- संपत्ति कर जमा कराकर नगर निगम ने दी एनओसी
- सुप्रीमकोर्ट में जिन 170 अवैध इमारतों का मामला पेंडिंग हैं उनमें से एक है इमारत
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आवासीय जमीन के व्यावसायिक उपयोग पर इंदौर विकास प्राधिकरण ने जिस स्कीम-71 के दर्जनभर मैरिज गार्डनों पर ताला डाल दिया था उसी स्कीम की एक इमारत में महावीर हॉस्पिटल चल रहा है। दस्तावेजों में इमारत का भू-उपयोग आवासीय स्वीकृत है जबकि नगर निगम के ही अधिकारियों ने मिलीभगत के चलते आवासीय दरों पर संपत्ति कर जमा कराकर अस्पताल को हरी झंडी दे दी। वह भी उस स्थिति में जब इमारत उन 170 इमारतों की सूची में से एक है जिनकी वैधानिकता को लेकर सुप्रीमकोर्ट में प्रकरण विचाराधीन है। नगर निगम के अधिकारी अब तक इसे 'रिमुवल अंडर प्रोसेसÓ बताकर बचाते रहे।
मुद्दा स्कीम-71 के प्लॉट नंबर 2-ए का है। यहां चार मंजिला इमारत में तीन महीने से महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर चल रहा है जबकि 14 जून 1996 में नगर निगम ने आवासीय उपयोग के मकसद से इमारत के निर्माण की मंजूरी दी थी। आवासीय इमारत में अस्पताल कैसे शुरू हो गया? दबंग दुनिया ने इसकी तफ्तीश की। पता चला, नगर निगम के आला अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर पहले तो आवासीय दर से 14 साल से बकाया संपत्ति कर जमा कराया। बाद में अस्पताल शुरू होने के बावजूद इमारत को आवासीय रूप से एनओसी दे डाली। खुलासे के बाद जब दबंग दुनिया ने इमारत के संपत्ति कर खाते को लेकर नगर निगम से जानकारी मांगी तो अधिकारी हर बार बात टाल गए। इस काम में आईटी विभाग ने भी अधिकारियों की नियमों से परे जाकर मदद की।
नियमानुसार जिस इमारत का नक्शा आवासीय मंजूर हुआ उसमें नगर निगम व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं दे सकती। वह भी उस स्थिति में जब प्लॉट का भू-उपयोग भी आवासीय ही हो। मित्र मंडल संस्था ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण किया जबकि महावीर ट्रस्ट ने आवासीय प्लॉट पर व्यावसायिक उपयोग शुरू करके इंदौर विकास प्राधिकरण की लीज शर्तों का भी उल्लंघन किया है।
सुप्रीमकोर्ट की आंखों में झोंकी धूल...
पूर्व पार्षद परमानंद सिसोदिया ने 2007 में सुप्रीमकोर्ट में याचिका (एसएलपी-सीविल 24768) दायर की थी। याचिका में सिसोदिया ने स्वीकृति के विपरीत बनी शहर की 170 इमारतों की वैधानिकता को चुनौती दी थी। प्रकरण में 2007 से 12 दिसंबर 2012 के बीच 19 सुनवाई हो चुकी है। अगली सुनवाई 15 फरवरी 2013 को होना है। सुप्रीमकोर्ट में नगर निगम ने 170 इमारतों की जो फेहरिस्त दी है उसमें उक्त इमारत की जानकारी 147वें क्रम पर है। जब तक वैधानिकता का फैसला सुप्रीमकोर्ट नहीं दे देती तब तक नगर निगम को किसी भी प्रकार की एनओसी जारी नहीं करनी थी जो उन्होंने की।
'रिमुवल अंडर प्रोसेस...Ó
नगर निगम के दस्तावेजों की मानें तो 2-ए कुल 371.55 वर्गमीटर लंबा-चौड़ा प्लॉट है। प्लॉट चेतना सुरेंद्र कुमारी तर्फे मित्र मंडल सार्वजनिक सहकारी चिकित्सालय के नाम पर दर्ज है। 14 जून 1996 को इमारत का दाखला नं. 812 मंजूर हुआ। दाखले के मुताबिक निर्माण आवासीय होना था। बेसमेंट+जी+मेजनाइन+३+पेंट हाउस बनना था। कुल 802 वर्गमीटर का निर्माण बताया गया जो तमाम मंजिलों का क्षेत्रफल जोडऩे के बाद 2154.31 वर्गमीटर होता है। इसके अलावा ३१५ वर्गमीटर की पार्किंग अलग। नगर निगम ने ३९ मार्च १९९३ को (जो कि दाखला मंजूरी से भी तीन साल पहले की तारीख है) नोटिस(नं.३०४०) और 5 फरवरी 1997 को नोटिस (नं.५३६) और 30 नवंबर 2011 में नोटिस (नं.२९४) थमाया गया था। उधर, सुप्रीमकोर्ट में जो जवाब फाइल किया गया उसमें लिखा है कि बिल्डिंग पर रिमुवल की कार्रवाई अंडर प्रोसेस है लेकिन आज तक रिमुवल नहीं की।
रत्तीभर भी गलत नहीं है हॉस्पिटल में...
- बिल्डिंग का नक्शा अस्पताल के लिए ही पास हुआ था। शुरु से आज तक बिल्डिंग अस्पताल है। जमीन का भू-उपयोग भी व्यावसायिक है। अस्पताल में रत्तीभर की अनियमितता नहीं है। तभी तो नगर निगम ने हमें एनओसी दी। अस्तपाल नवंबर से शुरू हुआ है।
- डॉ. एम.के.जैन, एमडी
महावीर नर्सिंग होम एंड रिसर्च सेंटर
(समूह गुना का है। वहां )
- सुप्रीमकोर्ट में जिन 170 अवैध इमारतों का मामला पेंडिंग हैं उनमें से एक है इमारत
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आवासीय जमीन के व्यावसायिक उपयोग पर इंदौर विकास प्राधिकरण ने जिस स्कीम-71 के दर्जनभर मैरिज गार्डनों पर ताला डाल दिया था उसी स्कीम की एक इमारत में महावीर हॉस्पिटल चल रहा है। दस्तावेजों में इमारत का भू-उपयोग आवासीय स्वीकृत है जबकि नगर निगम के ही अधिकारियों ने मिलीभगत के चलते आवासीय दरों पर संपत्ति कर जमा कराकर अस्पताल को हरी झंडी दे दी। वह भी उस स्थिति में जब इमारत उन 170 इमारतों की सूची में से एक है जिनकी वैधानिकता को लेकर सुप्रीमकोर्ट में प्रकरण विचाराधीन है। नगर निगम के अधिकारी अब तक इसे 'रिमुवल अंडर प्रोसेसÓ बताकर बचाते रहे।
मुद्दा स्कीम-71 के प्लॉट नंबर 2-ए का है। यहां चार मंजिला इमारत में तीन महीने से महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर चल रहा है जबकि 14 जून 1996 में नगर निगम ने आवासीय उपयोग के मकसद से इमारत के निर्माण की मंजूरी दी थी। आवासीय इमारत में अस्पताल कैसे शुरू हो गया? दबंग दुनिया ने इसकी तफ्तीश की। पता चला, नगर निगम के आला अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर पहले तो आवासीय दर से 14 साल से बकाया संपत्ति कर जमा कराया। बाद में अस्पताल शुरू होने के बावजूद इमारत को आवासीय रूप से एनओसी दे डाली। खुलासे के बाद जब दबंग दुनिया ने इमारत के संपत्ति कर खाते को लेकर नगर निगम से जानकारी मांगी तो अधिकारी हर बार बात टाल गए। इस काम में आईटी विभाग ने भी अधिकारियों की नियमों से परे जाकर मदद की।
नियमानुसार जिस इमारत का नक्शा आवासीय मंजूर हुआ उसमें नगर निगम व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं दे सकती। वह भी उस स्थिति में जब प्लॉट का भू-उपयोग भी आवासीय ही हो। मित्र मंडल संस्था ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण किया जबकि महावीर ट्रस्ट ने आवासीय प्लॉट पर व्यावसायिक उपयोग शुरू करके इंदौर विकास प्राधिकरण की लीज शर्तों का भी उल्लंघन किया है।
सुप्रीमकोर्ट की आंखों में झोंकी धूल...
पूर्व पार्षद परमानंद सिसोदिया ने 2007 में सुप्रीमकोर्ट में याचिका (एसएलपी-सीविल 24768) दायर की थी। याचिका में सिसोदिया ने स्वीकृति के विपरीत बनी शहर की 170 इमारतों की वैधानिकता को चुनौती दी थी। प्रकरण में 2007 से 12 दिसंबर 2012 के बीच 19 सुनवाई हो चुकी है। अगली सुनवाई 15 फरवरी 2013 को होना है। सुप्रीमकोर्ट में नगर निगम ने 170 इमारतों की जो फेहरिस्त दी है उसमें उक्त इमारत की जानकारी 147वें क्रम पर है। जब तक वैधानिकता का फैसला सुप्रीमकोर्ट नहीं दे देती तब तक नगर निगम को किसी भी प्रकार की एनओसी जारी नहीं करनी थी जो उन्होंने की।
'रिमुवल अंडर प्रोसेस...Ó
नगर निगम के दस्तावेजों की मानें तो 2-ए कुल 371.55 वर्गमीटर लंबा-चौड़ा प्लॉट है। प्लॉट चेतना सुरेंद्र कुमारी तर्फे मित्र मंडल सार्वजनिक सहकारी चिकित्सालय के नाम पर दर्ज है। 14 जून 1996 को इमारत का दाखला नं. 812 मंजूर हुआ। दाखले के मुताबिक निर्माण आवासीय होना था। बेसमेंट+जी+मेजनाइन+३+पेंट हाउस बनना था। कुल 802 वर्गमीटर का निर्माण बताया गया जो तमाम मंजिलों का क्षेत्रफल जोडऩे के बाद 2154.31 वर्गमीटर होता है। इसके अलावा ३१५ वर्गमीटर की पार्किंग अलग। नगर निगम ने ३९ मार्च १९९३ को (जो कि दाखला मंजूरी से भी तीन साल पहले की तारीख है) नोटिस(नं.३०४०) और 5 फरवरी 1997 को नोटिस (नं.५३६) और 30 नवंबर 2011 में नोटिस (नं.२९४) थमाया गया था। उधर, सुप्रीमकोर्ट में जो जवाब फाइल किया गया उसमें लिखा है कि बिल्डिंग पर रिमुवल की कार्रवाई अंडर प्रोसेस है लेकिन आज तक रिमुवल नहीं की।
रत्तीभर भी गलत नहीं है हॉस्पिटल में...
- बिल्डिंग का नक्शा अस्पताल के लिए ही पास हुआ था। शुरु से आज तक बिल्डिंग अस्पताल है। जमीन का भू-उपयोग भी व्यावसायिक है। अस्पताल में रत्तीभर की अनियमितता नहीं है। तभी तो नगर निगम ने हमें एनओसी दी। अस्तपाल नवंबर से शुरू हुआ है।
- डॉ. एम.के.जैन, एमडी
महावीर नर्सिंग होम एंड रिसर्च सेंटर
(समूह गुना का है। वहां )
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