पूणे में 200 करोड़ की हेराफेरी करके किया था इन्वेस्ट
ईडी के पत्र पर लगी रजिस्ट्री पर रोक
सूत्रों की मानें तो ईडी ने की देर, 60 फीसदी जमीन बिक चुकी है
इंदौर. चीफ रिपोर्टर।
पूणे की कंपनियों को 200 करोड़ की टोपी पहनाने वाले इंदौरी लाल संजय बागर के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिग एक्ट (पीएमएलए) के तहत प्रकरण दर्ज करके बैठे प्रवर्तन निर्देशालय ने अब मालवा-निमाड़ में बांगर परिवार द्वारा खरीदी गई 400 एकड़ जमीन चिह्नित की है। चिह्नित जमीनों की बिक्री न हो इसके लिए इंदौर, देवास और खंडवा के जिला पंजीयकों को पत्र लिखकर उनकी रजिस्ट्री प्रतिबंधित करवा दी गई है। ईडी के अधिकारियों की मानें तो ईडी जल्द ही इन जमीनों को बेचकर उन 200 करोड़ रुपए की भरपाई करेगा जो घपले की बुनियाद पर बांगर परिवार ने कमाए थे।
मामला पूणे का है। वहां सिनेफ्रा इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी है। 157 तिलकनगर, इंदौर में रहने वाला संजय बांगर इस कंपनी में जीएम लॉजिस्टिक थे। बांगर ने सुजलॉन एनर्जी प्रा.लि.और सुजलॉन पॉवर के साथ कंपनी का अनुबंध कराया। बाद में सिनेफ्रा के ही राजगोपाल श्रीधरन के साथ मिलकर दोनों कंपनियों के खातों में जमा होने वाले करोड़ों रुपयों की हेराफेरी की। सुजलॉन की शिकायत पर पूणे पुलिस ने जांच की। जांच में दोनों दोषी पाए गए। पुलिस ने 2009 में धारा 403, 408, 418, 420, 461, 471 और 477 (ए) के तहत मुकदमा दर्ज किया। दोनों गिरफ्तार कर लिए गए। बाद में पुलिस ने फाइल प्रवर्तन निर्देशालय (ईडी) पूणे को सौंप दी। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलएल) 2002 के तहत संजीव बांगर और श्रीधर राजगोपालन के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। असिसटेंट डायरेक्टर ने तफ्तीश की। पता चला कंपनी ने तकरीबन 200 करोड़ का गबन किया। इस राशि से बांगर परिवार ने देवास, इंदौर और खड़वा में 400 एकड़ जमीन खरीदी। अब पीएमएलए के तहत बांगर की संपत्ति कुर्क की जाना है।
जमीनों में लगाए 200 करोड़
-- बांगर ने इस पैसे से खेड़ी खुर्द, भटिया खुर्द, कामूदवाड़ा, डालची, शेलदा, सुंद्रेल और भतलपुर में जमकर जमीनें खरीदी। ईडी, पूणे के मुताबिक भतलपुर (देवास) में 7, भटिया खुर्द (देवास) में 4, भिकनगांव में 1, चकारिया में 1 , डालची (बड़वाह) में 7, कसरावद में 1, गोपालपुरा में 1, खेड़ी में 7, सुंदे्रल में 7, सेल्दा (बड़वाह) में 4 जमीनें खरीदी।
-- सूत्रों की मानें तो एक दशक पहले तक तंगहाली में जी रहे बांगर परिवार की सूरत संजय के कारनामों ने बदल दी। घपलों से संजय ने तकरीबन 400 एकड़ जमीन खरीदी थी। अब चूंकि ईडी पीएमएलए का प्रकरण दर्ज कर चुका था और आरोपों की पुष्टि हो चुकी थी लिहाजा संपत्ति का राजसात होना भी तय था। इसी सोच के साथ बांगर परिवार ने ईडी के संपत्ति साक्ष्य जुटाने से पहले ही 60 फीसदी से ज्यादा जमीनें बेच डाली।
कैसे किया खेल....
-- सुजलॉन ने जो जहाज लीज पर लिए थे। उनमें अनुबंध के विपरीत बांगर ने दूसरी कंपनियों के सामान का परिवहन कराया और मनमाना भाड़ा कंपनी के खाते में जमा कराने की जगह अपने और अपने परिचितों के खातों में जमा करा दिया।
-- सुजलॉन से जो परिवहन भाड़ा लिया उसमे और सिनेफ्रा इंजीनियरिंग द्वारा तय वास्तविक दरों में जमीन-आसमान का अंतर है। यानी सुजलॉन से तय दरों से अधिक भाड़ा लेकर अपनी जेब भरी गई।
ईडी के पत्र पर लगी रजिस्ट्री पर रोक
सूत्रों की मानें तो ईडी ने की देर, 60 फीसदी जमीन बिक चुकी है
इंदौर. चीफ रिपोर्टर।
पूणे की कंपनियों को 200 करोड़ की टोपी पहनाने वाले इंदौरी लाल संजय बागर के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिग एक्ट (पीएमएलए) के तहत प्रकरण दर्ज करके बैठे प्रवर्तन निर्देशालय ने अब मालवा-निमाड़ में बांगर परिवार द्वारा खरीदी गई 400 एकड़ जमीन चिह्नित की है। चिह्नित जमीनों की बिक्री न हो इसके लिए इंदौर, देवास और खंडवा के जिला पंजीयकों को पत्र लिखकर उनकी रजिस्ट्री प्रतिबंधित करवा दी गई है। ईडी के अधिकारियों की मानें तो ईडी जल्द ही इन जमीनों को बेचकर उन 200 करोड़ रुपए की भरपाई करेगा जो घपले की बुनियाद पर बांगर परिवार ने कमाए थे।
मामला पूणे का है। वहां सिनेफ्रा इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी है। 157 तिलकनगर, इंदौर में रहने वाला संजय बांगर इस कंपनी में जीएम लॉजिस्टिक थे। बांगर ने सुजलॉन एनर्जी प्रा.लि.और सुजलॉन पॉवर के साथ कंपनी का अनुबंध कराया। बाद में सिनेफ्रा के ही राजगोपाल श्रीधरन के साथ मिलकर दोनों कंपनियों के खातों में जमा होने वाले करोड़ों रुपयों की हेराफेरी की। सुजलॉन की शिकायत पर पूणे पुलिस ने जांच की। जांच में दोनों दोषी पाए गए। पुलिस ने 2009 में धारा 403, 408, 418, 420, 461, 471 और 477 (ए) के तहत मुकदमा दर्ज किया। दोनों गिरफ्तार कर लिए गए। बाद में पुलिस ने फाइल प्रवर्तन निर्देशालय (ईडी) पूणे को सौंप दी। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलएल) 2002 के तहत संजीव बांगर और श्रीधर राजगोपालन के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। असिसटेंट डायरेक्टर ने तफ्तीश की। पता चला कंपनी ने तकरीबन 200 करोड़ का गबन किया। इस राशि से बांगर परिवार ने देवास, इंदौर और खड़वा में 400 एकड़ जमीन खरीदी। अब पीएमएलए के तहत बांगर की संपत्ति कुर्क की जाना है।
जमीनों में लगाए 200 करोड़
-- बांगर ने इस पैसे से खेड़ी खुर्द, भटिया खुर्द, कामूदवाड़ा, डालची, शेलदा, सुंद्रेल और भतलपुर में जमकर जमीनें खरीदी। ईडी, पूणे के मुताबिक भतलपुर (देवास) में 7, भटिया खुर्द (देवास) में 4, भिकनगांव में 1, चकारिया में 1 , डालची (बड़वाह) में 7, कसरावद में 1, गोपालपुरा में 1, खेड़ी में 7, सुंदे्रल में 7, सेल्दा (बड़वाह) में 4 जमीनें खरीदी।
-- सूत्रों की मानें तो एक दशक पहले तक तंगहाली में जी रहे बांगर परिवार की सूरत संजय के कारनामों ने बदल दी। घपलों से संजय ने तकरीबन 400 एकड़ जमीन खरीदी थी। अब चूंकि ईडी पीएमएलए का प्रकरण दर्ज कर चुका था और आरोपों की पुष्टि हो चुकी थी लिहाजा संपत्ति का राजसात होना भी तय था। इसी सोच के साथ बांगर परिवार ने ईडी के संपत्ति साक्ष्य जुटाने से पहले ही 60 फीसदी से ज्यादा जमीनें बेच डाली।
कैसे किया खेल....
-- सुजलॉन ने जो जहाज लीज पर लिए थे। उनमें अनुबंध के विपरीत बांगर ने दूसरी कंपनियों के सामान का परिवहन कराया और मनमाना भाड़ा कंपनी के खाते में जमा कराने की जगह अपने और अपने परिचितों के खातों में जमा करा दिया।
-- सुजलॉन से जो परिवहन भाड़ा लिया उसमे और सिनेफ्रा इंजीनियरिंग द्वारा तय वास्तविक दरों में जमीन-आसमान का अंतर है। यानी सुजलॉन से तय दरों से अधिक भाड़ा लेकर अपनी जेब भरी गई।
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