वाणिज्यिक कर ने नॉन टेक्सेबल गुड्स करार देकर वसूली 10.19 लाख की पेनल्टी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
बाणगंगा पुलिस ने शनिवार को एक कार से जिस डीपी ज्वैलर्स का पांच करोड़ रुपए का 20 किलो सोना पकड़ा था वाणिज्यिक कर की एंटी इवेजन शाखा ने उससे 10.19 लाख रुपए की पेनल्टी वसूली। वहीं ज्वैलर्स ने आश्वस्त किया कि वह रजिस्टर्ड संस्था है और कर पेटे आरोपित की गई 5.00 लाख रुपए की राशि वह जल्दी जमा कर देगा। उधर, पूरे मामले में आयकर के साथ कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स जैसे विभाग कन्नी काटे बैठे रहे। वह भी उस स्थिति में जब पेनल्टी की रकम चुकाकर स्वयं ज्वलैर्स स्वीकार चुका है कि सोना बिना बिल के आया।
बाणगंगा पुलिस की सूचना पर शनिवार को वाणिज्यिक कर की एंटी इवेजन विंग के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। बिना बिल माल की सप्लाई को उहोंने गलत माना। देर रात तक चली जांच के बाद 5 लाख रुपए कर के साथ पांच गुना 25 लाख रुपए की पेनल्टी आरोपित की गई थी। बाद में ज्वैलर्स ने गलती मानी। इसीलिए 10 लाख रुपए की दो गुना पेनल्टी वसूली। उधर, सूचना मिलने और अखबारों में पांच करोड़ के सोने की खबर सुर्खियों में रहने के बावजूद इस मामले में आयकर ने रूचि ली। न सोना कस्टडी में लिया। न ही इस बात की तस्दीक की गई कि सोना नियमों को नजरअंदाज करके तो नहीं लाया गया।
क्यों जरूरी थी पूछताछ...
कस्टम : जब वाणिज्यिक कर विभाग पेन्लटी लेकर यह स्पष्ट कर चुका है कि पांच करोड़ का सोना नॉन टैक्सेबल गुड्स (एनटीजी) है। डीपी ज्वैलर्स ने भी एनटीजी स्वीकारते हुए 10.19 लाख की पेनल्टी जमा की और माल रिलीज कराया। इसके बाद कस्टम को जांचना था कि बिना बिल के आखिर पांच करोड़ का सोना आया कहां से? पांच करोड़ का सोना किस फर्म से खरीदा, इंदौर तक कैसे आया? किस पोर्टस ेसे आया? कहीं सोने की तस्करी तो नहीं हुई? जैसे सवालों का जवाब कस्टम को तलाशना था।
आयकर : एक साथ पांच करोड़ का सोना मंगवाने वाले डीपी ज्वैलर्स का आईटीआर क्या कहता है? सालाना कितना माल बिकता है? कितना मुनाफा होता है? इससे पहले कब-कब बिना बिल का माल खरीदा? टैक्स चोरी करके कितना मुनाफा कमाया? जैसे सवालों का जवाब इनकम टैक्स को देना है।
बाद में तो कोई भी बिल बना लाता है...
डिप्टी डायरेक्टर वी.एस. भदौरिया ने बताया जांच में हमने पाया कि बिल पुलिस द्वारा सोने पकड़े जाने के बाद पेश किया गया। नियमानुसार माल लाने-ले-जाने के लिए बिल साथ रखना जरूरी है। बाद में तो कोइ भी बिल बना सकता है। बिना बिल माल बुलाकर कंपनी ने टैक्स चोरी की इसीलिए पेनल्टी वसूली।
सवाल यह भी....
डीपी ने जो पांच करोड़ का सोना खरीदा है उसकी खपत कितने दिन में होगी?
आईटीआर या सेल्फ असेसमेंट में कितनी खपत बताई गई?
जिस फर्म से सोना खरीदा गया था उसके दस्तावेजो में डीपी के नाम पर इससे पहले इतना बड़ा ट्रांजेक्शन हुआ या नहीं?
यदि नहीं हुआ तो यकायक क्या हुआ कि इतना सोना मंगवाना पड़ा?
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
बाणगंगा पुलिस ने शनिवार को एक कार से जिस डीपी ज्वैलर्स का पांच करोड़ रुपए का 20 किलो सोना पकड़ा था वाणिज्यिक कर की एंटी इवेजन शाखा ने उससे 10.19 लाख रुपए की पेनल्टी वसूली। वहीं ज्वैलर्स ने आश्वस्त किया कि वह रजिस्टर्ड संस्था है और कर पेटे आरोपित की गई 5.00 लाख रुपए की राशि वह जल्दी जमा कर देगा। उधर, पूरे मामले में आयकर के साथ कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स जैसे विभाग कन्नी काटे बैठे रहे। वह भी उस स्थिति में जब पेनल्टी की रकम चुकाकर स्वयं ज्वलैर्स स्वीकार चुका है कि सोना बिना बिल के आया।
बाणगंगा पुलिस की सूचना पर शनिवार को वाणिज्यिक कर की एंटी इवेजन विंग के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। बिना बिल माल की सप्लाई को उहोंने गलत माना। देर रात तक चली जांच के बाद 5 लाख रुपए कर के साथ पांच गुना 25 लाख रुपए की पेनल्टी आरोपित की गई थी। बाद में ज्वैलर्स ने गलती मानी। इसीलिए 10 लाख रुपए की दो गुना पेनल्टी वसूली। उधर, सूचना मिलने और अखबारों में पांच करोड़ के सोने की खबर सुर्खियों में रहने के बावजूद इस मामले में आयकर ने रूचि ली। न सोना कस्टडी में लिया। न ही इस बात की तस्दीक की गई कि सोना नियमों को नजरअंदाज करके तो नहीं लाया गया।
क्यों जरूरी थी पूछताछ...
कस्टम : जब वाणिज्यिक कर विभाग पेन्लटी लेकर यह स्पष्ट कर चुका है कि पांच करोड़ का सोना नॉन टैक्सेबल गुड्स (एनटीजी) है। डीपी ज्वैलर्स ने भी एनटीजी स्वीकारते हुए 10.19 लाख की पेनल्टी जमा की और माल रिलीज कराया। इसके बाद कस्टम को जांचना था कि बिना बिल के आखिर पांच करोड़ का सोना आया कहां से? पांच करोड़ का सोना किस फर्म से खरीदा, इंदौर तक कैसे आया? किस पोर्टस ेसे आया? कहीं सोने की तस्करी तो नहीं हुई? जैसे सवालों का जवाब कस्टम को तलाशना था।
आयकर : एक साथ पांच करोड़ का सोना मंगवाने वाले डीपी ज्वैलर्स का आईटीआर क्या कहता है? सालाना कितना माल बिकता है? कितना मुनाफा होता है? इससे पहले कब-कब बिना बिल का माल खरीदा? टैक्स चोरी करके कितना मुनाफा कमाया? जैसे सवालों का जवाब इनकम टैक्स को देना है।
बाद में तो कोई भी बिल बना लाता है...
डिप्टी डायरेक्टर वी.एस. भदौरिया ने बताया जांच में हमने पाया कि बिल पुलिस द्वारा सोने पकड़े जाने के बाद पेश किया गया। नियमानुसार माल लाने-ले-जाने के लिए बिल साथ रखना जरूरी है। बाद में तो कोइ भी बिल बना सकता है। बिना बिल माल बुलाकर कंपनी ने टैक्स चोरी की इसीलिए पेनल्टी वसूली।
सवाल यह भी....
डीपी ने जो पांच करोड़ का सोना खरीदा है उसकी खपत कितने दिन में होगी?
आईटीआर या सेल्फ असेसमेंट में कितनी खपत बताई गई?
जिस फर्म से सोना खरीदा गया था उसके दस्तावेजो में डीपी के नाम पर इससे पहले इतना बड़ा ट्रांजेक्शन हुआ या नहीं?
यदि नहीं हुआ तो यकायक क्या हुआ कि इतना सोना मंगवाना पड़ा?
No comments:
Post a Comment