Sunday, June 28, 2015

सड़कों पर सरकारी सेंध special

- सड़क की चौड़ाई 9 से घटाकर 7.5 मीटर की
- भूमि विकास अधिनियम में संशोधन ने मास्टर प्लान बिगाड़ा
अधिनियम के अनुसार चौड़ाई 1.5 मीटर बढ़ी जबकि प्लान के हिसाब से घटी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
मकानों की ऊंचाई 12 से 15 मीटर तक बढ़ रही है वहीं बिल्डरों पर मेहरबान सरकार ने प्रस्तावित कॉलोनियों की चौड़ाई पर 1.5 मीटर तक कैंची मार दी। वह भी उस स्थिति में जब आबादी और वाहनों की बेहिसाब बढ़ोत्तरी के कारण सड़कों की मौजूदा चौड़ाई ही कम पड़ रही है। जानकारों की मानें तो भूमि विकास अधिनियम में संशोधन के नाम पर सरकार बिल्डरों की इच्छापूर्ति का अभियान चला रही है। इसीलिए आम आदमी की जरूरत जाने बिना 30 मीटर तक के निर्माण की मंजूरी को हाईराइज कमेटी से न सिर्फ मुक्त कर दिया बल्कि सड़कों की चौड़ाई घटाकर बिल्डरों की कमाई भी बढ़ाई जा रही है।
मास्टर प्लान 2021 जनवरी 2008 में लागू हुआ था। प्लान बनाने वाले जिन अधिकारियों की भूमिका पर अंगुलियां उठती रही उन्होंने जनहित को तवज्जो देते हुए नई कॉलोनियों में सड़कों की चौड़ाई 9 मीटर तक (29 फीट, 6 ईंच) प्रस्तावित की थी। इससे पहले मप्र सरकार ने भूमि विकास अधिनियम 1984 में सड़क की चौड़ाई 6 से 9 मीटर तय थी। चूंकि प्लान 2008 में आया इसीलिए नई चौड़ाई मान्य हुई। बीते दिनों हुए संशोधन ने मास्टर प्लान का ओवरलेप कर दिया। संंशोधन के बाद 29 साल पुराने अधिनियम में सड़क की चौड़ाई 6 से बढ़ाकर 7.5 मीटर (24 फीट, 7 ईंच) तो की लेकिन मास्टर प्लान में तय 9 मीटर की चौड़ाई पर 1.5 मीटर तक की कैंची चला दी।
टीएंडसीपी के पूर्व इंजीनियर जयवंत होलकर ने बताया कि अधिनियम तीन दशक पुराना हो चुका था। सड़कों की प्रस्तावित चौड़ाई कम पडऩे लगी थी। इसीलिए मास्टर प्लान 2021 में 9 मीटर की चौड़ाई अनिवार्य कर दी थी। अब चूंकि संशोधन प्लान मंजूरी के पांच साल बाद हुआ है लिहाजा प्लान से ज्यादा अधिनियम का प्रभावी होना तय है। ऐसे में सड़कें कॉलोनियों में 7.5 मीटर ही बनेगी।
30 फीट भी कम पड़ रही थी, 24 फीट कर दी...
बिल्डर वॉल टू वॉल रोड नहीं बनाते। 29 फीट चौड़ी रोड में 15 फीट का कैरेजवे (सड़क का वह हिस्सा जिस पर वाहन चलते हैं) रहता है। 5-5 फीट का फुटपाथ। 2-2 फीट में स्ट्रीट लाइट। पेयजल लाइन। कॉलोनियों में मकान की ऊंचाई के साथ आबादी और वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जरूरत थी कि सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई कमसकम 30-32 फीट तो तय हो ही ताकि एक गाड़ी के रोड पर खड़ा होने की स्थिति में दूसरी गाड़ी आराम से निकल जाए। संंशोधन के मुताबिक 24 फीट की रोड बनती है तो उसमें 15 फीट का कैरेजवे और 3.5-3.5 फीट के फुटपाथ के साथ बाकी जरूरत के लिए सिर्फ 2 फीट की जगह बचेगी जो नाकाफी है। वह भी तब जब 90 फीसदी कॉलोनियों में स्वीकृति से कम ही सड़कें बनी हुई हैं।
सड़क घटी, आवासीय क्षेत्र बढ़ा..
कॉलोनी में 60 प्रतिशत जमीन पर आवासीय मंजूरी दी जाती है जबकि सड़क के लिए 20 प्रतिशत। यदि किसी कॉलोनी में 5 किलोमीटर (5000) मीटर लंबी रोड प्रस्तावित है और उसमें 1.5 मीटर की कटौती की जा चुकी है तो बिल्डर को 75,000 वर्गफीट (1.72 एकड़) का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इतनी जमीन पर 1200 वर्गफीट के 62 प्लॉट काटकर बिल्डर 5.56 करोड़ रुपए कमा सकता है।
पेट्रोल पंप की चौड़ाई भी हजम...
सरकार ने पेट्रोल पंप के लिए जमीन की जरूरत पर भी कैंची चलाई है। मास्टर प्लान में पंप के लिए 31 बाय 37 मीटर क्षेत्रफल की जमीन जरूरी थी। अब सरकार ने एरिया घटाकर 20 बाय 20 कर दी है। इसके अलावा प्लान में सड़क से पंप की दूरी 100 मीटर तय कर रखी है जबकि 80 फीसदी से ज्यादा पंप सड़क पर हैं या सड़क  से लगे हैं।
और भी हो चुके हैं संशोधन...
ब्रिजिंग : किसी सार्वजनिक या निजी उपयोग की बिल्डिंगों को जोड़ा जा सकेगा। ताकि एक भवन बनने के बाद जगह की कमी पर पास की जमीन पर दूसरा भवन बन सके। फायदा अस्पताल, धर्मशाला, सार्वजनिक सभागार को। निजी बहुमंजिला इमारतों में भी एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में जाने के लिए पुल बन सकेंगे।
सर्विस फ्लोर : बहुमंजिला में 4 से 5 मंजिल के बाद सर्विस फ्लोर बना सकते हैं। ताकि सभी तरह की केबल या पाइप लाइन को सर्विस फ्लोर से मोड़कर मल्टी के बाहर की ओर कर दिया जाएगा।
इंडस्ट्री को ज्यादा ग्राउंड कवरेज : औद्योगिक उपयोग में 30 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज था। इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जा रहा है। एफएआर पहले 0.3 प्रतिशत था अब यह 1 से 1.25 तक होगा।
पोडियम पार्किग :- आवासीय भवनों में तीसरी मंजिल तक पार्किग रखी जा सकेगी। इसके बाद भवन निर्माता की मर्जी से पार्किंग रखी जा सकती है। यह एफएआर कुल निर्मित क्षेत्र में शामिल नहीं होगा।

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