‘अदानी’ की नादानी ने ली मजदूरों की जान!
- सुरक्षा में चूक : न इक्यूपेमेंट, न ही प्रशिक्षण, न ही परमिट टू वर्क
इंदौर. विनोद शर्मा।गैस रिसने से पांच ठेका श्रमिकों की दम घुटने से हुई मौत ने नीमच के अदानी विल्मार सोया प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और उसे मिली औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की हरी झंडी की पोल खोल दी है। हादसे के बाद हुई सुरक्षा इंतजामों की प्रारंभिक समीक्षा बताती है कि अदानी जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी में गैस डिटेक्टर, ब्रिथिंग मास्क जैसे सामान्य उपकरण ही नहीं है। हालांकि कंपनी के साथ स्वयं औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग भी इससे इत्तेफाक नहीं रखता। उनकी मानें तो घटना सामान्य थी। किसी की ड्यूटी नहीं थी। एक मजदूर गिरा, उसे बचाने दो चरणों में दो-दो उतरे और पांचों मर गए। सुरक्षा इंतजाम तो हैं लेकिन कोई इस्तेमाल नहीं करे तो कंपनी भी क्या करें।
नीमच में हादसा किसी छोटी-मोटी यूनिट में नहीं हुआ। घटना प्रधानमंत्री के चहेते अदानी समूह के अदानी विल्मार सोया प्लांट में हुई। इसीलिए चर्चा का विषय भी बड़ा है। उधर, प्रशासन और पुलिस की प्रारंभिक जांच कई खामियां उजागर की है जिनके कारण मजदूरों की जान गई। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ भी इन खामियों की पुष्टि करते हैं लेकिन हालांकि हर कर्मचारी को 15-15 लाख रु. व एक परिजन को नौकरी देने का वादा करने वाले अदानी प्रबंधन के साथ औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वे हादसे की नई कहानी गड़े बैठे हैं और मजदूरों को ही जिम्मेदार बता रहे हैं।
मिली जूली नई कहानी...
बिना ड्यूटी के एक मजदूर गुजरते वक्त पास के इस टेंक में गिर गया। इसके बाद दो मजदूर उसे बचाने उतरे। जहरीली गैस के कारण उनका दम घुट गया। बाद में एक सुरक्षाकर्मी व एक अन्य उतरा उनकी भी मौत हो गई। सभी इक्यूपमेंट हैं लेकिन अशिक्षा के कारण मजदूरों ने उनका इस्तेमाल नहीं किया।
क्या-क्या संसाधन हो...
ब्रिथिंग एप्रेटर्स : निर्बाध सांस लेने के लिए।
ब्लोवर : जहरीली गैस बाहर निकालने वाला ठोस पाइप।
गैस डिटेक्टर : यह चेम्बर के जहरीली गैसों की जानकारी देता है।
पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट- कमर में बांधकर भेजते हैं, कुछ समय तक सांस न लेने पर अलार्म बजने लगता है, ऊपर खींच लेते हैं।
क्या था चेम्बर में
ट्रीटमेंट प्लांट बना है। यहां एक चेम्बर में वेस्ट वॉटर इकट्ठा होता है। 30 फीट गहरा, 3 बाय 3 मीटर का डक्ट है। इसमें पानी और तले में गाद या काई जमा है। केमिकल मिक्स और अर्से से तले में जमी गाद के कारण कम्बाईन गैस (अमोनिया, सल्फर डाई आॅक्साइड और कार्बन मोनो आॅक्साइड) तैयार हो जाता है। जहरीली गैसों की सड़ांध और आॅक्सीजन की कमी दम घोट देती है।
कहां हुई चूक...
- चेम्बर में उतरने के लिए गैस मास्क जैसे सामान्य उपकरण तक मजदूरों को नहीं मिले। न प्रशिक्षण मिला।
- आॅक्सीजन मीटर से चेक नहीं किया। मीटर न होने पर रस्सी बांधकर मुर्गा चेम्बर में उतारते हैं। 10 मिनट में मुर्गे के सलामत बाहर आने के बाद मजदूरों को भेजते हैं।
- आॅक्सीजन की कमी के बावजूद उतरने से पहले वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं की। न गैस का प्रभाव कम हुआ, न सांस के लिए आॅक्सीजन मिली।
- कंपनी के पास कम्बाइन या मल्टीपल गैस डिटेक्टर भी नहीं था जो चेम्बर की जहरीली गैसों की मारकता बता सके।
- टेंक या वेसल में काम करने के लिए मजदूरों को स्पेशल वर्क परमिट ((परमिट टू वर्क )) नहीं दिया गया। पालन से पहले टेंक जांचना पड़ता।
- कमर में रस्सी बांधकर मजदूर को चेम्बर में उतारा जाता है। यदि बेहोशी के कारण हलचल न लगे तो बाहर खड़े लोग उसे खींच लें। एक के बाद एक मजदूर उतरते गए और मरते गए।
तो गैर इरादतन हत्या का केस
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा अधिनियम के तहत मजदूरों की सुरक्षा के इंतजाम जुटाना कंपनी की प्राथमिकता है। यदि बिना सुरक्षा उपकरणों, सूरक्षा में चूक या लापरवाही के कारण किसी मजदूर की जान जाती है तो प्रबंधन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस तक दर्ज होता है। हालांकि इससे पहले औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के अधिकारियों को जांच करके रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपना होगी।
कानूनी कार्रवाई करेंगे...
मामले की जांच जारी है। सुरक्षा में चूक के जो भी मामले सामने आएंगे उनके आधार पर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। विभाग की जांच ईमानदारी से होगी।
वल्लभ कड़िया, डायरेक्टर
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग
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