अक्टूबर में आवंटित हुई 20 हजार बोरी, बटी 10 हजार, 10 हजार निरस्त
डीडी अब तक दुकानों से दूर है नवंबर का राशन
इंदौर, विनोद शर्मा ।
सरकार जहां करोड़ों रुपया खर्च करके गरीबों को नित-नई सौगात मुहैया करा रही है वहीं खाद्य विभाग के अधिकारियों की टालमटौल के कारण गरीबों को वक्त पर राशन नहीं मिल पा रहा है। हालात यह है कि अक्टूबर में आधा अनाज बांटकर आधा लैप्स करके बैठे खाद्य विभाग के अधिकारियों ने डीडी लेने के 15 दिन बाद भी नवंबर का राशन अब तक दुकानदारों को मुहैया नहीं कराया। हालात यह है कि दुकानदार एमपीएफसी
े के बाद डीडी लेने के बावजूद अब तक 80 दुकानदारों को राशन उपलब्ध नहीं कराया गया। दुकानदार सरकारी गोदामों के चक्कर काट रहे हैं और गरीब दुकानदारों के।
तमाम उपचार के बावजूद सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बीमारियां दूर नहीं हुई। राशन के लिए यहां-वहां धक्के खाते दुकानदार और उपभोक्ता इसका बड़ा उदाहरण है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो अक्टूबर में त्योहारी तैयारियों को देखते हुए खाद्य विभाग ने 20 हजार बोरी अनाज उपलब्ध कराया था। दुकानदारों से 20 हजार बोरी के लिए डीडी भी लिए गए जबकि आपूर्ति हुई सिर्फ 10 हजार बोरियों की। दुकानदार टल्ले खाते रहे लेकिन मप्र खाद्य निगम और खाद्य विभाग इंदौर ने वितरण नहीं किया। आखिरकार 10 हजार बोरियां निरस्त हो गई। बात जिम्मेदारी की आई तो खाद्य निगम ने पल्ला झाड़ते हुए खाद्य विभाग को जिम्मेदार ठहराया जबकि खाद्य विभाग की मानें तो जिम्मेदार खाद्य निगम है। निगम ने कोटे के तहत आवंटित अनाज दिया ही नहीं। जब अनाज उठा ही नहीं तो लैप्स तो होगा ही। बहररहाल, अब दुकानदारों की डीडी को नवंबर के हिसाब में समायोजित किया जा रहा है। इधर, 20 से 25 अक्टूबर के बीच नए सिरे से डीडी देकर बैठे 70 फीसदी दुकानदारों को अधिकारियों की जिद-जिरह के कारण अब तक नवंबर का राशन नहीं मिला। नाराज दुकानदारों की मानें तो अफसरों के अडिय़ल रवैये के कारण अक्टूबर में तो फिर भी आधा अनाज मिल गया था लेकिन नवंबर में उम्मीद नहीं है कि आधे का आधा भी मिल जाए।
दिक्कतें....
---नवंबर का राशन 30 अक्टूबर तक उठ जाना था लेकिन नहीं उठ पाया। स्वयं खाद्य नियंत्रक की मानें तो त्योहारों के कारण राशन नहीं उठा। 2 नवंबर तक अंत्योदय का 70 और बीपीएल का 30 फीसदी राशन उठा। सामान्य राशनकार्ड के लिए राशन नहीं उठा।
-- दुकानदारों ने डीडी दे दी। अब जब राशन के लिए गाड़ी लेकर खाद्य निगम के गोदाम जाते हैं तो अधिकारी कहते हैं कल आना। परसो आना।
-- दुकानदारों को जैसे सरकार आश्वासन देती है वैसा ही आश्वासन देकर वे ग्राहकों को चलता कर रहे हैं। सरकारी अंधेरगर्दी से बेखबर उपभोक्ता दुकानदार को दोषी मानने लगे हैं।
-- दुकानदार कहते हैं कब अनाज मिलेगा। कब बांटेंगे। कब डीडी देंगे। कब दिसंबर का कोटा उठाएंगे। कुछ तय नहीं है। ऐसे में दुकानदारों पर दबाव बढऩा तय है।
दस नवंबर तक उठा सकेंगे राशन...
30 अक्टूबर तक राशन उठना था त्योहारों के कारण नहीं उठा। बुधवार को बैठक हुई। बैठक में राशन उठाने की तारीख बढ़ाकर 10 नवंबर कर दी है। अब तक अंत्योदय और बीपीएल परिवारों के लिए राशन जारी किया है क्योंकि जरूरत उन्हें ज्यादा है। बीते महीने खाद्य निगम के कारण अनाज लैप्स हुआ था। हमारे कारण नहीं।
हरेंद्र सिंह, खाद्य नियंत्रक
डीडी अब तक दुकानों से दूर है नवंबर का राशन
इंदौर, विनोद शर्मा ।
सरकार जहां करोड़ों रुपया खर्च करके गरीबों को नित-नई सौगात मुहैया करा रही है वहीं खाद्य विभाग के अधिकारियों की टालमटौल के कारण गरीबों को वक्त पर राशन नहीं मिल पा रहा है। हालात यह है कि अक्टूबर में आधा अनाज बांटकर आधा लैप्स करके बैठे खाद्य विभाग के अधिकारियों ने डीडी लेने के 15 दिन बाद भी नवंबर का राशन अब तक दुकानदारों को मुहैया नहीं कराया। हालात यह है कि दुकानदार एमपीएफसी
े के बाद डीडी लेने के बावजूद अब तक 80 दुकानदारों को राशन उपलब्ध नहीं कराया गया। दुकानदार सरकारी गोदामों के चक्कर काट रहे हैं और गरीब दुकानदारों के।
तमाम उपचार के बावजूद सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बीमारियां दूर नहीं हुई। राशन के लिए यहां-वहां धक्के खाते दुकानदार और उपभोक्ता इसका बड़ा उदाहरण है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो अक्टूबर में त्योहारी तैयारियों को देखते हुए खाद्य विभाग ने 20 हजार बोरी अनाज उपलब्ध कराया था। दुकानदारों से 20 हजार बोरी के लिए डीडी भी लिए गए जबकि आपूर्ति हुई सिर्फ 10 हजार बोरियों की। दुकानदार टल्ले खाते रहे लेकिन मप्र खाद्य निगम और खाद्य विभाग इंदौर ने वितरण नहीं किया। आखिरकार 10 हजार बोरियां निरस्त हो गई। बात जिम्मेदारी की आई तो खाद्य निगम ने पल्ला झाड़ते हुए खाद्य विभाग को जिम्मेदार ठहराया जबकि खाद्य विभाग की मानें तो जिम्मेदार खाद्य निगम है। निगम ने कोटे के तहत आवंटित अनाज दिया ही नहीं। जब अनाज उठा ही नहीं तो लैप्स तो होगा ही। बहररहाल, अब दुकानदारों की डीडी को नवंबर के हिसाब में समायोजित किया जा रहा है। इधर, 20 से 25 अक्टूबर के बीच नए सिरे से डीडी देकर बैठे 70 फीसदी दुकानदारों को अधिकारियों की जिद-जिरह के कारण अब तक नवंबर का राशन नहीं मिला। नाराज दुकानदारों की मानें तो अफसरों के अडिय़ल रवैये के कारण अक्टूबर में तो फिर भी आधा अनाज मिल गया था लेकिन नवंबर में उम्मीद नहीं है कि आधे का आधा भी मिल जाए।
दिक्कतें....
---नवंबर का राशन 30 अक्टूबर तक उठ जाना था लेकिन नहीं उठ पाया। स्वयं खाद्य नियंत्रक की मानें तो त्योहारों के कारण राशन नहीं उठा। 2 नवंबर तक अंत्योदय का 70 और बीपीएल का 30 फीसदी राशन उठा। सामान्य राशनकार्ड के लिए राशन नहीं उठा।
-- दुकानदारों ने डीडी दे दी। अब जब राशन के लिए गाड़ी लेकर खाद्य निगम के गोदाम जाते हैं तो अधिकारी कहते हैं कल आना। परसो आना।
-- दुकानदारों को जैसे सरकार आश्वासन देती है वैसा ही आश्वासन देकर वे ग्राहकों को चलता कर रहे हैं। सरकारी अंधेरगर्दी से बेखबर उपभोक्ता दुकानदार को दोषी मानने लगे हैं।
-- दुकानदार कहते हैं कब अनाज मिलेगा। कब बांटेंगे। कब डीडी देंगे। कब दिसंबर का कोटा उठाएंगे। कुछ तय नहीं है। ऐसे में दुकानदारों पर दबाव बढऩा तय है।
दस नवंबर तक उठा सकेंगे राशन...
30 अक्टूबर तक राशन उठना था त्योहारों के कारण नहीं उठा। बुधवार को बैठक हुई। बैठक में राशन उठाने की तारीख बढ़ाकर 10 नवंबर कर दी है। अब तक अंत्योदय और बीपीएल परिवारों के लिए राशन जारी किया है क्योंकि जरूरत उन्हें ज्यादा है। बीते महीने खाद्य निगम के कारण अनाज लैप्स हुआ था। हमारे कारण नहीं।
हरेंद्र सिंह, खाद्य नियंत्रक
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