Sunday, June 28, 2015

अल्ट्राटेक वाले बिड़लाजी बोल रिए हैं...


इंदौर छोड़ो, रतलाम में निवेश करो, सस्ती जमीन दिला देंगे 
- इन्वेस्टर्स समिट में करार किए बैठे उद्योगपतियों का लोगों ने छीना करार
- उद्योगपतियों ने विभाग से कहा करार की सूची ऑनलाइन करो लेकिन हमारा मोबाइल नंबर और ई-मेल एड्रेस तो हटा दो...
इंदौर. विनोद शर्मा । 
''हलो, अल्ट्राटेक सीमेंट से कुमार मंगलम बिड़लाजी बोल रहे हैं...। नहीं, मैं उनका सहायक बोल रहा हूं, क्या काम है बताएंगे? उनसे ही बात करनी है...। काम क्या है, यह तो बताओ...?  मप्र में निवेश के संबंध में बात करनी है। अच्छा तो आप उद्योग विभाग से हैं...? नहीं, मेरा नाम राधेश्याम है और मैं शाजापुर जिले के मक्सी से बोल रिया हूं...। सॉरी, वे ऐसे हर किसी से बात नहीं करते...। तूम बीच में क्यों आ रिए। उनको कारखाने के लिए ऐसी जमीन बतउआं की उनकी तबियत हरी हो जाएगी।ÓÓ  अक्टूबर में संपन्न हुई इन्वेस्टर्स समिट के बाद मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी सहित सरकार द्वारा सार्वजनिक की गई करारों की सूची ने निवेशकों का करार छीन लिया। वक्त-बेवक्त लोग सूची में दिए नंबरों पर फोन लगाते हैं और कहते हैं कि कहां इंदौर-भोपाल के चक्कर में पड़ते हो, हमारे यहां आओ कारखाना लगाओ, हम सस्ती जमीन दिला देंगे।
बीते सोमवार को भोपाल में संपन्न हुई करारों की समीक्षा बैठक के दौरान तमाम आला अधिकारियों की मौजूदगी में निवेशकों से जुड़ी जो समस्या सामने आई उसने अधिकारियों के कान खड़े कर दिए थे। करारों की सूची से मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी हटाए जाने की मांग करते हुए औद्योगिक संगठनों ने बताया कि समिट के बाद से ही मप्र से आने वाले कॉल की संख्या बढ़ गई है। सूची में नंबर देखकर जिसका जब मन करता है फोन लगा लेते हैं। मोबाइल बंद कर नहीं सकते और हर फिजूल फोन को जवाब देने का हमारे पास वक्त भी नहीं। ऐसे में फिजूल फोन हमारा काम भी प्रभावित कर रहे हैं। उद्योगपतियों को फोन करने वालों में बड़ी संख्या में पत्रकार भी शामिल है, जिन्होंने एमओयू के क्रियान्वयन का राउंडअप लेना अपना काम बना लिया है।
बेटमा के पास फूड प्रोसेसिंग पार्क के लिए मप्र सरकार से 2500 करोड़ का करार करके बैठी फ्यूचर वेंच्युअर्स प्रा.लि. के प्रेसीडेंट प्रवीण द्विवेदी को ई-मेल करके कहा जाता है कि इंदौर में जमीन की कीमत 1 से 2 करोड़ रुपए एकड़ है। आप रतलाम में निवेश करें। यहां हम 5 से 7 लाख रुपए एकड़ में ही जमीन दिला देंगे। वैसे भी इंदौर में अनाज, फल, सब्जी सभी कुछ दूसरे जिलों से ही जाता है। रेल कनेक्टिविटी में भी रतलाम इंदौर से आगे है। राजस्थान, गुजरात की सीमा पास में है।  इसी तरह जौअरी फर्टीलाइजर एंड केमिकल झाबुआ में 5150 करोड़ का निवेश करने वाली है। कंपनी के डायरेक्टर नवीन कपूर के मोबाइल पर कभी देवास से लोग फोन करते हैं तो कभी सीहोर जिले की तहसील आष्टा से। कहते हैं झाबुआ आदिवासी क्षेत्र है, वहां निवेश करना कंपनी के लिए नुकसानदायक होगा। यदि देवास, आष्टा, शाजापुर में कारखाना लगा तो कंपनी की निकल पड़ेगी। भारत एल्यूमिनियम कंपनी के सीईओ गुंजन गुप्ता से कहते हैं कि आप भी कहा ढिंढोरी जैसी जगह चुनकर 2700 करोड़ रुपया मिट्टी में मिला रहे हो। खंडवा हर मामले में बेहतर है। यहां नर्मदा है तो अकूत वन संपदा भी। रेलवे कनेक्टिविटी भी दूसरे शहरों से बेहतर है। कई बड़ी कंपनियां काम कर रही है।
अपना जिला ही बेस्ट...
मप्र टे्रड एंड फेसिलिटेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीट्राइफेक) के एक जनरल मैनेजर ने बताया जो कंपनी प्रतिनिधि मुख्यमंत्री के बुलावे के बाद समिट में आए थे उन्हें लोग फोन कैसे लगा लेते हैं। आश्चर्य है। हर व्यक्ति अपने गृह जिले की मार्केटिंग में व्यस्त है। एमओयू करने से पहले कंपनी ने प्रस्तावित जिले में कुछ तो देखा ही होगा? इस बात से फोन लगाने वालों को मतलब ही नहीं। वे तो सीमेंट का कारखाना भी अपने यहां चाहते हैं और पॉवर प्लांट भी। फिर चाहे जंगल, पत्थर या पानी हो या हो।
अब जारी करेंगे बिना संपर्क की सूची
एमपीट्राइफेक के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि एमओयू के साथ संबंधित का संपर्क नंबर हमने जनसुविधा की दृष्टि से जगजाहिर किया था लेकिन लोगों ने उसका दुरुपयोग किया। इसीलिए सूची नए सिरे जारी करेंगे उसमें सिर्फ संपर्क नहीं होगा।

इनसे भी किया संपर्क...
बदवे इंजीनियरिंग श्रीकांत बदलवे
अंडरहिल टेक्नोलॉजी राजीव पॉल
ऑटोमेटिव एक्सल अशोक राव

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