Sunday, June 28, 2015

बकरियों की बली, कारखाना बंद

सांवेर पुलिस ने कारखाना सील करके संचालकों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा
इंदौर. विनोद शर्मा । 
कजलाना में चल रहे शिवा टायर प्रोसेसिंग यूनिट पर सात बकरियों की बली के बाद न सिर्फ ताले डल गए बल्कि संचालकों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो गया। यह वही कारखाना है जिसके कुप्रभावों को शरीर पर लिए कजलाना के रहवासी डेढ़ साल से घूम रहे थे लेकिन न जिला प्रशासन ने उनकी सुध ली, न अन्य विभाग ने। मामला कलेक्टर तक पहुंचा तो मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने मापदंडों के अनुरूप बताकर कारखाने और कारखाना मालिक को क्लीन चिट दे दी थी। बहरहाल, बकरियों की बली और पुलिस की सख्ती ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के झूठ की पोल भी खोल दी।
7 मई 2013 को सांवेर पुलिस थाने में कजलाना निवासी 35 वर्षीय गहनाबाई पति गतिहारी नाथ ने शिकायत की। कजलाना में चल रहे शिवा टायर प्रोसेसिंग यूनिट और उसके संचालक रोहित पिता शिवलाल पटेल के खिलाफ थी शिकायत। गहनाबाई ने बताया कि उनकी बकरियों ने कारखाने से निकलने वाला पानी पिया और वहीं दम तोड़ दिया। थाना प्रभारी दिलीपसिंह चौधरी ने बकरियों का पोस्टमार्टम करवाया। रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी कि बकरियों की मृत्यु जहरीला पानी पीने से हुई जो कि कारखाने से छोड़ा जाता है। पानी में जहर की पुष्टि होने के बाद सांवेर पुलिस ने पहले कारखाने पर ताले जड़े, बाद में मालिक रोहित पिता शिवलाल चौधरी के खिलाफ धारा 429 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया।
जमीन भी खराब कर रहा है कारखाने का पानी...
कारखाने से निकलने वाले जिस पानी को पीकर बकरियों की मौत हुई वह कजलाना की उस पूरी जमीन को बंजर बना रहा है जहां से पानी बहकर निकलता है। आसपास जितने भी किसानों की जमीन है उन्होंने भी कारखाना बंद होने पर राहत की सांस ली है।
यह साजिश है हमारे खिलाफ...
कारखाने का विरोध अर्से से जारी है। इसी विरोध की रणनीति के चलते साजिश रची गई। बकरियां कहीं और मरी। उन्हें हमारे यहां से निकले पानी से मरना बताया दिया। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में बकरियों के जहरीले पानी पीने से मौत की पुष्टि हुई है न कि इस बात की कि पानी मेरे ही कारखाने से निकला हुआ था। हमारे कारखाने में पानी का काम ही नहीं है। कर्मचारी नहाते-धोते हैं वही पानी बहता है जो नुकसानदायक नहीं हो सकता।
शिवलाल यादव, मालिक
शिव प्रोसेसिंग यूनिट
अपै्रल 2012 से जारी है शिकायतें...
शिवा टायर ऑइल प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना हुए दो साल हो चुके हैं। यहां दिनभर में 60-70 टायर जलाकर उनका ऑइल निकाला जाता है। तेल पीथमपुर के कारखानों सहित अन्य स्थानों पर बेचा जाता है। टायर शहर-गांव से आते हैं। कारखाने की पहली शिकायत अपै्रल 2012 में जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को हुई  थी। शिकायतकर्ताओं में क्षेत्रवासियों के साथ सरपंच भी थे। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए थे। 26 जून को दबंग दुनिया ने भी 'कालिख का कहरÓ शीर्षक से कारखाने की मनमानियां उजागर की थी। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ए.ए.मिश्रा ने जांच कराई। बाद में कारखाने को क्लीन चिट दे दी। यह भी नहीं देखा कि कारखाने से ५० मीटर दूर ही आबादी बसी है।
यह है नियम...
जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि कारखाना संचालकों द्वारा जानबुझकर कारखाने से निकलने वाले गंदे पानी का निस्तारण कारखाना परिसर में नहीं किया जो कि मप्र प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों के तहत अनिवार्य है। सामान्यत: कारखाने से निकलने वाले पानी के लिए कारखाने में शुद्धिकरण संयंत्र लगाना पड़ता है अन्यथा गड्डा खोदकर उसके निस्तारण की व्यवस्था करना पड़ती है।


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