- समूह की एनएसएआईएल के पेन/फाइल ले गया था पनवेल
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आयकर अफसरों व रुचि समूह के कर्ताधर्ताओं के बीच मध्यस्थ का काम करने वाले सीए महेश अग्रवाल को 10 लाख रु. के साथ गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई ने जिस कर्मचारी जितेंद्र की भूमिका की जांच शुरू की थी उसे आयकर विभाग नोटिस देकर जवाब तलब कर चुका है। जितेंद्र आयकर का वह कर्मचारी है जो रुचि समूह के खर्च पर पेन/फाइलें फ्लाइट से पनवेल लेकर गया था। पनवेल पहुंचते ही उसने महेश अग्रवाल को व महेश अग्रवाल ने एनएसएआईएल के अशोक अग्रवाल को फोन किया था। गौरतलब है कि केस में जितेंद्र की भूमिका खुलासा दबंग दुनिया ने सबसे पहले 11 फरवरी 2013 के अंक में 'आयकर का जितेंद्र ले गया था रूचि की पेन/फाइलÓ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में किया था।
महेश अग्रवाल और अशोक अग्रवाल के खिलाफ फरवरी में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में आयकर के कर्मचारी जितेंद्र के नाम का जिक्र भी था। जितेंद्र तक पहुंचने के लिए सीबीआई की टीम आयकर ऑफिस जाकर दस्तावेज भी जुटा चुकी है। आयकर के आला अधिकारियों ने इसी मामले में जितेंद्र को नोटिस देकर जवाब मांगा। पूछा गया कि आखिर क्या वजह थी कि ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद आपको रुचि समूह के खर्च पर उसके पेन/फाइल फ्लाइट से पनवेल ले जाना पड़े? महेश अग्रवाल से क्यों बात हुई? सूत्रों की मानें तो जितेंद्र जवाब भी दे चुके हैं। उन्होंने बताया कि चूंकि कंपनी ताबड़तोड़ पेन ट्रांसफर चाहती थी। दस्तावेज ले जाने में वक्त लग रहा था। इसीलिए कंपनी ने आला अधिकारियों से कहा कि आप किसी को फ्लाइट से भेज दो। खर्च हम उठा लेंगे। अधिकारियों के आदेशानुसार ही मैं वहां रवाना हुआ। मैंने महेश अग्रवाल से बात नहीं की।
अग्रवाल ने नहीं बताया जितेंद्र का नाम
तकरीबन महीनेभर जेल में रहने और सीबीआई की रिमांड पर रहने के बावजूद सीए महेश अग्रवाल ने नहीं स्वीकारा कि जिन 10 लाख रुपयों के साथ उसे गिरफ्तार किया गया था वह आयकर अधिकारी तक पहुंचाए जाना थे। उसका यही कहना है कि यह रकम उसे बतौर फीस प्राप्त हुई थी। जितेंद्र से हुई बातचीत का वह सामान्य बताता है। इसीलिए सीबीआई की इन्वेस्टिगेशन आयकर अधिकारी तक नहीं पहुंच पाई है। एक तरफ जानकार केस को कमजोर मानते है वहीं सीबीआई कहती है कि अग्रवाल को भले कोर्ट से राहत मिल जाए लेकिन हम तो चार्जशीट दाखिल करेंगे ही।
सीबीआई ने कार्रवाई फोन टेपिंग के आधार पर की थी। इसीलिए महज वाइस रिकॉर्डिंग और दो चरणों में जब्त 20 लाख रुपयों के सीबीआई के पास कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। इसीलिए सीबीआई ने अग्रवाल की आवाज के नमूने लेकर लेब में भेज दिए हैं। चूंकि टेप ओरिजनल है इसीलिए आवाज के नमूने मेल खाना ही है।
यह था घटनाक्रम...
रुचि समूह ने पेन और असेसमेंट फाइलों को कमिश्नरेट इनकम टैक्स (सीआईटी) इंदौर से कमिश्नरेट इनकम टैक्स (सीआईटी) ठाणे के अंतर्गत आने वाले आयकर ऑफिस पनवेल स्थानांतरण की अर्जी लगाई थी। काम की जिम्मेदारी मध्यस्थता के मास्टर महेश अग्रवाल ने ली। सौदा 20 लाख में पटा। वादे के मुताबिक 6 फरवरी को पेन/फाइल ट्रांसफर कर दी गई। 7 फरवरी 2013 को महेश अग्रवाल और अशोक अग्रवाल ने जितेंद्र के लिए फ्लाइट का टिकट बुक कराया। टिकट एनएसएआईएल के खर्च पर बुक हुआ। जितेंद्र फाइलें इंदौर से पनवेल ले गया। उसके साथ रुचि समूह की ओर से दीपेश नाम का व्यक्ति भी था।
घंटे-दो घंटे बाद ही महेश अग्रवाल ने अशोक अग्रवाल को फोन करके कन्फर्म किया कि दस्तावेजों के साथ जितेंद्र-दीपेश सीआईटी ठाणे पहुंच चुके हैं जिसके अंतर्गत आयकर कार्यालय पनवेल आता है। अग्रवाल ने उससे यह भी कहा कि अब वादे के मुताबिक आयकर अधिकारियों तक 20 लाख रुपए पहुंचा दिए जाने चाहिए। अशोक अग्रवाल ने महेश अग्रवाल के कर्मचारी नागेश यादव के हाथों 7 फरवरी को 10 लाख रुपए की पहली किस्त भेजी और 8 फरवरी को दूसरी। 10 लाख रुपए की पहली किस्त महेश अग्रवाल के रिश्तेदार अखिलेश अग्रवाल से सीबीआई ने शनिवार को बरामद की जबकि 8 फरवरी को दी गई 10 लाख रुपए की दूसरी किस्त के साथ सीबीआई ने स्वयं अग्रवाल को गिरफ्तार किया था।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आयकर अफसरों व रुचि समूह के कर्ताधर्ताओं के बीच मध्यस्थ का काम करने वाले सीए महेश अग्रवाल को 10 लाख रु. के साथ गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई ने जिस कर्मचारी जितेंद्र की भूमिका की जांच शुरू की थी उसे आयकर विभाग नोटिस देकर जवाब तलब कर चुका है। जितेंद्र आयकर का वह कर्मचारी है जो रुचि समूह के खर्च पर पेन/फाइलें फ्लाइट से पनवेल लेकर गया था। पनवेल पहुंचते ही उसने महेश अग्रवाल को व महेश अग्रवाल ने एनएसएआईएल के अशोक अग्रवाल को फोन किया था। गौरतलब है कि केस में जितेंद्र की भूमिका खुलासा दबंग दुनिया ने सबसे पहले 11 फरवरी 2013 के अंक में 'आयकर का जितेंद्र ले गया था रूचि की पेन/फाइलÓ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में किया था।
महेश अग्रवाल और अशोक अग्रवाल के खिलाफ फरवरी में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में आयकर के कर्मचारी जितेंद्र के नाम का जिक्र भी था। जितेंद्र तक पहुंचने के लिए सीबीआई की टीम आयकर ऑफिस जाकर दस्तावेज भी जुटा चुकी है। आयकर के आला अधिकारियों ने इसी मामले में जितेंद्र को नोटिस देकर जवाब मांगा। पूछा गया कि आखिर क्या वजह थी कि ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद आपको रुचि समूह के खर्च पर उसके पेन/फाइल फ्लाइट से पनवेल ले जाना पड़े? महेश अग्रवाल से क्यों बात हुई? सूत्रों की मानें तो जितेंद्र जवाब भी दे चुके हैं। उन्होंने बताया कि चूंकि कंपनी ताबड़तोड़ पेन ट्रांसफर चाहती थी। दस्तावेज ले जाने में वक्त लग रहा था। इसीलिए कंपनी ने आला अधिकारियों से कहा कि आप किसी को फ्लाइट से भेज दो। खर्च हम उठा लेंगे। अधिकारियों के आदेशानुसार ही मैं वहां रवाना हुआ। मैंने महेश अग्रवाल से बात नहीं की।
अग्रवाल ने नहीं बताया जितेंद्र का नाम
तकरीबन महीनेभर जेल में रहने और सीबीआई की रिमांड पर रहने के बावजूद सीए महेश अग्रवाल ने नहीं स्वीकारा कि जिन 10 लाख रुपयों के साथ उसे गिरफ्तार किया गया था वह आयकर अधिकारी तक पहुंचाए जाना थे। उसका यही कहना है कि यह रकम उसे बतौर फीस प्राप्त हुई थी। जितेंद्र से हुई बातचीत का वह सामान्य बताता है। इसीलिए सीबीआई की इन्वेस्टिगेशन आयकर अधिकारी तक नहीं पहुंच पाई है। एक तरफ जानकार केस को कमजोर मानते है वहीं सीबीआई कहती है कि अग्रवाल को भले कोर्ट से राहत मिल जाए लेकिन हम तो चार्जशीट दाखिल करेंगे ही।
सीबीआई ने कार्रवाई फोन टेपिंग के आधार पर की थी। इसीलिए महज वाइस रिकॉर्डिंग और दो चरणों में जब्त 20 लाख रुपयों के सीबीआई के पास कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। इसीलिए सीबीआई ने अग्रवाल की आवाज के नमूने लेकर लेब में भेज दिए हैं। चूंकि टेप ओरिजनल है इसीलिए आवाज के नमूने मेल खाना ही है।
यह था घटनाक्रम...
रुचि समूह ने पेन और असेसमेंट फाइलों को कमिश्नरेट इनकम टैक्स (सीआईटी) इंदौर से कमिश्नरेट इनकम टैक्स (सीआईटी) ठाणे के अंतर्गत आने वाले आयकर ऑफिस पनवेल स्थानांतरण की अर्जी लगाई थी। काम की जिम्मेदारी मध्यस्थता के मास्टर महेश अग्रवाल ने ली। सौदा 20 लाख में पटा। वादे के मुताबिक 6 फरवरी को पेन/फाइल ट्रांसफर कर दी गई। 7 फरवरी 2013 को महेश अग्रवाल और अशोक अग्रवाल ने जितेंद्र के लिए फ्लाइट का टिकट बुक कराया। टिकट एनएसएआईएल के खर्च पर बुक हुआ। जितेंद्र फाइलें इंदौर से पनवेल ले गया। उसके साथ रुचि समूह की ओर से दीपेश नाम का व्यक्ति भी था।
घंटे-दो घंटे बाद ही महेश अग्रवाल ने अशोक अग्रवाल को फोन करके कन्फर्म किया कि दस्तावेजों के साथ जितेंद्र-दीपेश सीआईटी ठाणे पहुंच चुके हैं जिसके अंतर्गत आयकर कार्यालय पनवेल आता है। अग्रवाल ने उससे यह भी कहा कि अब वादे के मुताबिक आयकर अधिकारियों तक 20 लाख रुपए पहुंचा दिए जाने चाहिए। अशोक अग्रवाल ने महेश अग्रवाल के कर्मचारी नागेश यादव के हाथों 7 फरवरी को 10 लाख रुपए की पहली किस्त भेजी और 8 फरवरी को दूसरी। 10 लाख रुपए की पहली किस्त महेश अग्रवाल के रिश्तेदार अखिलेश अग्रवाल से सीबीआई ने शनिवार को बरामद की जबकि 8 फरवरी को दी गई 10 लाख रुपए की दूसरी किस्त के साथ सीबीआई ने स्वयं अग्रवाल को गिरफ्तार किया था।
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