Monday, June 15, 2015

पुनीत बाबा, चालीस चोर

आयकर ने लोकायुक्त को सौंपी पाथ इंडिया की नई कहानी
- 100 पन्नों का पुलिंदा, महाराष्ट्र, गुजरात, यूपी, राजस्थान से लेकर एनएचएआई दिल्ली तक घूस
इंदौर. विनोद शर्मा ।
प्रकाश एस्फाल्टिंग टोल हाईवे (पाथ) इंडिया लिमिटेड के खिलाफ छापा मारकर नौ महीने में 700 करोड़ का हवाला उजागर करने वाले आयकर अधिकारियों ने एक रिपोर्ट लोकायुक्त को भी भेजी है। रिपोर्ट में लोक निर्माण विभाग(पीडब्ल्यूडी), मप्र रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) और इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) सहित अलग-अलग महकमों के 40 अफसरों के नाम शामिल हैं जिन्हें पाथ ने रिश्वत में पैसा बांटा। रिश्वत सड़कों का ठेका लेने, खनीज/खदान और जमीन/वन विवाद के निपटारे के लिए दी गई थी।
अगस्त 2014 में आयकर ने पाथ इंडिया सहित पांच ठेकेदारों के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान डायरी और लेपटॉप में लाखों रुपए के अनैतिक लेनदेन की जानकारी भी मिली जो अफसरों के साथ हुआ था। चूंकि डिटेल कोडवर्ड में नहीं थी इसीलिए अफसरों को उसे समझने में देर नहीं लगी। हालांकि सूची में विभाग के हिसाब से पदवार पैसे का जिक्र है। कुछ मामलों में ही नामों का उल्लेख किया गया लेकिन वहां पद का जिक्र नहीं है। विभागीय सूत्रों की मानें तो चार महीने की जांच के बाद जनवरी में लोकायुक्त को 100 पन्नों का जो पुलिंदा सौंपा गया है उसमें 40 अफसरों/कर्मचारियों के नाम है जिन्हें पाथ इंडिया ने अनैतिक कार्य करने या करवाने के लिए पैसा दिया। यह राशि जितने नाम है उतने ही प्रकार की है। राशि का वर्गीकरण स्पष्ट करता है कि पाथ ने बाबू से लेकर आला दर्जे तक के अधिकारी को पैसे दिए।
तूम मुझे काम दो, मैं तूम्हें मुंहमांगी रकम दूंगा...
2005-07 के बीच करीब 15 करोड़ रुपए का एमआर-10 ब्रिज बनाकर सुर्खियों में आई पाथ इंडिया को बिल्ट आॅपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी), डिजाइन बिल्ड फाइनेंस आॅपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी), इंजीनियरिंग प्रोक्योर्मेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी), आॅपरेशन मेंटेनेंस एंड टोलिंग (ओएमटी) और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशीप (पीपीपी) मोड पर काम करने के लिए जाना जाता है। कंपनी ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआई), एमपीपीडब्ल्यूडी-एनएच, पीडब्ल्यूडी, आईडीए से काम लेने के लिए अफसरों को मनमाना पैसा दिया। बदले में अफसरों ने आंख मीचकर कंपनी की योग्यता जांचे-परखे बिना ही 12 से लेकर 350 करोड़ तक के काम थमा दिए।
यह हैं पैसा लेने वाले...
- ज्वाइंट कलेक्टर
- एसडीएम
- जीएम एमपीआरडीसी
- प्रोजेक्ट आॅफिसर
- जीएम एनएचएआई
- प्रोजेक्ट इम्पलीमेंट यूनिट(पीआईयू) एनएचएआई
- इंजीनियर आईडीए
- इंजीनियर पीडब्लयूडी
- एसडीओ, पीडब्ल्यूडी
- खनीज अधिकारी
- डीएफओ
- तहसीलदार
- प्लानर
कुछ कोड भी डीकोड किए...
कई नामों का जिक्र कोड में है। उदाहरण के तौर पर आरसीआर जिसे डीकोड करने पर पता चला यह रामचंद्र रघवुंशी का नाम है। हजार के आंकड़ों को ‘के’ लिखा है। लाखों की रकम का जिक्र रूपए में है। यानी किसी को 10 लाख देना है तो डायरी पर 10.00 लिखा है।
कई राज्यों में फैला नेटवर्क...
-- नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआई) के सात नेशनल हाईवेज और पीडब्ल्यूडी के दो हाइवे पर कंपनी की टोल प्लाजा संचालित है।
-- तकरीबन 1912.36 करोड़ के दस प्रोजेक्ट पर काम जारी है। इनमें 4 मप्र, राजस्थान की 3, यूपी की 2 और महाराष्ट्र की एक सड़क है। गुजरात में भी किया है काम।
-- 14 प्रोजेक्ट कंपलीट हैं। इनमें एमपीआरएसएनएन की दो, एमपीपीडब्लयूडी की दो, एमआरआरडीसी की दो, एनएचएआई की दो और आईडीए की दो सड़के हैं।
हमने अपना काम कर दिया, अब लोकायुक्त की बारी
आयकर के अधिकारी कहते हैं हमने जो तथ्य सामने आए हैं उनकी रिपोर्ट बनाकर लोकायुक्त को सौंप दी है। इसमें रिश्वत लेने वालों के नामों के साथ ही पुनीत अग्रवाल का बयान भी है जिसमें उसने स्वीकारा है कि उसने यह पैसा अपना काम निकलवाने के लिए दिया था। आगे जो भी कार्रवाई करना है लोकायुक्त को ही करना है, इसमें आयकर की भूमिका करीब-करीब कम ही होगी।
फाइल लोकायुक्त के पास है, वहां से हमारे पास आएगी...
आयकर ने पाथ इंडिया की जो फाइल पहुंचाई है वह चर्चा में हैं। हालांकि फाइल अब तक हमारे पास आई नहीं है। आयकर से सीधे माननीय लोकायुक्त कार्यालय में जाती है वहां से स्क्रुटनी के बाद हमारे पास आती है। जैसे ही आती है, कार्रवाई शुरू कर देंगे।
अजय शर्मा, डायरेक्टर जनरल
लोकायुक्त
मुझे रिपोर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सब फिजूल की बातें हैं।
पुनीत अग्रवाल, पाथ





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