Sunday, June 28, 2015

'सपनोंÓ से पहले 'हकीकतÓ के सौदे special


इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
टीसीएस, इन्फोसिस, आईआईटी और आउटर रिंग रोड जैसी ऐसी कई सरकारी योजनाएं हैं जो आज की स्थिति में इंदौर और उसके बाशिंदों के लिए सिर्फ सपना ही हैं। योजनाएं कुछ  तो दस्तावेजों में हैं और कुछ कल्पनाओं में। उधर, इन सपनों में सब्जबाग का तड़का डालकर सौदागर हकीकत का सौदा करके बैठ गए। सपने साकार हो या न हो लेकिन सौदागरों का काम हो गया। कॉलोनियां कट गई। तिजौरियां भर गई। आज पैसा लगाओ, कल दोगुना पाओ के सपने के साथ खरीदारों ने भी खरीदारी के रिकॉर्ड तोड़ दिए।
जो भी व्यक्ति यह कहता है कि इंदौर के सपने बिल्डरों के घर में बैठकर बुने जाते हैं तो वह गलत नहीं कहता। प्रस्तावित योजनाएं और उनके आसपास आसमान तक पहुंचे जमीनों के दाम इसका बड़ा उदाहरण है। फिर आईआईटी, आउटर रिंग रोड हो, रेलवे स्टेशन हो, इंदौर-बेतूल और खंडवा रोड का विस्तार हो या दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरीडॉर (डीएमआईसी)जैसी औद्योगिक परियोजनाएं हर जगह योजनाएं बाद में पहुंची, कॉलोनाइजर पहले पहुंच गए। आईडीए और हाउसिंग बोर्ड की योजनाओं की हालत भी यही है। सुपर कॉरिडोर, राऊ उपनगर जैसी परियोजनाएं इसका उदाहरण हैं।
आउटर रिंग रोड
तकरीबन 100 किलोमीटर लंबा बनना है रिंग रोड। एनएचएआई ने सर्वे करके जमीन अधिग्रहण शुरू कर दिया है। निर्माण की लागत तकरीबन 1000 करोड़ आंकी जा रही है। रोड राऊखेड़ी, गारी पिपल्या, उज्जैन रोड जेल के पीछे, पालिया, हातोद के पहले से, जम्बुडी हप्सी, पिपल्या राव, धरनावदा, कलारिया, पीथमपुर के पास, सोनवाय, घोसला होते हुये उमरिया तक की होगी। इसे ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट के तहत लिया जायेगा। इन सभी गांवों तक कॉलोनियां कट चुकी हैं या कट रही हैं।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी)
हालात :- सिमरोल में 502 एकड़ जमीन पर बनने वाले आईआईटी के स्थाई भवन के लिए समय सीमा काम शुरू होने के दिन से 24 माह रखी गई है। आईआईटी के आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए साल 2006 की मंजूर दर से 388 करोड़ रुपए रखे गए हैं, जिसे संशोधित किया जा रहा है। अब निर्माण की लागत करीब 800 करोड़ अनुमानित की गई है। 198 एकड़ जमीन वन विभाग की है। निर्माण के पहले चरण की मंजूरी केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय से आ गई है। शासन से 10.70 करोड़ रुपए मिलते ही दूसरे व अंतिम चरण की मंजूरी भी मिल जाएगी। निर्माण का लक्ष्य जून 2013 का है।
यह कटी कॉलोनियां :- आसाराम बापू चौराहे से लेकर चोरल गांव 100 से ज्यादा कॉलोनी कटी। वास्तू लैंड 1, 2 और 3, ट्राइकॉन सिटी, राइकॉन सिटी, प्रेस्ट्रीज वात्सल्य, शिव सिटी 1 और 2, ईशान टाउनशिप, विंध्याचल, चिखली रिसोर्ट, तिंछा रिसोर्ट, आदेश एम्पायर ग्रीन हाउस। घोसीखेड़ा, सिमरोल, चिखली गांव में आईआईटी के प्रस्तावित द्वारों को बताकर जमीन की मनमानी कीमतें वसूली जा रही है।
सुपर कॉरिडोर : टीसीएस-इन्फोसिस
तकरीबन 9 किलोमीटर लंबा है कॉरिडोर। यहां लगभग 100 भूखंड नियोजित हुए हैं, जिनका क्षेत्रफल न्यूनतम 50,000 वर्गफीट से दो लाख वर्गफीट तक है। बाकी लगभग 300 भूखंड छोटे आकार के हैं। 35 से ज्यादा भू-उपयोग है। टीसीएस-इन्फोसिस जैसी कंपनियों को यहां जमीन मिल चुकी है। नर्मदा और गैस लाइन का नेटवर्क तैयार होना है।
यह हुआ :- एमआरएमजीएफ ग्रीन इंदौर, प्रेस्टीज-2 वात्सल्य, बालाजी धाम, सांवरिया सिटी, एल.एन.सिटी,  मार्स ड्यूरो बिल्ड, ईशा ऐवेन्यू, नरिमन सिटी-1, साकार सिटी, कुबेर सिटी, सुनेर फार्म्स, सिल्वर लीफ, ड्रीम आशियाना,  पिनेकल सिटी, स्लाई टेक जैसी कॉलोनी कटी। जमीन के भाव जनवरी 2011 में 15 लाख रुपए बीघा थे आज उन्हीं जमीनों के भाव 1 से 1.5 करोड़ रुपए एकड़ है।
रेलवे स्टेशन
(पालिया और शकर खेड़ी)
आईडीए और कॉलोनाइजरों की मानें तो इंदौर में दो नए रेल स्टेशन बनना है। इंदौर-रतलाम लाइन पर पालिया में। इंदौर-उज्जैन लाइन पर शकर खेड़ी में। हालांकि दोनों स्टेशन अब तक सिर्फ दस्तावेजों में। रेलवे के पास अब तक कोई प्लानिंग नहीं।
पालिया स्टेशन के नाम पर हातोद-पालिया रोड पर बालाजी रेसीडेंसी, ऑटम विंड जैसी कॉलोनियां कटी। हातोद से उज्जैन रोड के बीच बड़ी तादाद में कॉलोनाइजरों ने जमीन खरीदी। इसी तरह शकर खेड़ी स्टेशन के नाम पर कबीट खेड़ी, भानगढ़, भाग्या, शकर खेड़ी, कैलोदहाला, ढाबली तक में जमीनों के भाव दो साल में तीन गुना तक बढ़ गए। मीरचंदानी ग्रीन, सिंगापुर सिटी, ज्ञानशिला, ड्रीम सिटी, आईबीडी, रास टाउन जैसी कॉलोनियां।
एमआर-11
ओमेक्स सिटी-1 से देवासनाका, एबी रोड, निरंजनपुर  होते हुए उज्जैन रोड तक बनना है। बायपास से एबी रोड के बीच की कड़ी का एक हिस्सा बना। सड़क बिल्डरों ने ही बनाई। प्राधिकरण की प्लानिंग सिर्फ दस्तावेजों में।
हकीकत :- दर्जनभर से ज्यादा कॉलोनियां कटी। प्रिंसेस एस्टेट, 101 टाउन, पिनेकल ड्रीम्स, शेषशायीनगर, कोर्णाक एस्टेट। दो साल पहले तक 300-400 रुपए वर्गफीट था प्लॉट का भाव, आज की कीमत 1500 रुपए वर्गफीट के पार।
एमआर-12 :- प्राधिकरण की प्लानिंग सिर्फ दस्तावेजों में।
मौके पर :- 10 साल पहले ही कट गई थी इंद्रप्रस्थ, इंदौर टाउन, जैसी कॉलोनियां। सेटेलाइट के नक्शे में ही एमआर-12 तो बनी हुई बताई ही, कैलोदहाला क्रॉसिंग पर 900 मीटर लंबा रेलवे ओवर ब्रिज भी बता दिया। रास टाउन, आईबीडी, सिंगापुर सिटी भी है यहां।
इंदौर-डबलचौकी फोरलेन
नेशनल हाई-वे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इंदौर-बेतूल (राष्ट्रीय राजमार्ग 59ए ) के विस्तार के लिए जो 100 करोड़ की योजना भेजी है उसके तहत इंदौर से डबल चौकी के बीच फोरलेन भी बनना है। हालांकि मामला अभी दस्तावेजों में दफन है।
-- देवगुराडिय़ा से डबल चौकी तक इंदौर के कॉलोनाइजरों ने जमीनें खरीदी। क्रिस्टल पार्क, परम विहार जैसी कॉलोनियां कट चुकी है।

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