिज : आरएनटी मार्ग पर 2 करोड़ का एसकेलेटर युक्त फुटब्रिज, सियागंज से यशवंत प्लाजा तक फुटब्रिज 2 करोड़ का आज दिन तक नहीं बना।
मेग्रेटिक ट्रेन : 2000 से 2005 के बीच इंदौर में मेग्रेटिक ट्रेन का एमओयू हुआ। एमओयू से कंपनी ने चायना से लोन लिया और हजम कर गई। यहां रेल नहीं चली।
(15 करोड़ का अत्याधुनिक बूचडख़ाना, 5 करोड़ के ट्रेंचिंग ग्राउंड, 50 करोड़ का शकरखेड़ी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, 60 करोड़ के प्रस्तावित 1000 में से 700 बगीचे, 20 करोड़ के चौराहे, 100 करोड़ में मध्यशहर विस्तार, 60 करोड़ का नाला चेनलाइजेशन सहित कई अन्य योजनाएं भी)
प्राधिकरण
लोहामंडी : तकरीबन 100 करोड़ खर्च करके भी प्राधिकरण लोहामंडी शिफ्ट नहीं कर पाया।
गोपाल मंदिर कॉम्पलेक्स : हाउसिंग बोर्ड के हाथ निराशा लगने के बाद प्राधिकरण हाथ आजमा रहा है। योजना 20 करोड़ की।
जीवन रेखा : तकरीबन 10 करोड़ की लागत से जवाहरमार्ग ब्रिज से हरसिद्धी के बीच बनना थी सड़क।
पश्चिमी रिंग रोड : चंदननगर से मोहताबाग के बीच। लागत 80 करोड़।
(एमआर-12, केसरबाग आरओबी, आईएसबीटी, ट्रांसपोर्ट हब भी तीनों की लागत 300 करोड़ )
हाउसिंग बोर्ड
-- राऊ उपनगर  : तकरीबन 100 करोड़ से ज्यादा की थी योजना। प्राधिकरण और बोर्ड के झगड़े में खत्म।
-- फॉच्र्यून सिटी : तकरीबन 100 करोड़ की इस योजना को बोर्ड ने बीते सप्ताह ही रद्दी में डाला।
-- सेंट्रल जेल : तकरीबन 50 करोड़ की योजना मेंं बोर्ड का निराशा हाथ लगी। पीपीपी पर देने के बाद भी बात नहीं बनी।
वन विभाग
-- चोरल नदी पर तकरीबन 5 करोड़ की लागत से झूला पुल।
-- रेवती रेंज पहाड़ी का 2 करोड़ की लागत से हरियालीकरण।
स्वास्थ्य विभाग
-- नया एमटीएच हॉस्पिटल और जिला अस्पताल । तकरीबन 50 करोड़।
-- डिस्पेंसरियों की संख्या में वृद्धि। 10 करोड़।
खेल विभाग
-- पीपल्याहाना में खेल एकेडमी 2009 में विधायक महेंद्र हार्डिया ने मंजूर कराई थी। प्रस्तावित खर्च 25 करोड़।
-- खेल सुविधाएं विकसित होगी। 2 करोड़।
जल संसाधन
-- पाताल पानी पेयजल परियोजना अटकी। 20 करोड़।
-- तकरीबन 25 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं।
पर्यावरण
-- अत्याधुनिक संसाधनों से लैस विभाग
-- नए मॉनिटरिंग सेंटर।
पीडब्ल्यूडी
-- तकरीबन 3000 करोड़ का देवास-ग्वालियर फोरलेन।
-- 100 करोड़ का इंदौर-बेतूल मार्ग
-- 50 करोड़ का एलआईजी से गीताभवन के बीच ओवर ब्रिज।





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