तीन साल में 96 प्रतिशत गिरी शेयर की कीमत
लगातार बढ़ता जा रहा है कंपनी का घाटा
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
इंदौर सहित कई शहरों के कचरा प्रबंधन में बूरी तरह नाकाम रही एटूजेड मेंटेनेंस एंड इंजीनियरिंग सर्विस दीवालिया होने की कगार पर है। कंपनी की सल्तनत लगातार सिमट रही है। कंपनी के अधिकारी झूठे तथ्यों से हकीकत पर कितने ही पर्दे क्यों न डाले लेकिन जनवरी 2011 से 21 जुलाई 2013 के बीच की बाजारी समीक्षा वास्तविकता उजागर करती है। आंकड़ों की मानें तो 30 महनों में कंपनी के शेयर की कीमत 96.43 प्रतिशत गिरी है जबकि शेयर वॉल्यूम 97.16 प्रतिशत कम हुआ है। हालात यह है कि कंपनी पाई-पाई के लिए हिचकोले खा रही है। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ रहा है हालांकि नगर निगम के अधिकारियों की मेहरबानी से गाड़ी धक रही है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की वेबसाइट कंपनी के तहत कंपनी का वित्तीय घाटा लगातार बढ़ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की जो नेट सेल मार्च 2012 में 562.96 करोड़ रुपए थी वही मार्च 2013 में घटकर 224.41 करोड़ रह गई। गिरावट 338.55 करोड़ की। इधर, सेल घटी और उधर कंपनी की लागत बढ़ती गई। कंपनी घाटे में आ गई। 6 जनवरी 2011 को कंपनी के एक शेयर की कीमत 337.25 रुपए थी जो 21 जुलाई 2013 को घटकर सिर्फ और सिर्फ 11.90 रुपए रह गई है। यानी सिर्फ 3.55 प्रतिशत। इसी तरह शेयल वॉल्यूम भी 7, 41,455 से घटकर सिर्फ 21,044 रह गई है।
हमें फर्क क्या पड़ रहा है...
- एटूजेड को इंदौर नगर निगम ने 35 करोड़ से ज्यादा के संसाधन थमाकर शहर का कचरा उठाकर टेÑंचिंग ग्राउंड तक छोड़ने की जिम्मेदारी का ठेका दे रखा है। घांटे से जुझ रही कंपनी ने ‘जुगाड़’ के चक्कर में 10 करोड़ से ज्यादा वाहनों व संसाधनों को कचरा बना दिया।
- अनुबंध के अनुसार कचरा गाड़ियां सात साल में नगर निगम को चालू हालत में सौंपी जाना थी। वाहन तीन साल में ही कचरा हो गए। अनुबंध के अनुसार कंपनी को कचरा की मात्रा और शहर सीमा विस्तार को देखते हुए संसाधनों की व्यवस्था करना थी जो कंपनी पर्याप्त रूप से नहीं कर पाई।
- कंपनी ने न वर्कशॉप बनाई। न ही जीपीएस कंट्रोल रूम। मॉनिटरिंग हो कैसे। कचरा गाड़ियां रास्ते में ही कचरा डालकर लौट जाती है। कई गाड़ियां तुलाई के बाद इधर-उधर घुमकर दोबारा तुल जाती है।
- घाटे को कम करना और कमाई बढ़ाना है कंपनी का लक्ष्य। लक्ष्य पाने के लिए शहर की सफाई व्यवस्था से समझौता करने से भी पीछे नहीं हटती कंपनी।
- कंपनी घर-घर से कचरा उठाने में भी रुचि रख रही है। इसके लिए टेंडर भी डाल चुकी है। यदि ऐसा होता है कि परिवहन और प्रोसेसिंग के बाद कंपनी को कचरा प्रबंधन की यह तीसरी जिम्मेदारी होगी। यानी पूरे प्रबंधन का पैकेज एटूजेड के पास। इसके बाद सफाई हो ही जाएगी? इसकी कोई ग्यारंटी नहीं है।
सरकार की अनदेखी बड़ा कारण..
न सिर्फ एटूजेड बल्कि कचरा प्रबंधन से जुड़ी तकरीबन हर कंपनी की हालत यही है। इसका बड़ा कारण सरकार की अनदेखी है। विदेशों में कचरा प्रबंधन में जुटी कंपनियों को सरकार शतप्रतिशत ग्रांट देती है। यहां जेब से पैसा लगाना पड़ता है। कचरे से बनी खाद कोई नहीं खरीदता। खाद बनाने वाली कंपनियां शोषण करती है हमारा। कचरा मिक््स आता है। छटा हुआ नहीं आता। कई बार पत्थर आने से मशीन खराब हो जाती है। नहीं तो कांच घुसने से गाड़ी के टायर। कर्मचारी तक घायल हो जाते हैं।
विकास झा, सीनियर मैनेजर
एटूजेड
एक नजर में एटूजेड मेंटेनेंस एंड इंजीनियरिंग सर्विस ...
पता : गुड़गांव, हरियाणा
पंजीयन : 7 जनवरी 2002
पंजीयन नं. : 034805
अथॉराइज्ड केपिटल : 100 करोड़
पेड अप केपिटल : 74,17,76,940
यह है कंपनी के डायरेक्टर
अशोक कुमार, दिल्ली
अमित मित्तल, गुडगांव
सुरेंद्र कुमार टूटेजा, नई दिल्ली
दीपाली मित्तल, गुडगांव
अतूल अग्रवाल, नई दिल्ली
यूं साल दर साल सिकुड़ता गया एटूजेड
2011 6 जनवरी 6 जुलाई 6 दिसंबर
खुला 336.10 263.90 129.15
ऊंचा 346.20 266.50 131.90
निम्न 334.65 258.00 125.70
बंद 337.25 259.70 128.00
वॉल्यूम 7,41,455 1,37,442 1,13,320
2012 6 जनवरी 6 जुलाई 6 दिसंबर
खुला 88.15 114.50 62.20
ऊंचा 89.50 116.00 63.90
निम्न 86.10 112.55 61.20
बंद 87.63 113.35 62.05
वॉल्यूम 41,619 1,89,903 4,68,230
2013 6 जनवरी 21 जुलाई
खुला 62.00 12.27
ऊंचा 62.70 12.34
निम्न 61.00 11.76
बंद 61.30 11.95
वॉल्यूम 2,74,828 21,044
लगातार बढ़ता जा रहा है कंपनी का घाटा
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
इंदौर सहित कई शहरों के कचरा प्रबंधन में बूरी तरह नाकाम रही एटूजेड मेंटेनेंस एंड इंजीनियरिंग सर्विस दीवालिया होने की कगार पर है। कंपनी की सल्तनत लगातार सिमट रही है। कंपनी के अधिकारी झूठे तथ्यों से हकीकत पर कितने ही पर्दे क्यों न डाले लेकिन जनवरी 2011 से 21 जुलाई 2013 के बीच की बाजारी समीक्षा वास्तविकता उजागर करती है। आंकड़ों की मानें तो 30 महनों में कंपनी के शेयर की कीमत 96.43 प्रतिशत गिरी है जबकि शेयर वॉल्यूम 97.16 प्रतिशत कम हुआ है। हालात यह है कि कंपनी पाई-पाई के लिए हिचकोले खा रही है। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ रहा है हालांकि नगर निगम के अधिकारियों की मेहरबानी से गाड़ी धक रही है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की वेबसाइट कंपनी के तहत कंपनी का वित्तीय घाटा लगातार बढ़ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की जो नेट सेल मार्च 2012 में 562.96 करोड़ रुपए थी वही मार्च 2013 में घटकर 224.41 करोड़ रह गई। गिरावट 338.55 करोड़ की। इधर, सेल घटी और उधर कंपनी की लागत बढ़ती गई। कंपनी घाटे में आ गई। 6 जनवरी 2011 को कंपनी के एक शेयर की कीमत 337.25 रुपए थी जो 21 जुलाई 2013 को घटकर सिर्फ और सिर्फ 11.90 रुपए रह गई है। यानी सिर्फ 3.55 प्रतिशत। इसी तरह शेयल वॉल्यूम भी 7, 41,455 से घटकर सिर्फ 21,044 रह गई है।
हमें फर्क क्या पड़ रहा है...
- एटूजेड को इंदौर नगर निगम ने 35 करोड़ से ज्यादा के संसाधन थमाकर शहर का कचरा उठाकर टेÑंचिंग ग्राउंड तक छोड़ने की जिम्मेदारी का ठेका दे रखा है। घांटे से जुझ रही कंपनी ने ‘जुगाड़’ के चक्कर में 10 करोड़ से ज्यादा वाहनों व संसाधनों को कचरा बना दिया।
- अनुबंध के अनुसार कचरा गाड़ियां सात साल में नगर निगम को चालू हालत में सौंपी जाना थी। वाहन तीन साल में ही कचरा हो गए। अनुबंध के अनुसार कंपनी को कचरा की मात्रा और शहर सीमा विस्तार को देखते हुए संसाधनों की व्यवस्था करना थी जो कंपनी पर्याप्त रूप से नहीं कर पाई।
- कंपनी ने न वर्कशॉप बनाई। न ही जीपीएस कंट्रोल रूम। मॉनिटरिंग हो कैसे। कचरा गाड़ियां रास्ते में ही कचरा डालकर लौट जाती है। कई गाड़ियां तुलाई के बाद इधर-उधर घुमकर दोबारा तुल जाती है।
- घाटे को कम करना और कमाई बढ़ाना है कंपनी का लक्ष्य। लक्ष्य पाने के लिए शहर की सफाई व्यवस्था से समझौता करने से भी पीछे नहीं हटती कंपनी।
- कंपनी घर-घर से कचरा उठाने में भी रुचि रख रही है। इसके लिए टेंडर भी डाल चुकी है। यदि ऐसा होता है कि परिवहन और प्रोसेसिंग के बाद कंपनी को कचरा प्रबंधन की यह तीसरी जिम्मेदारी होगी। यानी पूरे प्रबंधन का पैकेज एटूजेड के पास। इसके बाद सफाई हो ही जाएगी? इसकी कोई ग्यारंटी नहीं है।
सरकार की अनदेखी बड़ा कारण..
न सिर्फ एटूजेड बल्कि कचरा प्रबंधन से जुड़ी तकरीबन हर कंपनी की हालत यही है। इसका बड़ा कारण सरकार की अनदेखी है। विदेशों में कचरा प्रबंधन में जुटी कंपनियों को सरकार शतप्रतिशत ग्रांट देती है। यहां जेब से पैसा लगाना पड़ता है। कचरे से बनी खाद कोई नहीं खरीदता। खाद बनाने वाली कंपनियां शोषण करती है हमारा। कचरा मिक््स आता है। छटा हुआ नहीं आता। कई बार पत्थर आने से मशीन खराब हो जाती है। नहीं तो कांच घुसने से गाड़ी के टायर। कर्मचारी तक घायल हो जाते हैं।
विकास झा, सीनियर मैनेजर
एटूजेड
एक नजर में एटूजेड मेंटेनेंस एंड इंजीनियरिंग सर्विस ...
पता : गुड़गांव, हरियाणा
पंजीयन : 7 जनवरी 2002
पंजीयन नं. : 034805
अथॉराइज्ड केपिटल : 100 करोड़
पेड अप केपिटल : 74,17,76,940
यह है कंपनी के डायरेक्टर
अशोक कुमार, दिल्ली
अमित मित्तल, गुडगांव
सुरेंद्र कुमार टूटेजा, नई दिल्ली
दीपाली मित्तल, गुडगांव
अतूल अग्रवाल, नई दिल्ली
यूं साल दर साल सिकुड़ता गया एटूजेड
2011 6 जनवरी 6 जुलाई 6 दिसंबर
खुला 336.10 263.90 129.15
ऊंचा 346.20 266.50 131.90
निम्न 334.65 258.00 125.70
बंद 337.25 259.70 128.00
वॉल्यूम 7,41,455 1,37,442 1,13,320
2012 6 जनवरी 6 जुलाई 6 दिसंबर
खुला 88.15 114.50 62.20
ऊंचा 89.50 116.00 63.90
निम्न 86.10 112.55 61.20
बंद 87.63 113.35 62.05
वॉल्यूम 41,619 1,89,903 4,68,230
2013 6 जनवरी 21 जुलाई
खुला 62.00 12.27
ऊंचा 62.70 12.34
निम्न 61.00 11.76
बंद 61.30 11.95
वॉल्यूम 2,74,828 21,044
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