2015-16 के लिए आयकर की इन्वेस्टिगेशन विंग की रणनीति
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इंदौर, भोपाल और रायपुर में रीयल एस्टेट और मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर से जुड़े प्रमुख लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग के निशाने पर अब छोटे शहरों के साथ ही बड़े सरकारी अधिकारी भी रहेंगे। परम्परागत सेक्टर में रिसेसन के कारण कुछ नए सेक्टर पर भी फोकस किया जा रहा है। फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) की रिपोर्ट्स के साथ तथ्यात्मक रूप से की गई व्यक्तिगत शिकायतें इसमें प्रमुख भूमिका अदा करेंगी।
2013 से मार्च 2015 के बीच 82 सर्च में 766 करोड़ की काली कमाई उजागर हुई। इन्वेस्टिगेशन विंग को चिंता है 2015-16 की। रीयल एस्टेट, आॅटोमोबाइल और मेन्यूफेक्चरिंग सेक्टर मंदी की मार से आईसीयू में है। ऐसी स्थिति में विकल्प क्या हो? हालांकि विंग के आला अधिकारी इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वे कहते हैं उनके पास पर्याप्त जानकारियां हैं। रणनीति के साथ जानकारियों पर काम जारी है। जल्द परिणाम दिखेंगे। वैसे भी मंदी से यदि 50 फीसदी सेक्टर प्रभावित हैं तो भी हमारे लिए 50 फीसदी सेक्टर बाकी हैं। यह जरूर है कि अब उज्जैन, देवास, खंडवा, खरगोन, सीहोर, शाजापुर जैसे छोटे शहरों पर ज्यादा फोकस की जरूरत है। उनके मुताबिक बड़े शहरों में करीब-करीब सभी प्रमुख लोगों पर बीते 5 साल में कार्रवाई हो चुकी है। बचे हैं छोटे शहर।
छोटे व्यापारी, बड़ी उम्मीद
रीयल एस्टेट सेक्टर से लेकर मैन्यूफेक्चरिंग तक करीब-करीब सभी बैंक या साहुकारों के कर्ज पर टिके हैं। उनके पास जितना पैसा दिखता है, उतना होता नहीं है। इसीलिए ऐसे लोगों की छानबीन जारी हैं जिनसे लिए कर्जे पर कारोबारी भी जिंदा है और उसका कारोबार भी। फिर वह हुंडी कारोबारी ही क्यों न हो। हुंडी कारोबारियों के पास जो पैसा आता है वह खजूरी बाजार, महारानी रोड, सियागंज, जवाहर मार्ग, छावनी जैसे क्षेत्रों के उन व्यापारियों का है जिनका धंधा लोन की बुनियाद पर नहीं खड़ा है। उनका धंधा छोटा दिखता है लेकिन सालाना मुनाफा अच्छा है।
सरकारी अफसरों पर भी होगी कार्रवाई....
निशाने पर ऐसे लोग भी हैं जो अच्छी-खासी आमदनी के बावजूद न टैक्स चुका रहे हैं। न ही रिटर्न दाखिल करते हैं। विभाग ने अपने इंटेलीजेंस विंग और अन्य सूचना तंत्र के जरिए इनकी सूची बनाना शुरू कर दी है। इनमें प्रॉपर्टी ब्रोकर, स्टॉक एक्सचेंज एजेंट, डॉक्टर्स से लेकर सरकारी विभागों के आला अधिकारी भी निशाने पर हैं। आईएएस, आईपीएस से लेकर नगरीय प्रशासन, आवास पर्यावरण और जल संसाधन जैसे विभागों के कई अधिकारियों की शिकायतों की स्क्रुटनी जारी है।
2014-15 : छापे कम, असर ज्यादा
2013-14 में 57 स्थानों पर छापेमार कार्रवाई करके तकरीबन 366 करोड़ की काली कमाई उजागर की थी। 2014-15 में 25 बड़ी कार्रवाइयां हुर्इं। कार्रवाइयों की संख्या भले 2013-14 से कम रही लेकिन परिणाम ज्यादा बेहतर रहे। 25 छापों में ही 400 करोड़ की काली कमाई उजागर की। 18 करोड़ नकद सीज किए गए जबकि 13 करोड़ की ज्वैलरी जब्त की गई।
इन्फोर्मेशंस की कमी नहीं
मंदी से सर्च की कार्रवाइयों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मंदी हर सेक्टर में नहीं है। हम बाकी सेक्टर पर काम करेंगे। वैसे ीाी हमारे पास इन्फोर्मेशंस की कमी नहीं है। 2013-14 के मुकाबले 2014-15 में 32 सर्च कम है लेकिन राजस्व 40 करोड़ ज्यादा है। यानी कार्रवाइयां कम थी लेकिन ज्यादा असरदार थी।
डी.के.छबलानी, डायरेक्टर
इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इंदौर, भोपाल और रायपुर में रीयल एस्टेट और मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर से जुड़े प्रमुख लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग के निशाने पर अब छोटे शहरों के साथ ही बड़े सरकारी अधिकारी भी रहेंगे। परम्परागत सेक्टर में रिसेसन के कारण कुछ नए सेक्टर पर भी फोकस किया जा रहा है। फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) की रिपोर्ट्स के साथ तथ्यात्मक रूप से की गई व्यक्तिगत शिकायतें इसमें प्रमुख भूमिका अदा करेंगी।
2013 से मार्च 2015 के बीच 82 सर्च में 766 करोड़ की काली कमाई उजागर हुई। इन्वेस्टिगेशन विंग को चिंता है 2015-16 की। रीयल एस्टेट, आॅटोमोबाइल और मेन्यूफेक्चरिंग सेक्टर मंदी की मार से आईसीयू में है। ऐसी स्थिति में विकल्प क्या हो? हालांकि विंग के आला अधिकारी इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वे कहते हैं उनके पास पर्याप्त जानकारियां हैं। रणनीति के साथ जानकारियों पर काम जारी है। जल्द परिणाम दिखेंगे। वैसे भी मंदी से यदि 50 फीसदी सेक्टर प्रभावित हैं तो भी हमारे लिए 50 फीसदी सेक्टर बाकी हैं। यह जरूर है कि अब उज्जैन, देवास, खंडवा, खरगोन, सीहोर, शाजापुर जैसे छोटे शहरों पर ज्यादा फोकस की जरूरत है। उनके मुताबिक बड़े शहरों में करीब-करीब सभी प्रमुख लोगों पर बीते 5 साल में कार्रवाई हो चुकी है। बचे हैं छोटे शहर।
छोटे व्यापारी, बड़ी उम्मीद
रीयल एस्टेट सेक्टर से लेकर मैन्यूफेक्चरिंग तक करीब-करीब सभी बैंक या साहुकारों के कर्ज पर टिके हैं। उनके पास जितना पैसा दिखता है, उतना होता नहीं है। इसीलिए ऐसे लोगों की छानबीन जारी हैं जिनसे लिए कर्जे पर कारोबारी भी जिंदा है और उसका कारोबार भी। फिर वह हुंडी कारोबारी ही क्यों न हो। हुंडी कारोबारियों के पास जो पैसा आता है वह खजूरी बाजार, महारानी रोड, सियागंज, जवाहर मार्ग, छावनी जैसे क्षेत्रों के उन व्यापारियों का है जिनका धंधा लोन की बुनियाद पर नहीं खड़ा है। उनका धंधा छोटा दिखता है लेकिन सालाना मुनाफा अच्छा है।
सरकारी अफसरों पर भी होगी कार्रवाई....
निशाने पर ऐसे लोग भी हैं जो अच्छी-खासी आमदनी के बावजूद न टैक्स चुका रहे हैं। न ही रिटर्न दाखिल करते हैं। विभाग ने अपने इंटेलीजेंस विंग और अन्य सूचना तंत्र के जरिए इनकी सूची बनाना शुरू कर दी है। इनमें प्रॉपर्टी ब्रोकर, स्टॉक एक्सचेंज एजेंट, डॉक्टर्स से लेकर सरकारी विभागों के आला अधिकारी भी निशाने पर हैं। आईएएस, आईपीएस से लेकर नगरीय प्रशासन, आवास पर्यावरण और जल संसाधन जैसे विभागों के कई अधिकारियों की शिकायतों की स्क्रुटनी जारी है।
2014-15 : छापे कम, असर ज्यादा
2013-14 में 57 स्थानों पर छापेमार कार्रवाई करके तकरीबन 366 करोड़ की काली कमाई उजागर की थी। 2014-15 में 25 बड़ी कार्रवाइयां हुर्इं। कार्रवाइयों की संख्या भले 2013-14 से कम रही लेकिन परिणाम ज्यादा बेहतर रहे। 25 छापों में ही 400 करोड़ की काली कमाई उजागर की। 18 करोड़ नकद सीज किए गए जबकि 13 करोड़ की ज्वैलरी जब्त की गई।
इन्फोर्मेशंस की कमी नहीं
मंदी से सर्च की कार्रवाइयों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मंदी हर सेक्टर में नहीं है। हम बाकी सेक्टर पर काम करेंगे। वैसे ीाी हमारे पास इन्फोर्मेशंस की कमी नहीं है। 2013-14 के मुकाबले 2014-15 में 32 सर्च कम है लेकिन राजस्व 40 करोड़ ज्यादा है। यानी कार्रवाइयां कम थी लेकिन ज्यादा असरदार थी।
डी.के.छबलानी, डायरेक्टर
इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग
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