जमीन की जरूरत, किसानों की मांग और लोगों की प्यास को देखते हुए एनवीडीए ने एक बार फिर शुरू की
इंदौर. विनोद शर्मा ।बेमौसम बरसात के साथ हुई फसलों की भारी बर्बादी से पहले ही टूट चुके खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार के किसान कपास-मूंग की फसल के लिए आसमान तांक रहे हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) के तमाम विरोध के बीच अब तीनों जिले के लाखों किसान एक सूर में बहुउद्देश्यीय ओंकारेश्वर डेम के जल स्तर को बढ़ाने की मांग करने लगे हैं। किसानों की मांग पर गुरुवार को नर्मदानगर में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की महत्वपूर्ण बैठक भी संपन्न हुई। बैठक में बांध को एक बार फिर 191 मीटर तक भरने की तैयारी शुरू हो गई।
तकरीबन सात हजार करोड़ की लागत से बने ओंकारेश्वर बांध और उससे जुड़ी नहरे 2007-08 से शो-पीस की तरह किसानों का मुंह चिढ़ा रही है। न पर्याप्त पानी भरा गया। न ही नहरों को सही बहाव मिला। न खेतों तक पानी पहुंचा। कारण था नर्मदा बचाओ आंदोलन वालों का आंदोलन। जिसकी वजह है से बांध भरने की क्षमता बढ़ाने की तैयारियां शुरू करके बार-बार बंद करना पड़ी। लगातार हुई अच्छी बरसात से किसानों को दिक्कत नहीं हुई। 2014-15 की अल्प वर्षा ने एनबीए का साथ देने वाले कई किसानों को बेकफूट पर ला दिया। वे एनवीडीए के साथ हो गए।
दो मीटर बढ़ेगी जल स्तर...
ओंकारेश्वर बांध में अभी 189 मीटर ऊंचाई तक पानी भरा जाता है जबकि पूर्ण स्तर 196 मीटर है। 2012-13 में पानी की उपलब्धता 189 से बढ़ाकर 193 मीटर तक करने की तैयारी थी जिसका जबरदस्त विरोध हुआ। जल सत्याग्रह हुआ। बाद में सरकार झूक गई। अब किसानों के समर्थन के बाद एक बार फिर ऊंचाई बढ़ाने पर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि एनवीडीए अब भी एनबीए के साथ उन लोगों की भी चिंता कर रहा है जिनकी जमीनें जलस्तर बढ़ने से नष्ट होना है। इसीलिए पहले चरण में कोशिश की जा रही है कि जलस्तर दो मीटर तक बढ़ाकर बांध को 191 मीटर तक भरा जाए।
क्यों जरूरी है जल स्तर में बढ़ोत्तरी
- 2014 की अल्प वर्षा
- बेमौसम बरसात से किसानों को भारी नुकसान।
- कपास, रेत ककड़ी, ककड़ी, संतरा, गन्ना, मिर्ची, गिलकी, पपीता, बेंगन जैसी फसलों के लिए गर्मी में पानी की ज्यादा जरूरत।
- खरगोन तक नहीं पहुंचता नर्मदा का पानी। कुंदा में छोड़ते हैं लेकिन कच्ची नदी के कारण गर्मी में पानी ज्यादा उड़ता है जमीन सोखती है।
- कई जगह संकट, किसान अपने पीने के लिए पानी बचाएं या सिंचाई के लिए।
फायदे और भी...
- कृषि उत्पादन में 1500 करोड़ की प्रतिवर्ष वृद्धि ।
- बहाव नहर से सिंचाई होने से बहुमूल्य विद्युत ऊर्जा की बचत ।
- भूमिगत जल स्तर में सुधार ।
- फल, फूल एवं सब्जियों के उत्पादन में अप्रत्याक्षित वृद्धि ।
- नहर कमाण्ड क्षेत्र के नदी नालों में पशुओं के लिये गर्मी में पेयजल उपलब्धता ।
- निमाड़ क्षेत्र के फसल चक्र में परिवर्तन ।
- पर्याप्त चारा,पशुपालन उद्योग को प्रोत्साहन ।
- कृषि आधारित उद्योग धंधो में वृद्धि होने से जीवन स्तर में सुधार ।
बांंध का विवरण निम्नानुसार है:-
एक नजर में बांध....
निर्माण 2003 से 2007
नान ओव्हर फ्लो 379 मी.
ओवर फ्लो 570 मी.
जलद्वार संख्या 23
बांध की कुल लम्बाई 949 मी.
अधिकतम ऊँचाई 53 मी.
उपयोगी जल भंडारण क्षमता 299 एम.सी.एम.
2.23 लाख एकड़ जमीन की बूझेगी प्यास
तीनों केनाल का कमांड एरिया 1.715 लाख हेक्टेयर है। खण्डवा, खरगोन एवं धार जिलों के 678 ग्रामों के 146800 हेक्टेयर (362750 एकड़) क्षेत्र में सिंचाई होना है। 2 मीटर ज्यादा पानी भरने से इसमें से 90 हजार हेक्टेयर (2,23,394 एकड़) जमीन को सिंचाई के लिए पानी दिया जा सकेगा।
ऐसा है नहर कनेक्शन
नहर का नाम लम्बाई(कि.मी.) सिंचाई का क्षेत्र लाभान्वित गांव(तहसील)
कामन केरियर 12.39 3960 हे. 6 खंडवा
बांई तट नहर 64.11 20580 हे. 101 बडवाह, कसरावद
दांयी तट बहाव नहर 162.95 70630 हे. 293 बडवाह, महेष्वर, धरमपुरी,मनावर, कुक्षी
दांयी तट उद्वहन नहर 125.00 54630 हे. 278 बडवाह, महेष्वर, धरमपुरी, मनावर, कुक्षी
योग 364.423 146800 हे. 678
बढ़ाना ही पड़ेÞगा जल स्तर...
किसानों की मांग और मौजूदा मौसमी परिस्थितियां देखते हुए बांध में पानी की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है। गुरुवार को बैठक में भी इस संबंध में चर्चा हुई है। बांध में 191 मीटर तक पानी भरेंगे।
रेणू पंत, कमीश्नर एनवीडीए
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