Monday, June 15, 2015

जब कीमत वहीं, तो टैक्स नया क्यों?

पेट्रोल कीमतों का यू टर्न :31 अगस्त को जो कीमत थी वहीं हुई नई कीमत
नौ महीनों में टैक्स से ही बढ़ा दिए सरकार ने 10 रुपए/लीटर दाम
इंदौर. विनोद शर्मा ।
‘अच्छे दिन’ के दावों के बावजूद केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल की बेलगाम बढ़ती कीमतों पर नकेल नहीं कस पाई। इसीलिए शुक्रवार को 3.13 रुपए के इजाफे के साथ ही पेट्रोल की कीमत 73 रुपए/लीटर हो चुकी है, इतनी ही कीमत अगस्त 2014 में थी। मतलब, कीमत का पहिया जहां से चला, वहीं आ गया है। फर्क इतना है कि घटती कीमतों से बढ़ता घाटा बताकर एक्साइज ड्यूटी से लेकर वेट तक बढ़ाने वाली केंद्र-राज्य सरकार अब खामौश है। जानकारों की मानें तो सरकार नवंबर 2014 के बाद बढ़ाई एक्साइज/कस्टम ड्यूटी और वेट वापस लेकर भी उपभोक्ताओं को पेट्रोल पर प्रति लीटर 10 रुपए की राहत दे सकती है।
मई में एनडीए ने केंद्र की कमान संभाली थी। उस वक्त पेट्रोल का दाम था 76.07 रुपए/लीटर जबकि डीजल मिल रहा था 62.60 रुपए/लीटर। जुलाई में बजट आया। अगस्त में सुधार। देखते ही देखते पेट्रोल 62.27 रुपए/लीटर हो गया। डीजल 52.65 रुपए/लीटर। पेट्रोल-डीजल की लगातार घटती कीमतों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी। इसीलिए नवंबर, दिसंबर और जनवरी में बढ़ोत्तरी की हैट्रिक लगाते हुए पेट्रोल पर 5.75 रुपए और डीजल पर 4.50 रुपए एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी। इधर, मप्र के वित्त मंत्री ने भी कहर ढा दिया। उन्होंने पेट्रोल पर वैट टैक्स 27 से बढ़ाकर 31 प्रतिशत कर दिया जबकि डीजल पर वैट टैक्स 23 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया। 67.60 रुपए में मिलने वाला पेट्रोल 16 दिसंबर 2014 को हुए घटी कीमतों के बाद 65.46 रुपए/लीटर मिलना था जो 20 दिसंबर से मिला 67.67 रुपए/लीटर। अंतर सीधे 2.21 रुपए का था।
कुल सस्ता, मूल महंगा...
नरेंद्र मोदी ने जब शपथ ली थी यानी 26 मई 2014 को पेट्रोल की कीमत थी 71 रुपये 41 पैसे, लेकिन तब कच्चा तेल 105.71 डॉलर प्रति बैरल का था। आज जबकि पेट्रोल की कीमत 66.29 की कर दी गई है, कच्चा तेल 64.88 डॉलर प्रति बैरल है। यानी पेट्रोल के भाव सिर्फ 5 रुपये कम हुए हैं जबकि कच्चा तेल अब भी 41 डॉलर सस्ता है।
ऐसे बढ़ा टैक्स ही टैक्स...
केंद्र सरकार : एक्साइज ड्यूटी
पेट्रोल डीजल
नवंबर 2014 1.5 रुपए/लीटर 1 रुपए/लीटर
दिसंबर 2014 2.25 रुपए/लीटर 2 रुपए/लीटर
जनवरी 2015 2 रुपए/लीटर 1.5 रुपए/लीटर
28 फरवरी 2015 बजट में कस्टम ड्यूटी के साथ ही 3.18 रुपए/लीटर बढ़ाए दाम पेट्रोल के।
कुल बढ़ोत्तरी
मप्र सरकार ने बढ़ाया वेट
पेट्रोल डीजल
नवंबर 2014 27 प्रतिशत 23 प्रतिशत
दिसंबर 2014 31 प्रतिशत 27 प्रतिशत
- पेट्रोल पर वैट 31 फीसद, वर्तमान कीमत पर अभी सरकार को 21.53 रुपए और डीजल पर 27 फीसद वैट से 15.27 रुपए मिल रहे हैं।
- 2 फीसद उपकर लगाने की तैयारी भी।
यह है तेल का अनसुलझा खेल
-- भारतीय बॉस्केट के कच्चे तेल की कीमत करीब 64.88 डॉलर/बैरल पहुंच चुकी है। एक बैरल का मतलब है 158.98 लीटर। एक डॉलर की कीमत अभी 63.57 रुपए है। यानी 158.98 लीटर के लिए चुकाए 4124 रुपए। मतलब पेट्रोल की कीमत हुई 25.94  रुपए/लीटर जबकि बिक रहा है 73 रुपए/लीटर। केंद्र और राज्य के टैक्सेस के नाम पर अंतर सीधे 47.06 रुपए/लीटर का।
बाजारीकरण के बाद चौथी बड़ी बढ़त
तारीख बढ़त भाव
23 मई 2012 7.54 78.51
15 मई 2011 5.00 68.20
30 अप्रैल 2015 3.96 69.48
15 मई 2015 3.13 करीब 73

सूख में भागीदार थे, दूख में क्यों नहीं
जो यूपीए सरकार एक के बाद एक लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जा रही तब इन सरकारों ने अपना वेट क्यों नहीं घटाया। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह हाथ जोड़ते रह गए। जब अपने मुनाफे में कमी आई तो सरकारी घाटा बताकर वेट बढ़ा दिया। एक्साइज बढ़ा दिया। कस्टम बढ़ा दिया। जबकि जरूरत नहीं थी। अब जब दाम वापस आसमान छू रहे हैं और लोग तिलमिलाने लगे हैं तो क्यों नहीं बढ़ाई हुई ड्यूटी और टैक्स कम हो रहे हैं। यदि ऐसा हो तो सीधे लोगों को 8 रुपए की राहत मिलेगी। नागरिकों ने कीमतों का बोझ झेला है तो राहत पर पूरा अधिकार भी उन्हीं का है।
सुधीर एरन, पूर्व अध्यक्ष
मप्र पेट्रोल-एवं डीजल वितरक संघ



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