Sunday, June 28, 2015

एक पंजीयन, कंपनियां चार special

फर्टीलाइजर, पेस्टीसाइड और इनसेक्टिसाइड कंपनियों का फर्जीवाड़ा
इंदौर. विनोद शर्मा।
फसलों को मजबूति देने वाली फर्टीलाइजर, पेस्टीसाइड और इनसेक्टिसाइड सरकारी खजाने में सेंधमारी कर रहे हैं। एक पंजीयन पर तीन-चार या उससे ज्यादा कंपनियां चल रही है। छूट प्राप्त उत्पाद के साथ दूसरे उत्पादों का सौदा करके एक्साइज ड्यूटी की चोरी कर रहे हैं। इसका खुलासा बीते दिनों फर्टीलाइजर, पेस्टीसाइड और इनसेक्टिसाइड कंपनियों के खिलाफ संपन्न हुई डायरेक्टर जनरल आॅफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) और कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स विभाग की अलग-अलग कार्रवाइयों में हुआ। सूत्रों की मानें तो 50 फीसदी कंपनियां बिना पंजीयन के चल रही है ताकि पंजीकृत कंपनी का कारोबार एसएसआई के मापंदड से ज्यादा नजर न आए।
सेंट्रल एक्साइज और डीजीसीईआई का पूरा महीना खाद कंपनियों के नाम रहा। इंदौर, धार, पीथमपुर और भोपाल तक कार्रवाई हुई। अधिकारी इसका कारण जुलाई से सितंबर के बीच आसमान छूती खाद की डिमांड और कारोबार के ग्राफ में चढ़ाव को मानते हैं। अधिकारी बताते हैं कि खाद कंपनियां जबरदस्त मनमानी कर रही हैं। हालात यह है कि डीडी केमिकल्स जैसी कंपनियां एक पंजीयन पर बिना पंजीयन के तीन से चार कंपनियां तक चला रही हैं। हिसाब-किताब भी सही नहीं है।
ताकी मेंटेन रहे एसएसआई स्टेटस...
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 1.5 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली कंपनी ही एसएसआई की श्रेणी में आती है और उन्हें ही एसएसआई को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ मिलता है। ऐसे में एक समूह एक पंजीकृत कंपनी की आड़ में एक अन्य कंपनी खोल देता है। कारोबारी की हिस्सेदारी हो जाती है। यानी कारोबार 3 करोड़ का हुआ तो भी गिनती में 1.5-1.5 करोड़ ही आएगा। डीडी समूह जो स्वयं को एसएसआई यूनिट बताता आया है उसकी चार कंपनियां है। इनमें महाकाल और मृत्युंजय डीडी समूह की कंपनियां है। स्वाती इंजीकॉन प्रा.लि., रिद्धीमा आॅर्गनाइजेशन और मुंबई की डीडी सुपर बायो आॅर्गेनिक भी समूह की कंपनियां हैं।
यह भी गड़बड़ियां...
चूंकि फर्टीलाइजर, पेस्टीसाइड और इनसेक्टिसाइड कंपनियों की गिनती छोटी इकाइयों के रूप में होती है। इसीलिए केंद्र सरकार ने कुछ पेस्टीसाइड प्रोडक्ल्ट पर एक्साइज ड्यूटी में छूट दे रखी है। कंपनी इस छूट का लाभ उठाने के साथ ऐसे उत्पादों का भी छूट प्राप्त उत्पादों के रूप में कारोबार करती है जिन पर सेक्शन-6 के चेप्टर 31-32 के तहत 12 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगती है। कंपनी इसी हथकंडे से 30 प्रतिशत उत्पाद बेचती हैं जिनकी कीमत करोड़ों होती है और उन पर एक्साइज ड्यूट लाखों में होती है।
दस्तावेजों में हेरफेर
कंपनियां एक्साइज ड्यूटी बचाने के लिए उत्पादन ज्यादा करती है लेकिन बताती कम है। इसके लिए दस्तावेजों में कच्चे माल की खरीदी, स्टॉक रजिस्ट्रर और इस्तेमाल रजिस्टर में जबरदस्त छेड़छाड़ की जाती है।
कंपनियां उत्पादन लागत बढ़ाने के लिए ट्रांसपोर्ट्स से रसीदें लेकर उनमें मनमाना भाड़ा लगाती हैं। इससे दस्तावेजों में उत्पादन लागत ज्यादा दिखे, ऊपरी अंतर भी कंपनी की कमाई है।
यह बनाती है खाद कंपनियां..
मिट्टी पोषक, त्रिकोदेर्मा वेरिडे, मेग्नेशियम सल्फेट, कॉपर सल्फेट,
पत्ते स्प्रे के लिए अकार्बनिक पोषक, नीम का तेल, लौह ईडीटीए, जस्ता ईडीटीए, फैरस सल्फेट,  काला फिनाइल, सफेद फिनाइल, फिनोलिक पाउडर जैसे उत्पाद।
यह हुई कार्रवाइयां...
डीजीसीईआई...
- वरुण फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स प्रा.लि., इंदौर 7 अगस्त
दस्तावेजों की समीक्षा जारी
- मोदी पेस्टीसाइड एंड केमिकल्स प्रा.लि., भोपाल 14 अगस्त
20 लाख जमा कराए..।
सेंट्रल एक्साइज
- एडवांस क्रॉप केअर प्रा.लि., राऊ/इंदौर 7 अगस्त
30 लाख जमा कराए..।
- डीडी केमिकल्स प्रा.लि.,पीथमपुर/इंदौर 19 अगस्त
- महाकाल केमिकल्स, पीथमपुर/इंदौर 19 अगस्त
- मृत्युंजय केमटेक प्रा.लि. पीथमपुर/इंदौर 19 अगस्त
- गायत्री केमिकल्स, पीथमपुर/इंदौर 19 अगस्त
दस्तावेजों की समीक्षा जारी
आयकर..
- सुमन ग्रुप आॅफ कंपनीज 14 अगस्त
5 करोड़ रुपए की अघोषित आय सरेंडर की।

No comments:

Post a Comment