नेता-निगम-प्राधिकरण ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जनहित की राशि दी निजी संस्थान को
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
पीडब्ल्यूडी की जमीन कब्जाकर अवैध इमारत तानने के मामले में प्रेस क्लब के साथ नेता, नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण भी समान जिम्मेदार हैं। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों की सिर्फ इतनी गलती है कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी की जमीन कब्जाई लेकिन नेता, निगम और प्राधिकरण ने तो पैसा देकर उस जमीन पर ईमारत तनवा दी। वह सिर्फ इसलिए कि क्लब के कलमकारों से उनकी बनी रहे। घपले-घोटाले उजागर न हो। हमेशा सकारात्मक समाचार ही सुकुन देते रहें।
प्रेस क्लब परिसर में 2005 से 2012 के बीच बनी ईमारत की लागत तकरीबन 1.5 करोड़ रुपए है और यह सारी रकम जनसहयोग से जुटाई गई। इसके लिए न तो पदाधिकारियों ने अपनी जेब से पैसा लगाया। न ही सदस्यों से कोई सहायता ली गई। पैसा मिला नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, सांसदों और विधायकों के साथ मंत्रियों से। अनुदान के नाम पर दिया प्रेस क्लब को दिया गया पैसा कलमकारों की तरफ से नेता, निगम और प्राधिकरण के पदाधिकारियों के लिए इस बात की बड़ी गारंटी थी कि वे चाहे जितनी मनमानी करें लेकिन उनके खिलाफ अखबारी अभियान नहीं चलेंगे। हालांकि जनप्रतिनिधि इस बात से सहमत नहीं है। लेकिन उनके पास इस बात का भी जवाब नहीं है कि जो सांसद और विधायक निधि उनके अपने क्षेत्र और क्षेत्रवासियों की सहुलियत पर खर्च की जाना चाहिए थी उसे प्रेस क्लब की अवैध इमारत में क्यों और किस नियम-अधिकार के तहत खपाया गया। प्रेस क्लब में पैसा लगाने से जनता का क्या हित हुआ? क्योंकि प्रेस क्लब एक निजी संगठन है। जिसके अपने सदस्य हैं। अपना संविधान है। अपने संचालक हैं जो उस जमीन को लेकर अपने हिस्से की लीज तक नहीं भर पाए जिसका मालिक बताकर नगर निगम में नक्शा मंजूरी के लिए आवेदन किया गया था।
सभी हैं लोकायुक्त के घेरे में....
इंदौर प्रेस क्लब को लेकर लोकायुक्त में अलग-अलग प्रकरण दर्ज हैं। इन प्रकरणों में प्रेस क्लब सिर्फ पार्टी है, निशाना इन्हीं नेता, निगम और प्राधिकरण के पदाधिकारियों पर साधा गया है जिन्होंने पर्मिशन दी न दी लेकिन बिना पर्मिशन निर्माण के लिए पैसा जरूर दिया और दिल खोलकर दिया। इनमें पूर्व महापौर डॉ.उमाशशि शर्मा, सभापति शंकर लालवानी, एमआईसी सदस्य (राजेंद्र राठौर, मुन्नालाल यादव, सपना चौहान, चंदू शिंदे, शंकर यादव, लालबहादुर वर्मा, अनिल बिंदल, शांता झंवर व अन्य) प्रमुख रूप से शामिल हैं जिन्होंने अधिकारियों के नक्शा नामंजूर करने के बावजूद क्लब की ईमारत को अनुदान दिया। पूरे 25 लाख रुपए। वह भी उस स्थिति में जब जेएनएनयूआरएम से पैसा न मिलने तक यही महापौर और एमआईसी विकासकार्यों के लिए वित्तीय संकट का बहाना बनाती आ रही थी। ऐसे में या तो नक्शा नामंजूर करना गैरकानूनी था या फिर अनुदान देना। दोनों ही सूरतों में निगम के नुमाइंदे जांच के घेरे में है।
-- ठिक इसी तरह 270 करोड़ का प्लॉट न बिकने तक बजट के लिए पैसा-पैसा करने वाले प्राधिकरण के अध्यक्ष मधु वर्मा ने भी प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के प्रति अपनी मुहब्बत का इजहार 20 लाख रुपए के अनुदान के साथ किया। सी.बी. सिंह और प्रमोद गुप्ता ने सीईओ रहते इसमें उनका भरपूर साथ दिया क्योंकि उनके भी क्लब के कलमकारों से संबंध अच्छे ही थे। जिस वक्त में पैसा दिया गया उस वक्त में आईडीए में काम करने वाले ठेकेदार अपना बकाया लेने के लिए प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे थे। कई विकासकार्य रूके हुए थे।
राजनीतिक प्रश्रय
राज्यसभा सांसद अब्दुल्ला आजमी, नारायण केसरी, सांसद सुमित्रा महाजन, पूर्व विधायक मनोज पटेल सहित कई विधायकों ने अपनी निधि से इस निर्माण में पैसा जारी किया था। सांसद सुषमा स्वराज ने क्लब परिसर में सार्वजनिक वाचनालय के निर्माण के लिए 10.17 लाख रुपए दिए।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
पीडब्ल्यूडी की जमीन कब्जाकर अवैध इमारत तानने के मामले में प्रेस क्लब के साथ नेता, नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण भी समान जिम्मेदार हैं। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों की सिर्फ इतनी गलती है कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी की जमीन कब्जाई लेकिन नेता, निगम और प्राधिकरण ने तो पैसा देकर उस जमीन पर ईमारत तनवा दी। वह सिर्फ इसलिए कि क्लब के कलमकारों से उनकी बनी रहे। घपले-घोटाले उजागर न हो। हमेशा सकारात्मक समाचार ही सुकुन देते रहें।
प्रेस क्लब परिसर में 2005 से 2012 के बीच बनी ईमारत की लागत तकरीबन 1.5 करोड़ रुपए है और यह सारी रकम जनसहयोग से जुटाई गई। इसके लिए न तो पदाधिकारियों ने अपनी जेब से पैसा लगाया। न ही सदस्यों से कोई सहायता ली गई। पैसा मिला नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, सांसदों और विधायकों के साथ मंत्रियों से। अनुदान के नाम पर दिया प्रेस क्लब को दिया गया पैसा कलमकारों की तरफ से नेता, निगम और प्राधिकरण के पदाधिकारियों के लिए इस बात की बड़ी गारंटी थी कि वे चाहे जितनी मनमानी करें लेकिन उनके खिलाफ अखबारी अभियान नहीं चलेंगे। हालांकि जनप्रतिनिधि इस बात से सहमत नहीं है। लेकिन उनके पास इस बात का भी जवाब नहीं है कि जो सांसद और विधायक निधि उनके अपने क्षेत्र और क्षेत्रवासियों की सहुलियत पर खर्च की जाना चाहिए थी उसे प्रेस क्लब की अवैध इमारत में क्यों और किस नियम-अधिकार के तहत खपाया गया। प्रेस क्लब में पैसा लगाने से जनता का क्या हित हुआ? क्योंकि प्रेस क्लब एक निजी संगठन है। जिसके अपने सदस्य हैं। अपना संविधान है। अपने संचालक हैं जो उस जमीन को लेकर अपने हिस्से की लीज तक नहीं भर पाए जिसका मालिक बताकर नगर निगम में नक्शा मंजूरी के लिए आवेदन किया गया था।
सभी हैं लोकायुक्त के घेरे में....
इंदौर प्रेस क्लब को लेकर लोकायुक्त में अलग-अलग प्रकरण दर्ज हैं। इन प्रकरणों में प्रेस क्लब सिर्फ पार्टी है, निशाना इन्हीं नेता, निगम और प्राधिकरण के पदाधिकारियों पर साधा गया है जिन्होंने पर्मिशन दी न दी लेकिन बिना पर्मिशन निर्माण के लिए पैसा जरूर दिया और दिल खोलकर दिया। इनमें पूर्व महापौर डॉ.उमाशशि शर्मा, सभापति शंकर लालवानी, एमआईसी सदस्य (राजेंद्र राठौर, मुन्नालाल यादव, सपना चौहान, चंदू शिंदे, शंकर यादव, लालबहादुर वर्मा, अनिल बिंदल, शांता झंवर व अन्य) प्रमुख रूप से शामिल हैं जिन्होंने अधिकारियों के नक्शा नामंजूर करने के बावजूद क्लब की ईमारत को अनुदान दिया। पूरे 25 लाख रुपए। वह भी उस स्थिति में जब जेएनएनयूआरएम से पैसा न मिलने तक यही महापौर और एमआईसी विकासकार्यों के लिए वित्तीय संकट का बहाना बनाती आ रही थी। ऐसे में या तो नक्शा नामंजूर करना गैरकानूनी था या फिर अनुदान देना। दोनों ही सूरतों में निगम के नुमाइंदे जांच के घेरे में है।
-- ठिक इसी तरह 270 करोड़ का प्लॉट न बिकने तक बजट के लिए पैसा-पैसा करने वाले प्राधिकरण के अध्यक्ष मधु वर्मा ने भी प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के प्रति अपनी मुहब्बत का इजहार 20 लाख रुपए के अनुदान के साथ किया। सी.बी. सिंह और प्रमोद गुप्ता ने सीईओ रहते इसमें उनका भरपूर साथ दिया क्योंकि उनके भी क्लब के कलमकारों से संबंध अच्छे ही थे। जिस वक्त में पैसा दिया गया उस वक्त में आईडीए में काम करने वाले ठेकेदार अपना बकाया लेने के लिए प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे थे। कई विकासकार्य रूके हुए थे।
राजनीतिक प्रश्रय
राज्यसभा सांसद अब्दुल्ला आजमी, नारायण केसरी, सांसद सुमित्रा महाजन, पूर्व विधायक मनोज पटेल सहित कई विधायकों ने अपनी निधि से इस निर्माण में पैसा जारी किया था। सांसद सुषमा स्वराज ने क्लब परिसर में सार्वजनिक वाचनालय के निर्माण के लिए 10.17 लाख रुपए दिए।
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