Monday, June 8, 2015

700 करोड़ का हवाला

2014 में छापेमार कार्रवाई के बाद आयकर इन्वेस्टिगेशन ने सीबीडीटी के सामने उजागर किया
पुनीत की पाथ का पैसा मुंबई होते हुए पहुंचा दुबई
आईएनजी वैश्य बैंक की भूमिका संदिग्ध, 20 डेड अकाउंट से चला पैसा 
इंदौर. विनोद शर्मा ।
इंदौर और महू की कंपनियों के खिलाफ अगस्त में हुई इन्वेस्टिगेशन मुंबई-दिल्ली होते हुए दुबई तक पहुंच गई है। काली कमाई की कहानी ने नौ महीने में 700 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय हवाले की परतें खोल दी। आयकर के एक आला अधिकारी की मानें तो इस अंतरराष्ट्रीय हवाले के तार महू और सूरत की कंपनियों के साथ देश के सबसे बड़े कारोबारी घराने तक जुड़े हैं। बहरहाल, इन्वेस्टिगेशन विंग ने पूरी रिपोर्ट वित्त मंत्रालय, डायरेक्टर सेंट्रल बोर्ड आॅफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) और डायरेक्टर जनरल इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन (डीजीआईटी) भोपाल को सौंप दी है।
टोल नाके, रोड निर्माण एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबद्धित ठेकेदार समूहों पर आयकर ने अगस्त 2014 में छापेमार कार्रवाई की थी। छानबीन के दौरान सबसे ज्यादा चौकाया महू की प्रकाश एस्फाल्टिंग एंड टोल हाईवेज (पाथ) ने। कंपनी ने 28 प्रोजेक्ट पर काम किया। 14 कंपलीट हो चुके हैं जबकि 14 पर काम जारी है। इनमें से एक है एनएच-11 (जयपुर-रींगस रोड)। अक्टूबर 2009 को 53 किलोमीटर लंबी इस सड़क का काम नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआई) ने रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (आरइन्फ्रा) को दिया था। आरइन्फ्रा ने काम की जिम्मेदारी पाथ को थमा दी। दोनों ही कंपनियों की वेबसाइट पर इस प्रोजेक्ट की रिपोर्ट है।
ऐसे अंजाम दिया हवाला...
अप्राइजल रिपोर्ट के अनुसार पाथ ने जिम्मेंदारी ली और 2010 में काम शुरू कर दिया। इसी बीच मुंबई में रहने वाले नरेश मांगीलाल दवे और सैफुद्दीन अब्बासभाई कपाड़िया की कंपनी गीत एक्जिम प्रा.लि. अवतरित हुई जिसका पंजीकृत पता महिधारपुरा सूरत, गुजरात है। इस कंपनी को पाथ ने मई और जून 2010 के बीच टुकड़ों में कुल 80 करोड़ का भुगतान किया। ऐसा थोड़ा न बहुत करीब 700 करोड़ रुपया दुबई पहुंचा।
कैसे हुआ खुलासा...
पाथ के यहां पड़े छापे में जयपुर-रींगस रोड की फाइल मिली। इसी फाइल में आर इन्फ्रा और गीत एक्जिम की डिटेल मिली। चूंकि पैसा पाथ से गीत के पास गया था इसीलिए आयकर की टीम ने गीत के ठिकानों पर भी सर्वे की कार्रवाई की थी जिसकी जानकारी गोपनीय रखी गई। सर्वे में पता चला गीत डमी कंपनी है। उसका ऐसा कोई अस्त्वि नहीं है जैसा कि पाथ ने बताया था। सर्वे के दौरान गीत के दोनों ही संचालकों ने कहा कि वे न पाथ को जानते हैं, न ही आर इन्फ्रा को। उन्होंने कमीश्न के लालच में अपना बैंक अकाउंट मुंबई के ही कुछ लोगों को इस्तेमाल के लिए दे दिया था। इसके बाद आईएनजी वैश्य बैंक पर शिकंजा कसके आयकर ने छानबीन शुरू कर दी। परिणाम स्वरूप गीत जैसी 20 कंपनियां सामने आई जिनके डेड अकाउंट इस्तेमाल करके भारतीय पैसा दुबई भेजा रहा है। इस मामले में आयकर आईएनजी वैश्य बैंक की जंजीरवाला चौराहा शाखा के अधिकारियों के बयान भी रिकार्ड कर चुकी है।
सबसे तेज ट्रांजेक्शन
पाथ ने मई और जून 2010 में करीब 7-8 बार में गीत एक्जिम के बैंक अकाउंट में पैसे पहुंचाए। कुल 80 करोड़ का भुगतान हुआ। बड़ी बात यह है कि जहां आम आदमी को बैंक में पैसा निकालकर दोबारा दूसरे खाते में ट्रांसफर करने में पूरा एक दिन लग जाता है वहीं इस मामले में ट्रांजेक्शन तेज हुआ। आयकर के अधिकारी स्वयं हैरान है कि एक जगह से दूसरी जगह चला पैसा, 24 से 48 घंटों में कैसे अलग-अलग कंपनियों के रास्ते विदेश पहुंच सकता है। इस पूरे मामले में आईएनजी वैश्य बैंक, की मुंबई शाखा की भूमिका भी संदिग्ध है।
आगे क्या...?
इन्वेस्टिगेशन विंग ने सभी संबंधित आला अधिकारियों से लेकर वित्त मंत्रालय तक अप्रायजल रिपोर्ट सौंप दी है। पूर मामले में इस बात को लेकर छानबीन जारी है कि आखिर पाथ ने बिना काम के गीत एक्जिम को किसके दबाव में 80 करोड़ रुपए जैसी भारीभरकम राशि का भुगतान किया? सड़क का ठेका अपने नाम से लेकर पाथ से काम करने के बदले आर इन्फ्रा को क्या मिला?
रिपोर्ट मिल चुकी है, अगली कार्रवाई जल्द
इंदौर इन्वेस्टिगेशन विंग ने पाथ की जो अप्राइजल रिपोर्ट तैयार करके भेजी है वह मिल चुकी है। बहुत ज्यादा बारीकी से मैंने अभी पढ़ा तो नहीं है लेकिन इतना जरूर है कि फाइल में बड़े खुलासे हैं। नियम और फाइल के अनुसार जो भी कार्रवाई होना है, जल्द करेंगे।
डी.के. छबलानी, डायरेक्टर
इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन
अधिकारी हैं कुछ भी रिपोर्ट बना सकते हैं...
आयकर की अप्राइजल रिपोर्ट की जानकारी है आपको?
नहीं है, रिपोर्ट सब जगह से मंजूर होने के बाद हमें मिलेगी।
रिपोर्ट में 700 करोड़ का हवाले का जिक्र है?
मुझे जानकारी नहीं है।
जयपुर-रींगस रोड का ठेका आरइन्फ्रा को मिला, काम आपने किया?
हां।
गीत एक्जिम की जानकारी तो है आपको?
जी नहीं, क्या है यह।
फिर इस कंपनी को आपने 80 करोड़ का भुगतान कैसे कर दिया?
कोई जानकारी नहीं।
तो क्या अप्राइजल रिपोर्ट झूठी है।
अब आयकर के अधिकारी हैं अपने स्तर पर जो भी रिपोर्ट बना दे, कम है।
पुनीत अग्रवाल, संचालक
पाथ, महू
मैंने तो सिर्फ मुंबई से जानकारी लेकर आयकर को दी...
इस पूरे मामले में आयकर ने आईएनजी वैश्य बैंक, जंजीरा चौराहा के अधिकारी से पूछताछ की गई थी उससे दबंग दुनिया ने भी बात की। उसने न अपना नाम बताया न ही ज्यादा डिटेल दी। बस यही कहा कि कुल 20 डेड अकाउंट हैं जिनसे ट्रांजेक्शन हुआ है। इन खातों से संबंधित मुझसे जितनी जानकारी आयकर ने मांगी थी मैंने उतनी जानकारी मुंबई स्थित ब्रांच से लेकर दे दी। 

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