- डिजाइन में हेरफेर, कहीं 7 तो कहीं 25 फीट
इंदौर. विनोद शर्मा ।
यातायात के दबाव के साथ हादसों की संभावना कम करने के मकसद से बीआरटीएस के समानांतर बनाई गई सर्विस रोड 'चोरीÓ होने लगी हैं। यही वजह है कि बीआरटीएस के आकार लेते ही कागजों में फैली सर्विस रोड मैदान में सिकुडऩे लगी है। 11.400 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस के 200 फीट चौड़े 7 किलोमीटर लंबे हिस्से में डिजाइन के हिसाब से भले 4.5 मीटर चौड़ी सर्विस रोड बनाई जाना थी लेकिन मैदान में कहीं 3, कहीं 13 फीट चौड़ी सर्विस रोड ही नजर आती है। सवाल यह उठता है कि जब प्राधिकरण के पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध थी तो सर्विस रोड की चौड़ाई के साथ छेड़छाड़ क्यों और किसने की? बहरहाल, ऐसे सवालों का जवाब देने के बजाय जिम्मेदार एक-दूसरे पर आरोप मढ़ते नजर आते हैं।
2005 में जेएनएनयूआरएम के तहत सबसे पहला बीआरटीएस इंदौर का मंजूर हुआ था। इंदौर की नकल मारकर जिन शहरों ने बीआटीएस की डिजाइन बनाकर दी थी उनके कॉरिडोर को बने तीन से चार साल हो गए हैं। फिर बाद दिल्ली, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर की करें या अन्य किसी शहर की। प्रोजेक्ट में देर की वजह जब भी पूछी गई जिम्मेदार इन बड़े शहरों में बीआरटीएस को लेकर उठे विवाद का बहाना बनाकर यह कहकर चूप बैठ गए कि जल्दबाजी में हम खराब कॉरीडोर नहीं बनाएंगे। जिम्मेदारों के इन जवाबों को पचाकर पांच साल से व्यवस्थित कॉरीडोर की कल्पना किए बैठे शहरवासियों को निराशा हाथ लगती नजर आ रही है। जिन शहरों में बीआरटीएस दुविधा साबित हुआ उनसे सबक लेने के बजाय जैसा कॉरिडोर डिजाइन हुआ था, वैसा ही बनाने में नाकाम रहे। कॉरीडोर के समानांतर बनने वाली सर्विस रोड इसका बड़ा उदाहरण है जिसका कहीं अस्तित्व नजर आता है, कहीं नहीं।
आईआईटी, दिल्ली से शुरुआत में कॉरीडोर की जो डिजाइन तय की गई थी उसके तहत 60 मीटर वाले हिस्से में सर्विस रोड की चौड़ाई 7.50 मीटर थी। इसी 60 मीटर वाले हिस्से में जहां बस स्टॉप बनाया जाना है सर्विस रोड की चौड़ाई 7.50 से घटाकर 4.5 मीटर तय की थी ताकि बसों को ज्यादा जगह मिल पाए। यानी हर सूरत में 14.9 फीट से लेकर 24.7 फीट चौड़ा सर्विस रोड लोगों को मिलना था। जैसे-जैसे बीआरटीएस बन रहा है, वैसे-वैसे सर्विस रोड की चौड़ाई सिकुड़ रही है। दस्तावेजों में जिस सर्विस रोड की चौड़ाई 14.9 से 24.7 फीट तय है, वही सर्विस रोड मैदान में कहीं 8 तो कहीं 24 फीट चौड़ा नजर आता है।
क्या है कारण...
आईआईटी, दिल्ली की डिजाइन में संशोधन करके बस स्टॉप का स्थान बदला। स्थान के साथ सर्विस रोड की चौड़ाई भी कम ज्यादा की। इम्बार्क और आईबीआई जैसी कंसलटेंट कंपनी ने बनाई नई डिजाइन।
फर्क पड़ेगा...
सर्विस रोड की डिजाइन व्यवस्थित होगी तभी उस पर मुख्य सड़क का यातायात शिफ्ट होगा। तभी मुख्य सड़क का दबाव कम होगा। सड़क हादसे कम होंगे। जाम कम होंगे।
मंशा पर प्रश्नचिह्न...
- भंवरकुआं से नवलखा के बीच सर्विस रोड की चौड़ाई में छेड़छाड़ कम है क्योंकि वहां बड़ा हिस्सा शासकीय है और खुली जमीन ज्यादा थी।
- इसी तरह निरंजनपुर से शालीमार के बीच जहां खाली जमीन है वहां सर्विस रोड ज्यादा चौड़ी है जबकि शालीमार के सामने सड़क सिकुड़ जाती है। सी-21 मॉल, ऑर्बिट मॉल, मंगल सिटी के सामने भी हालत यही है जबकि यहां वाहनों के दबाव के कारण सर्विस रोड की जरूरत ज्यादा है।
यह है बीआरटीएस का प्रारूप
2-2 मीटर : सीवेजर-फुटपाथ
7.5-7.5 मीटर : सर्विस रोड
3-3 मीटर : स्ट्रॉम वॉटर डे्रन, स्ट्रीट लाइट
3-3 मीटर : साइकिल ट्रेक
2-2 मीटर : ग्रीन बेल्ट
4.70-4.70 मीटर : एलएमवी लेन
0.30-0.30 मीटर : रैलिंग
3.50-3.50 मीटर : बस लेन
जहां बस स्टॉप है वहां का प्रारूप
2.10-2.10 मीटर : सीवेजर-फुटपाथ
4.5-4.5 मीटर : सर्विस रोड
2.50-2.50 मीटर : स्ट्रॉम वॉटर डे्रन, स्ट्रीट लाइट
3-3 मीटर : साइकिल ट्रेक
0.30-0.30 मीटर : डिवाइडर
8.75-8.75 मीटर : एलएमवी लेन
0.30-0.30 मीटर : रैलिंग
2.5-2.5 मीटर : बस स्टॉप
9 मीटर : बस लेन
कहां कितनी चौड़ी है सर्विस रोड
एलआईजी से निरंजनपुर चौराहा
स्थान चौड़ाई (फीट में)
एलआईजी तिराहा 11 से 15
शनिवार दर्पण 13.5
शॉपिंग कॉम्पलेक्स 12
मालवा परिसर के सामने 23
तोरण-शहनाई के बीच 6-8
अमर विलास 7-8
एसबीआई 25
सी-21 22
मेगामॉल 8.5-10
भागीरथ बॉडी 22
कंट्री इन 18
मेहता इलेक्ट्रॉनिक 25
रसोमा साइट 18-20
अपना स्वीट्स 8.5
मंगल सिटी 20
मेट्रो टॉवर 13
सत्यसाईं से बसंत विहार २०
स्कीम-78 वाली साइट 24
शालीमार टाउनशिप 12.20-20
स्कीम-114 चौराहा 8-10
निरंजनपुर चौराहा 11-14
नवलखा से राजीवगांधी प्रतिमा
नवलखा चौराहा 25
होलकर कॉलेज 16
संगम गार्डन 10-15
दीनदयाल उपवन 18
किंग्स पार्क 12
गुर्जर हॉस्पिटल 16
टीटोस 22
इंदौर. विनोद शर्मा ।
यातायात के दबाव के साथ हादसों की संभावना कम करने के मकसद से बीआरटीएस के समानांतर बनाई गई सर्विस रोड 'चोरीÓ होने लगी हैं। यही वजह है कि बीआरटीएस के आकार लेते ही कागजों में फैली सर्विस रोड मैदान में सिकुडऩे लगी है। 11.400 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस के 200 फीट चौड़े 7 किलोमीटर लंबे हिस्से में डिजाइन के हिसाब से भले 4.5 मीटर चौड़ी सर्विस रोड बनाई जाना थी लेकिन मैदान में कहीं 3, कहीं 13 फीट चौड़ी सर्विस रोड ही नजर आती है। सवाल यह उठता है कि जब प्राधिकरण के पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध थी तो सर्विस रोड की चौड़ाई के साथ छेड़छाड़ क्यों और किसने की? बहरहाल, ऐसे सवालों का जवाब देने के बजाय जिम्मेदार एक-दूसरे पर आरोप मढ़ते नजर आते हैं।
2005 में जेएनएनयूआरएम के तहत सबसे पहला बीआरटीएस इंदौर का मंजूर हुआ था। इंदौर की नकल मारकर जिन शहरों ने बीआटीएस की डिजाइन बनाकर दी थी उनके कॉरिडोर को बने तीन से चार साल हो गए हैं। फिर बाद दिल्ली, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर की करें या अन्य किसी शहर की। प्रोजेक्ट में देर की वजह जब भी पूछी गई जिम्मेदार इन बड़े शहरों में बीआरटीएस को लेकर उठे विवाद का बहाना बनाकर यह कहकर चूप बैठ गए कि जल्दबाजी में हम खराब कॉरीडोर नहीं बनाएंगे। जिम्मेदारों के इन जवाबों को पचाकर पांच साल से व्यवस्थित कॉरीडोर की कल्पना किए बैठे शहरवासियों को निराशा हाथ लगती नजर आ रही है। जिन शहरों में बीआरटीएस दुविधा साबित हुआ उनसे सबक लेने के बजाय जैसा कॉरिडोर डिजाइन हुआ था, वैसा ही बनाने में नाकाम रहे। कॉरीडोर के समानांतर बनने वाली सर्विस रोड इसका बड़ा उदाहरण है जिसका कहीं अस्तित्व नजर आता है, कहीं नहीं।
आईआईटी, दिल्ली से शुरुआत में कॉरीडोर की जो डिजाइन तय की गई थी उसके तहत 60 मीटर वाले हिस्से में सर्विस रोड की चौड़ाई 7.50 मीटर थी। इसी 60 मीटर वाले हिस्से में जहां बस स्टॉप बनाया जाना है सर्विस रोड की चौड़ाई 7.50 से घटाकर 4.5 मीटर तय की थी ताकि बसों को ज्यादा जगह मिल पाए। यानी हर सूरत में 14.9 फीट से लेकर 24.7 फीट चौड़ा सर्विस रोड लोगों को मिलना था। जैसे-जैसे बीआरटीएस बन रहा है, वैसे-वैसे सर्विस रोड की चौड़ाई सिकुड़ रही है। दस्तावेजों में जिस सर्विस रोड की चौड़ाई 14.9 से 24.7 फीट तय है, वही सर्विस रोड मैदान में कहीं 8 तो कहीं 24 फीट चौड़ा नजर आता है।
क्या है कारण...
आईआईटी, दिल्ली की डिजाइन में संशोधन करके बस स्टॉप का स्थान बदला। स्थान के साथ सर्विस रोड की चौड़ाई भी कम ज्यादा की। इम्बार्क और आईबीआई जैसी कंसलटेंट कंपनी ने बनाई नई डिजाइन।
फर्क पड़ेगा...
सर्विस रोड की डिजाइन व्यवस्थित होगी तभी उस पर मुख्य सड़क का यातायात शिफ्ट होगा। तभी मुख्य सड़क का दबाव कम होगा। सड़क हादसे कम होंगे। जाम कम होंगे।
मंशा पर प्रश्नचिह्न...
- भंवरकुआं से नवलखा के बीच सर्विस रोड की चौड़ाई में छेड़छाड़ कम है क्योंकि वहां बड़ा हिस्सा शासकीय है और खुली जमीन ज्यादा थी।
- इसी तरह निरंजनपुर से शालीमार के बीच जहां खाली जमीन है वहां सर्विस रोड ज्यादा चौड़ी है जबकि शालीमार के सामने सड़क सिकुड़ जाती है। सी-21 मॉल, ऑर्बिट मॉल, मंगल सिटी के सामने भी हालत यही है जबकि यहां वाहनों के दबाव के कारण सर्विस रोड की जरूरत ज्यादा है।
यह है बीआरटीएस का प्रारूप
2-2 मीटर : सीवेजर-फुटपाथ
7.5-7.5 मीटर : सर्विस रोड
3-3 मीटर : स्ट्रॉम वॉटर डे्रन, स्ट्रीट लाइट
3-3 मीटर : साइकिल ट्रेक
2-2 मीटर : ग्रीन बेल्ट
4.70-4.70 मीटर : एलएमवी लेन
0.30-0.30 मीटर : रैलिंग
3.50-3.50 मीटर : बस लेन
जहां बस स्टॉप है वहां का प्रारूप
2.10-2.10 मीटर : सीवेजर-फुटपाथ
4.5-4.5 मीटर : सर्विस रोड
2.50-2.50 मीटर : स्ट्रॉम वॉटर डे्रन, स्ट्रीट लाइट
3-3 मीटर : साइकिल ट्रेक
0.30-0.30 मीटर : डिवाइडर
8.75-8.75 मीटर : एलएमवी लेन
0.30-0.30 मीटर : रैलिंग
2.5-2.5 मीटर : बस स्टॉप
9 मीटर : बस लेन
कहां कितनी चौड़ी है सर्विस रोड
एलआईजी से निरंजनपुर चौराहा
स्थान चौड़ाई (फीट में)
एलआईजी तिराहा 11 से 15
शनिवार दर्पण 13.5
शॉपिंग कॉम्पलेक्स 12
मालवा परिसर के सामने 23
तोरण-शहनाई के बीच 6-8
अमर विलास 7-8
एसबीआई 25
सी-21 22
मेगामॉल 8.5-10
भागीरथ बॉडी 22
कंट्री इन 18
मेहता इलेक्ट्रॉनिक 25
रसोमा साइट 18-20
अपना स्वीट्स 8.5
मंगल सिटी 20
मेट्रो टॉवर 13
सत्यसाईं से बसंत विहार २०
स्कीम-78 वाली साइट 24
शालीमार टाउनशिप 12.20-20
स्कीम-114 चौराहा 8-10
निरंजनपुर चौराहा 11-14
नवलखा से राजीवगांधी प्रतिमा
नवलखा चौराहा 25
होलकर कॉलेज 16
संगम गार्डन 10-15
दीनदयाल उपवन 18
किंग्स पार्क 12
गुर्जर हॉस्पिटल 16
टीटोस 22
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