इंदौर-देवास सिक्सलेन : एनएचएआई पर कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट के लिए आईडीटीएल
का दबाव
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जन और जन प्रतिनिधि विरोध के बावजूद अधूरे पड़े इंदौर-देवास सिक्सलेन का रफ्तार से काम पूरा करना तो दूर की बात कंपनी नवंबर 2014 से नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआई) पर कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट के लिए दबाव बना रही है। पांच महीनों में कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट के लिए इंदौर देवास टोल लिमिटेड (आईडीटीएल) दर्जनभर से ज्यादा पत्र लिख चुकी है। कंपनी के आवेदन से अब कहीं न कहीं विभागीय अधिकारी भी सहमत नजर आने लगे हैं। इसीलिए आवेदन खारिज नहीं हुआ। उलटा, शर्त रखी जा रही है कि सर्टिफिकेट मिलने के बाद 68 सप्ताह में काम पूरा करना होगा।
केंद्र सरकार के नेशनल हाईव डेवलपमेंट प्रोग्राम (एनएचडीपी) के तहत 2010 में तकरीबन 325 करोड़ के इंदौर-देवास सिक्सलेन प्रोजेक्ट की कमान आईडीटीएल को सौंपी गर्इं थी। कंपनी को फरवरी 2014 तक काम पूरा करना था जो अपै्रल 2015 तक भी पूरा नहीं हुआ। हालात यह है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में लोकसभा अध्यक्ष व सांसद सुमित्रा महाजन भी पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के अफसरों के साथ संपन्न हुई बैठक में अफसरों व आईडीटीएल प्रबंधन की क्लास ले चुकी है। उनकी नाराजगी तीन महीने से बंद पड़े काम और चार साल से जारी टोल वसूली को लेकर थी। अफसरों ने इसके बाद काम कम किया, लिपापोती ज्यादा की।
इसी बीच दबंग दुनिया की छानबीन में पता चला कि कंपनी अपै्रल 2014 से एनएचएआई को पत्र लिखकर कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट मांग रही है। 26 नवंबर 2014 को प्रोजेक्ट आॅफिसर ने रीजनल आॅफिसर एनएचएआई को पत्र लिखा था। इसमें कंपनी द्वारा की जा रही प्रोविजनल कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट की मांग का जिक्र किया गया था। इस पत्र में कंपनी द्वारा 29 जनवरी 2014 से 19 नवंबर 2014 के बीच विभाग को लिखे गए 10 पत्रों का हवाला था। इस पूरे मामले में एनएचएआई की ओर से आखिरी पत्र 17 अपै्रल 2015 को लिखा गया है। पत्र लिया एसोसिएट्स साउट एशिया प्रा.लि. को लिखा गया था।
एक तरफ वक्त मांगा दूसरी तरफ सर्टिफिकेट
आईडीटीएल को 2010 में काम सौंपने के साथ ही समयसीमा फरवरी 2014 तय कर दी गई थी। काम में पिछड़ने के बाद कंपनी एक तरफ जहां टाइलाइन एक्सटेंशन की मांग करती रही वहीं प्रोविजनल कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट के लिए भी दबाव बनाती रही।
काम जो बाकी है।
राऊ फ्लाय ओवर : लंबाई- 820 मीटर। दस्तावेजों में भी नहीं है काम। नर्मदा की 1600 एमएम डाया की दो लाइनों की शिफ्टिंग के लिए 5.72 करोड़ का बजट मंजूर है।
शिप्रा पेडेस्ट्रियन अंडर पास : लंबाई 850 मीटर। कलवर्ट बनाने के लिए काम शुरू नहीं हुआ।
फ्लाय ओवर खंडवा रोड : लंबा : 1480 मीटर। हाईटेंशन लाइन शिफ्टिंग के इंतजार में अटका है ब्रिज खंडवा रोड है।
बिचौली मर्दाना व्हीकल अंडर पास : लंबाई 417 मीटर। इसका प्रावधान ही अपै्रल 2014 में किया गया। इसीलिए काम शुरू नहीं। जून 2015 में काम पूरा करने का वादा।
मांगलिया फ्लायओवर 1285 मीटर - यह ब्रिज भी सवा साल से अधूरा है। काम पूरी तरह बंद है।
काम और भी बाकी...
- 45.05 किलोमीटर में से 39.38 किलोमीटर का काम पूरा। जो 5.70 किलोमीटर लंबा काम बाकी है इसमें 1 फ्लायओवर, 1 व्हीकल अंडर पास और 1 पेडेस्ट्रियन अंडर पास बनना है
- दरार वालो 164 पैनल बदले गए जबकि 591 नए पैनल सुधार के लिए चिह्नित किए गए थे। इनको बदलने का काम सर्टिफिकेट मिलने के बाद 90 दिन में पूरा करना होगा।
- सर्विस रोड का बड़ा हिस्सा अधूरा है। कई जगह अप्रोच रोड जुड़ी तक नहीं है।
आठ करोड़ के ढक्कन
अनुबंध के हिसाब से 37.702 और काम में बदलाव के साथ अतिरिक्त 2.427 किलोमीटर। कुल 40.129 किलोमीटर लंबी डेÑन डलना है। इसमें से आधी बनी है। इस पर कुल 35225 डेÑन कवर लगेंगे। कुल कीमत 8 करोड़ 46 लाख 94 हजार 755 रुपए आएगी। इसमें 4 करोड़ का स्टील (लोहा) लगेगा और 4.46 करोड़ का कान्क्रीट।
अभी तक निर्णय नहीं हुआ है...
कंपनी कंपलीटेशन सर्टिफिकेट मांग रही है लेकिन अब तक इस संबंध में विभाग की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया है। हमने कंपनी के लेटर और अपनी मैदानी रिपोर्ट दोनों मुख्यालय भेज दी है, जो भी निर्णय होगा वहीं से होगा।
सुमित कुमार, प्रोजेक्ट आॅफिसर
एनएचएआई
का दबाव
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जन और जन प्रतिनिधि विरोध के बावजूद अधूरे पड़े इंदौर-देवास सिक्सलेन का रफ्तार से काम पूरा करना तो दूर की बात कंपनी नवंबर 2014 से नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआई) पर कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट के लिए दबाव बना रही है। पांच महीनों में कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट के लिए इंदौर देवास टोल लिमिटेड (आईडीटीएल) दर्जनभर से ज्यादा पत्र लिख चुकी है। कंपनी के आवेदन से अब कहीं न कहीं विभागीय अधिकारी भी सहमत नजर आने लगे हैं। इसीलिए आवेदन खारिज नहीं हुआ। उलटा, शर्त रखी जा रही है कि सर्टिफिकेट मिलने के बाद 68 सप्ताह में काम पूरा करना होगा।
केंद्र सरकार के नेशनल हाईव डेवलपमेंट प्रोग्राम (एनएचडीपी) के तहत 2010 में तकरीबन 325 करोड़ के इंदौर-देवास सिक्सलेन प्रोजेक्ट की कमान आईडीटीएल को सौंपी गर्इं थी। कंपनी को फरवरी 2014 तक काम पूरा करना था जो अपै्रल 2015 तक भी पूरा नहीं हुआ। हालात यह है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में लोकसभा अध्यक्ष व सांसद सुमित्रा महाजन भी पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के अफसरों के साथ संपन्न हुई बैठक में अफसरों व आईडीटीएल प्रबंधन की क्लास ले चुकी है। उनकी नाराजगी तीन महीने से बंद पड़े काम और चार साल से जारी टोल वसूली को लेकर थी। अफसरों ने इसके बाद काम कम किया, लिपापोती ज्यादा की।
इसी बीच दबंग दुनिया की छानबीन में पता चला कि कंपनी अपै्रल 2014 से एनएचएआई को पत्र लिखकर कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट मांग रही है। 26 नवंबर 2014 को प्रोजेक्ट आॅफिसर ने रीजनल आॅफिसर एनएचएआई को पत्र लिखा था। इसमें कंपनी द्वारा की जा रही प्रोविजनल कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट की मांग का जिक्र किया गया था। इस पत्र में कंपनी द्वारा 29 जनवरी 2014 से 19 नवंबर 2014 के बीच विभाग को लिखे गए 10 पत्रों का हवाला था। इस पूरे मामले में एनएचएआई की ओर से आखिरी पत्र 17 अपै्रल 2015 को लिखा गया है। पत्र लिया एसोसिएट्स साउट एशिया प्रा.लि. को लिखा गया था।
एक तरफ वक्त मांगा दूसरी तरफ सर्टिफिकेट
आईडीटीएल को 2010 में काम सौंपने के साथ ही समयसीमा फरवरी 2014 तय कर दी गई थी। काम में पिछड़ने के बाद कंपनी एक तरफ जहां टाइलाइन एक्सटेंशन की मांग करती रही वहीं प्रोविजनल कम्पलीटेशन सर्टिफिकेट के लिए भी दबाव बनाती रही।
काम जो बाकी है।
राऊ फ्लाय ओवर : लंबाई- 820 मीटर। दस्तावेजों में भी नहीं है काम। नर्मदा की 1600 एमएम डाया की दो लाइनों की शिफ्टिंग के लिए 5.72 करोड़ का बजट मंजूर है।
शिप्रा पेडेस्ट्रियन अंडर पास : लंबाई 850 मीटर। कलवर्ट बनाने के लिए काम शुरू नहीं हुआ।
फ्लाय ओवर खंडवा रोड : लंबा : 1480 मीटर। हाईटेंशन लाइन शिफ्टिंग के इंतजार में अटका है ब्रिज खंडवा रोड है।
बिचौली मर्दाना व्हीकल अंडर पास : लंबाई 417 मीटर। इसका प्रावधान ही अपै्रल 2014 में किया गया। इसीलिए काम शुरू नहीं। जून 2015 में काम पूरा करने का वादा।
मांगलिया फ्लायओवर 1285 मीटर - यह ब्रिज भी सवा साल से अधूरा है। काम पूरी तरह बंद है।
काम और भी बाकी...
- 45.05 किलोमीटर में से 39.38 किलोमीटर का काम पूरा। जो 5.70 किलोमीटर लंबा काम बाकी है इसमें 1 फ्लायओवर, 1 व्हीकल अंडर पास और 1 पेडेस्ट्रियन अंडर पास बनना है
- दरार वालो 164 पैनल बदले गए जबकि 591 नए पैनल सुधार के लिए चिह्नित किए गए थे। इनको बदलने का काम सर्टिफिकेट मिलने के बाद 90 दिन में पूरा करना होगा।
- सर्विस रोड का बड़ा हिस्सा अधूरा है। कई जगह अप्रोच रोड जुड़ी तक नहीं है।
आठ करोड़ के ढक्कन
अनुबंध के हिसाब से 37.702 और काम में बदलाव के साथ अतिरिक्त 2.427 किलोमीटर। कुल 40.129 किलोमीटर लंबी डेÑन डलना है। इसमें से आधी बनी है। इस पर कुल 35225 डेÑन कवर लगेंगे। कुल कीमत 8 करोड़ 46 लाख 94 हजार 755 रुपए आएगी। इसमें 4 करोड़ का स्टील (लोहा) लगेगा और 4.46 करोड़ का कान्क्रीट।
अभी तक निर्णय नहीं हुआ है...
कंपनी कंपलीटेशन सर्टिफिकेट मांग रही है लेकिन अब तक इस संबंध में विभाग की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया है। हमने कंपनी के लेटर और अपनी मैदानी रिपोर्ट दोनों मुख्यालय भेज दी है, जो भी निर्णय होगा वहीं से होगा।
सुमित कुमार, प्रोजेक्ट आॅफिसर
एनएचएआई
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