मुुंबई की 20 कंपनियों से दुबई की तीन फर्मो तक गया था पाथ का पैसा
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
पाथ द्वारा जमा 80 करोड़ जिन 20 अकाउंट से होते हुए दुबई की तीन कंपनियों के खाते में पहुंचा था। इंटरनेट पर इन कंपनियों की किसी तरह की कोई जिक्र नहीं है। इतना पता लगते ही इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग फॉरेन टैक्स एंड टैक्स रिसर्च (एफटीएंडटीआर) को पत्र लिखकर इन कंपनियों की जानकारी भी मांग चुकी है। हालांकि जानकारी अब तक मिली नहीं है।
700 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय हवाले को लेकर नित नई जानकारियां सामने आ रही है। सूत्रों की मानें तो पाथ और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ आयकर की राडार पर मुंबई की वे 20 फर्जी कंपनियां भी हैं जिनके खातों में डलते ही पैसा दुबई की ओर दौड़ लगा गया। सवाल इस बात का है कि पाथ ने गीत एक्जिम के खाते में पैसा क्यों और किस एवज में डाला। इसी तरह गीत एक्जिम के खाते से दूसरी 20 कंपनियों के खातों तक पैसा कैसे गया? इन कंपनियों के अकाउंट से दुबई की तीन कंपनियों तक पैसा क्यों पहुंचा। मुंबई की कंपनियों से दुबई तक पहुंची राशि करीब 700 करोड़ है। कामकाज तो दूर की बात है दुबई की इन कंपनियों की तह तक पहुंच पाना आयकर की टीम के लिए मुश्किल हो चुका था। इसीलिए उन्होंने एफटीएंडटीआर से जानकारी मांगी।
क्या है एफटीएंडटीआर
आयकर से संबंधित ही वित्त मंत्रालय का एक विभाग का है। इसका काम विदेश में अटके टैक्स से संबंधित मसलों पर संबंधित देश से बातचीत करना और मसलों का निराकरण अनुबंध साइन करना है। अनुबंध दो तरह के होते हैं। डबल टैक्सेशन अवॉइडन्स एग्रीमेंट्स (डीटीएए) और टैक्स इन्फॉर्मेशन एक्सचेंज एग्रीमेंट (टीआईईए)। इन अनुबंधों के आधार पर टैक्स संबंधित जानकारियां दूसरे देशों से साझा की जाती है।
आर-इन्फ्रा के बाकी काम पर भी जांच की आंच..
आर-इन्फ्रा ने जैसे एनएचएआई से एनएच-11 का ठेका लेकर पाथ को सबलेट कर दिया उससे उसके बाकी कामों पर भी जांच की गाज गिर सकती है। गौरतलब है कि आर-इन्फ्रा देश के 11 एनएच पर तकरीबन 10 हजार करोड़ की लागत से काम कर रही है।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
पाथ द्वारा जमा 80 करोड़ जिन 20 अकाउंट से होते हुए दुबई की तीन कंपनियों के खाते में पहुंचा था। इंटरनेट पर इन कंपनियों की किसी तरह की कोई जिक्र नहीं है। इतना पता लगते ही इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग फॉरेन टैक्स एंड टैक्स रिसर्च (एफटीएंडटीआर) को पत्र लिखकर इन कंपनियों की जानकारी भी मांग चुकी है। हालांकि जानकारी अब तक मिली नहीं है।
700 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय हवाले को लेकर नित नई जानकारियां सामने आ रही है। सूत्रों की मानें तो पाथ और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ आयकर की राडार पर मुंबई की वे 20 फर्जी कंपनियां भी हैं जिनके खातों में डलते ही पैसा दुबई की ओर दौड़ लगा गया। सवाल इस बात का है कि पाथ ने गीत एक्जिम के खाते में पैसा क्यों और किस एवज में डाला। इसी तरह गीत एक्जिम के खाते से दूसरी 20 कंपनियों के खातों तक पैसा कैसे गया? इन कंपनियों के अकाउंट से दुबई की तीन कंपनियों तक पैसा क्यों पहुंचा। मुंबई की कंपनियों से दुबई तक पहुंची राशि करीब 700 करोड़ है। कामकाज तो दूर की बात है दुबई की इन कंपनियों की तह तक पहुंच पाना आयकर की टीम के लिए मुश्किल हो चुका था। इसीलिए उन्होंने एफटीएंडटीआर से जानकारी मांगी।
क्या है एफटीएंडटीआर
आयकर से संबंधित ही वित्त मंत्रालय का एक विभाग का है। इसका काम विदेश में अटके टैक्स से संबंधित मसलों पर संबंधित देश से बातचीत करना और मसलों का निराकरण अनुबंध साइन करना है। अनुबंध दो तरह के होते हैं। डबल टैक्सेशन अवॉइडन्स एग्रीमेंट्स (डीटीएए) और टैक्स इन्फॉर्मेशन एक्सचेंज एग्रीमेंट (टीआईईए)। इन अनुबंधों के आधार पर टैक्स संबंधित जानकारियां दूसरे देशों से साझा की जाती है।
आर-इन्फ्रा के बाकी काम पर भी जांच की आंच..
आर-इन्फ्रा ने जैसे एनएचएआई से एनएच-11 का ठेका लेकर पाथ को सबलेट कर दिया उससे उसके बाकी कामों पर भी जांच की गाज गिर सकती है। गौरतलब है कि आर-इन्फ्रा देश के 11 एनएच पर तकरीबन 10 हजार करोड़ की लागत से काम कर रही है।
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