Sunday, June 28, 2015

सीएम की 'साइकिलÓ पंक्चर

3.09 लाख में से बटी 80432 ही 
इंदौर में ढीलपोल की भेंट चड़ता 45 लाख का बजट 
इंदौर, विनोद शर्मा। 
जिस 'साइकिलÓ को मुख्यमंत्री सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या में बढ़ोत्तरी  का कारण मानते है वहीं 'साइकिलÓ सरकारी हीलाहवाली के कारण 'पंंक्चरÓ हो चुकी है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो 2011-12 के लिए 3,09,581 साइकिल की मांग थी, बटी 80,432 यानी 25.98 प्रतिशत ही। वह भी उस स्थिति में जब शिक्षासत्र शुरू हुए चार महीने बीतने को हैं। इंदौर में जिला शिक्षा अधिकारी के पास साइकिल के लिए 45 लाख का बजट है लेकिन साइकिल के लिए पात्रों की सूची तक नहीं। हालात यह है कि गुरुवार को डीईओ कार्यालय पहुंचे जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने अधिकारियों की इस संबंध में क्लास भी ली।
1 जुलाई को नया शिक्षा सत्र शुरू हुआ। अगस्त-सितंबर बीत चुके हैं। आधा अक्टूबर त्योहारी रंगत में बीत चुका लेकिन जरूरतमंदों को साइकिल नहीं मिली तो नहीं मिली। इंदौर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शिक्षा विभाग को भेजी गई जानकारी की मानें तो इंदौर में 2751 जरुरतमंद विद्यार्थियों का चयन करके 1511 साइकिलें अब तक बाटी जा चुकी है। 1240 साइकिलों के लिए पात्रों की सूची तैयार है। इंतजार है तो सरकारी मंजूरी का। हालांकि महकमें से जुड़े अन्य अधिकारियों की मानें तो आंकड़े विश्वास योग्य नहीं है। क्योंकि डीईओ के पास 45 लाख का बजट है। 2300 की एक साइकिल आती है यानी 1956 साइकिलें बटना बाकी है यानी बटी 795 साइकिल जबकि बताई 1511 रही हैं। न सिर्फ इंदौर बल्कि, प्रदेशभर में सीएम की 'साइकिलÓ इसी तरह पंक्चर है।
यह है योजना और उसके फायदे
सरकार ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2004-05 से नि:शुल्क साइकिल देने की योजना की घोषणा की। मकसद था वे लड़कियां जो कक्षा 8 पास करने के बाद गांव में हाई स्कूल न होने की वजह से स्कूल जाना छोड़ देती थीं, ऐसी बालिकाओं को पास के गांव के हाई स्कूल में जाने के लिये नि:शुल्क साइकिल उपलब्ध करायी जाये। नतीजतन बहुत सारी बालिकाओं ने कक्षा 8 के बाद नजदीक के गांव में ही कक्षा 9 में प्रवेश लेकर स्कूल जाना प्रारंभ कर दिया। योजना के अन्र्तगत कक्षा 6ठीं की बालिकाओं के लिए 18 इंच साइकिल हेतु अधिकतम अनुदान राशि रु. 2300/-एवं कक्षा 9वीं की बालिकाओं के लिए 20 इंच साइकिल हेतु अधिकतम अनुदान राशि रु. 2400/-प्रति पात्र बालिका के मान से साइकिल क्रय हेतु राज्य शासन द्वारा दी जाती है।  गत वर्ष 1.98 लाख बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिला था।
सीएम के सपने में सुस्ती की सवारी
शहर मांग वितिरत प्रतिशत
जबलपुर ७३५८ १७४ २.38
विदिशा ७२९४ २०३ 2.78
राजगढ़ ७७६२ २५८ 3.32
डिड़ोरी ४९८७ ११४ 2.28
बालाघाट ३६५३ ११८ 3.23
मुरैना १६२२० २२२३ 13.02
यह है साइकिल का समयचक्र 
15 जुलाई तक : डीपीसी गतवर्ष के लक्ष्य के आधार पर जिला शिक्षा केन्द्र द्वारा स्कूल को राशि जारी करेगा।
20 जुलाई तक : स्कूल शाला में प्रवेशित पात्र बालक/बालिका की जानकारी निर्धारित प्रारूप में बीआरसी को प्रेषित करना है।
20 जुलाई तक : स्कूल बच्चों को चेक का वितरण करेंगे।
25 जुलाई तक : बीआरसी स्कूल से जानकारी पोर्टल में दर्ज करने के उपरांत लॉक करेंगे।
10 अगस्त तक : बीआरसी स्कूलवार पात्र बालक/बालिका की रिपोट पोर्टल से स्कूल भेजेंगे।
20 अगस्त तक : बच्चों को दिए चेक की जानकारी स्कूल बीआरसी को देंगे।
30 अगस्त तक : चेक की जानकारी बीआरसी ऑनलाइन पृविष्टी उपरांत लॉक करेंगे।
10 सितंबर तक : स्कूल को आवंटित राशि पात्र बालक/बालिका की संख्या एवं वितरित किये गये चेक राशि के आधार पर डीईओ स्कूलवार अतिरिक्त मांग/शेष का समायोजन करेंगे।
साइकिल के सरकारी कसीदे....
10 मार्च 2011 - रालामंडल अभयारण्य में शिकारगाह तक अब साइकिल शुरू करने की घोषणा। वन विभाग ने खरीदी दो माउंटेन साइकिल। आठ साइकिल प्रस्तावित।
१३ मार्च 2011- मुख्यमन्त्री ने बीजेपी की बैठक में कहा छात्राओं को हमारी सरकार साइकिल देती रही लेकिन इस बार साइकिल के बदले उन्हें रूपये देंगे ताकि वो अपने मनपंसद साइकिल खरीद सके।
अगस्त 2011- एआईसीटीएसएल ने पर्यावरण संरक्षण और सुगम यातायात के लिए साइकिल प्रोजेक्ट बनाया।
साइकिल एक, दरें अनेक
प्रदेश दरें/साइकिल
मप्र 2300
बिहार 2500
राजस्थान 2450
उत्तरप्रदेश 2450
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हमने मार्च 2011 में पिछले वर्ष कक्षाओं में मौजूद बालिकाओं के मान से एसएमसी में राशि जमा करा दी थी माता-पिता के खाते बैंक में नहीं होने से साइकिल नहीं खरीद पाए होंगे।
डॉ. मदनकुमार त्रिपाठी
डीपीसी

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