- ट्रस्टियों की मनमानी से बियाबानी स्थित प्रेमकुमारी अस्पताल का अस्तित्व खतरे में
- मनमाने ढंग से बिल्डर को बेची जमीन, टाउनशिप बनाने की तैयारी शुरू
दबंग : आओ बचाएं धरोहर
इंदौर. दबंग रिपोर्टर।
नवजात शिशुओं की किलकारियों के साथ कई परिवारों को खुशियां दे चुके प्रेमकुमारी देवी पारमार्थिक अस्पताल का अस्तित्व समाप्त होने का है। 70 साल पहले होलकर रियासत ने इस अस्पताल के लिए बियाबानी में जो जमीन दी थी सर सेठ स्वरूपचंद हुकमचंद दिगंबर जैन पारमार्थिक संस्था के कर्ताधर्ताओं ने उसका सौदा त्रिशला डेवलपर्स एंड बिल्डर्स प्रा.लि. के नाम कर दिया। एक-एक कर अस्पताल की पुरानी इमारतें तोड़ी जा चुकी हैं। जल्द ही यहां चार मंजिला इंटीग्रेटेड टाउनशिप आकार लेगी। इसके लिए खुदाई शुरू भी हो चुकी है। संस्था संचालक सौदे को सही और जरूरी बता रहे हैं, वहीं मिलीभगत के कारण सरकारी अफसर दखलंदाजी करने तक को तैयार नहीं है।
मामला 9/1/1 वैद्य ख्यालीराम मार्ग, बियाबानी स्थित श्रीमंत यशवंतराव आयुर्वेदिक औषधालय और दानशीला कंचनबाई प्रसूति गृह से लगी 70,531 वर्गफीट जमीन का है। अस्पताल का संचालन सर सेठ स्वरूपचंद हुकमचंद दिगंबर जैन पारमार्थिक संस्था करती है। अस्पताल और प्रसूतिगृह के सफल संचालन से खुश होलकर रियासत ने दानशीला कंचनबाई प्रसूतिगृह व शिशु स्वास्थ्य रक्षा संस्था 'जो कि सर सेठ स्वरूपचंद हुकमचंद दिगंबर जैन पारमार्थिक संस्था की पूरक संस्था के रूप में जनवरी 1942 में पंजीबद्ध हुई थीÓ, को यह जमीन दान दी थी। इसका उपयोग ताउम्र अस्पताल के रूप में होना था। प्रेमकुमारी देवी अस्पताल के रूप में 70 साल तक जमीन का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हुआ भी। अपने वंशज और होलकर रियासत के बीच हुए इस करारनामे को नजरअंदाज करते हुए 3, एमजी रोड निवासी धीरेंद्रकुमार पिता राजाबहादुरसिंह कासलीवाल और यशकुमार सिंह पिता राजकुमार सिंह कासलीवाल तर्फे सर सेठ स्वरूपचंद हुकमचंद दिगंबर जैन पारमार्थिक संस्था ने जमीन 8/8 सुदामानगर निवासी राकेश पिता राधेश्याम शर्मा की कंपनी त्रिशला डेवलपर्स एंड बिल्डर्स प्रा.लि. के नाम कर दी। दोनों के बीच विक्रय अनुबंध 29 जून 2012 को हुआ।
जीर्णोद्धार के नाम पर जीमी जमीन
- ट्रस्ट और कंपनी के बीच हुए विक्रय अनुबंध में लिखा है उक्त 70 हजार वर्गफीट जमीन खाली है जिसे ट्रस्टी ट्रस्ट संपत्ति के सदुपयोग के लिए और उससे प्राप्त धन से ट्रस्ट द्वारा संचालित प्रसृतिगृह व अस्पताल 'जो कि जीर्ण-शीर्ण हालत में हैÓ, का जीर्णोद्धार और नवीनीकरण करना चाहते हैं। इस काम के लिए ट्रस्ट को रजिस्ट्रार ऑफ ट्रस्ट से अनुमति (15बी/113/2010-11 आदेश 30 अपै्रल 2011) भी प्राप्त है।
- यह अनुबंध 37/63 प्रतिशत साझेदारी के साथ हुआ है। इसके मुताबिक यहां बनने वाली टाउनशिप से जो भी आय होगी, उसका 63 प्रतिशत हिस्सा बिल्डर को जाएगा जबकि 37 प्रतिशत की अपनी साझेदारी ट्रस्ट मौजूदा अस्पताल परिसर को आधुनिक बनाने पर खर्च करेगा।
ऐसे दी थी जमीन
- कुल जमीन थी 1,24,315 वर्गफीट।
- 1921 से पहले इसे जंवरीबाग की इमारत के रूप में जाना जाता था।
- 12 जून 1921 में 38,546 वर्गफीट जमीन पर प्रिंस यशवंतराव आयुर्वेदिक जैन औषधालय व कंचनबाई प्रसूतिगृह बनाया गया। लागत 70 हजार रुपए आई जिसका भुगतान इंदौर स्टेट म्युनिसिपालिटी ने किया।
- 1942 में अस्पताल-प्रसूतिगृह की 21वीं वर्षगांठ पर 70 हजार वर्गफीट जमीन ट्रस्ट को दी।
- ट्रस्ट ने एक के बाद एक पांच भवनों की स्थापना की थी।
यह थी शर्तें...
उक्त जमीन पर प्रसूतिगृह बनेगा। एक डिस्पेंसरी होगी, जहां स्त्री-बच्चों का इलाज होगा। यहां बच्चों को स्वच्छ और तंदुरुस्त रखने की शिक्षा भी दी जाएगी। राजरत्न वार्ड में एक कमरा ऑपरेशन और एक कमरा उन्हें भर्ती रखने के लिए होगा। संचालन दानशीला कंचनबाई संस्था की देखरेख में होगा। जमीन और इमारतों का उपयोग ताउम्र यही होता रहेगा। एक ईंट भी अन्य उपयोग के लिए नहीं लगाई जा सकेगी।
यह था मकसद
जिस वक्त जमीन दी थी, ज्यादातर प्रसूति घरों में होती थी और स्वच्छता ने होने से कई जच्चा-बच्चा की अकाल मौत हो जाती थी। प्रसूताएं व नवजात शिशु अकाल मौत न मरे, इसी नेक मकसद के साथ प्रसूति गृह की स्थापना की गई।
जमीन का विवरण
पूर्व में उत्तर से दक्षिण तक 354 फीट
उत्तर में पूर्व से पश्चिम तक 185 फीट
दक्षिण में पूर्व से पश्चिम तक 200 फीट
पश्चिम में उत्तर से दक्षिण तक 350 फीट
जमीन की चतु: सीमा
पूर्व में टाटपट्टी बाखल व रविदास पुरा
उत्तर में प्रिंस यशवंतराव आयुर्वेदिक जैन औषधालय
पश्चिम में गली, फिर बियाबानी के मकान
दक्षिण में ट्रस्ट की फेंसिंग व अन्य मकान।
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