मंजूर 35, तने 51, 19 पर कब्जा शुरू
- तीन साल में रेवड़ी की तरह बंट गई बेशकीमती सरकारी जमीन
इंदौर. विनोद शर्मा ।बड़ा बांगड़दा के निगम सीमा में विलय के बाद पंचायत भले भंग हो चुकी है लेकिन यहां ‘पंचायती’ राज अब भी जारी है। बिना किसी अनुमति के इंदिरा आवास योजना के तहत आई कुटीरों की बाढ़ इसका बड़ा उदाहरण है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो 2011-2014 के बीच यहां 34 कुटीर मंजूर हुई थी जबकि गांधीनगर और गोमटगिरी के सामने 70 कुटीर बनी-बनती नजर आ रही है। इसके पीछे जहां पार्षद की भूमिका पर अंगुली उठाई जा रही है वहीं पार्षद का कहना है कि अवैध कब्जों की शिकायतें कई बार की, अधिकारियों ने तनाव ही नहीं लिया।
नगर निगम सीमा में शामिल हुए बड़ा बांगड़दा को करीब-करीब दो साल हो चुके हैं। पंचायत भंग हो चुकी है। सरपंच चुनाव मैदान में उतरे और पार्षद बन गए। फिर भी पंचायत का अस्तित्व कहीं न कहीं उफान खा रहा है। पहले नगर निगम के हिस्से के संपत्ति कर की वसूली के मामले सामने आए। अब ‘कुटीर नीति’ की शिकायत ने 2009-2014 के बीच सरपंच रहे मौजूदा पार्षद भगवान सिंह चौहान की भूमिका सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं की मानें तो जनवरी 2014 के चुनाव में वार्ड-15 से अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिहाज से चौहान ने सरंपच रहते मनमाने ढंग से कुटीर आवंटित की। न सिर्फ गरीब बल्कि कार्यकर्ताओं को भी उपकृत किया।
मंजूरी से दो गुना ज्यादा बना दी कुटीर...
इंदिरा आवा योजना के तहत 2011-12 में दो चरणों में 31 कुटीर मंजूर हुई। पहले चरण में 20 और 10 दूसरे चरण में। एक अंत्योदय के तहत। वहीं यदि बात मैदानी करें तो गांधीनगर में ही करीब 48 कुटीर बनी है। बाकी हैं गोमटगिरी के सामने। रोटरी क्लब आॅफ फोर्ट मिल (यूएसए) और रोटरी फाउंडेशन के सहयोग से आर्थिक दृष्टि से कमजोर एवं आवासहीन परिवारों के लिए बनाई गई 32 इकाइयों के अलावा डेढ़ साल में चार नई कुटीर जन्मी। इसके अलावा रोटरी की कुटीर और हातोद रोड के बीच सरकारी जमीन पर 18 कुटीरों की तैयारी अलग जारी है। इसमें तीन पर कुर्सी हाईट हो चुकी है। एक लेंटर लेवर पर आ चुकी है। बाकी के लिए चौतरफा जमीन पर र्इंट जमा दी गई है। इसी तरह के कब्जे देवधरम टंकी के पास भी हैं।
कुटीर के नाम पर बांटी रेवड़ी...
पंचायत ने कुटीर के नाम पर सरकारी जमीन रेवड़ी की तरह बांटी। अवैध कुटीरों के अलावा इसकी पुष्टि कुटीरों की अलग-अलग साइज भी करती है। जनपद पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुटीर का क्षेत्रफल 225 वर्गफीट होना चाहिए जबकि गांधीनगर में दर्जनभर से अधिक मकान ऐसे हैं जो 500-600 वर्गफीट तक फैले हैं। जरूरत और मापदंड से सीधे दो गुना ज्यादा।
इन कुटीरों की जरूरत क्या थी..?
रोटरी क्लब आॅफ फोर्ट मिल (यूएसए) और रोटरी फाउंडेशन ने रोटरी आवास योजना के तहत 1998 से 2002 के बीच कम लागत की 32 आवासीय इकाइयां बनाकर दी थी। इसमें से 8-9 ही ऐसी इकाइयां हैं जिनमें लोग रहते नजर आते हैं। बाकी शुरू से ही खाली पड़ी है। जिनके नाम इकाइयां आवंटित हुई थी, वे कभी देखने तक भी नहीं आए। लोगों के इंतजार और रखरखाव के अभाव में ही यह इकाइयां खंडहर हो रही है। नई कुटीरें बनाकर सरकारी जमीन खत्म करने के बजाय पंचायत इन इकाइयों के आवंटियों के खिलाफ सख्ती से पेश आती तो अब तक मंजूरी से आधी कुटीरों में ही काम चल जाता।
‘भगवान’ बोले आप तो पैसे रहने दो...
इन कुटीरों में कई ऐसी है जिनमें रहने वालों के पास न तो जनपद पंचायत की मंजूरी है न ही अब तक पंचायत का आवंटन पत्र। इसीलिए बिजली कनेक्शन भी नहीं मिल पा रहा है। उधर, लोग परेशान हैं उनका कहना है कि हमें तो भगवान भैया ने ही कहा था बनाओ और रहो।
जनपद की जुबानी, कुटीर की कहानी...
वर्ष मंजूर
2011-12 30, 1 अंत्योदय में
2012-13 4
-- चार साल में कुल 35 कुटीर
-- एक के पेटे जारी 45 हजार रुपए
-- एरिया 225 वर्गफीट
-- आवेदन मंजूर
मैंने कब्जे नहीं कराए, उलटा तुड़वाए हैं...
आरोप बेबुनियाद है। हर साल 25-30 कुटीर आती है। दो साल से नहीं आई है। मेरे यहां सबसे ज्यादा बीपीएल कार्डधारी है। बाकी में बीपीएल वाले कम थे। उनके कोटे पूरे हो गए। इसीलिए हमारी पंचायत को ज्यादा मिली। सरपंच सिर्फ मॉनिटरिंग तक सीमित है। गोमटगिरी और गांधीनगर में अवैध रूप से लोगों ने कब्जे किए। कई बार शिकायत की है। अधिकारी सुनने को तैयार ही नहीं। रात को 12 बजे भी जाकर हटाए हैं, जो वैध है उनका रिकार्ड है।
भगवान सिंह चौहान, पार्षद
2011-2013 के बीच 35 कुटीर मंजूरी की थी, यदि ज्यादा बनी है तो मैदानी सर्वे करके उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
पुरुषोत्तम पाटीदार, सीईओ
जनपद इंदौर
No comments:
Post a Comment