Monday, June 8, 2015

आरबीआई ने पीएम को सौंपा ‘जूम’ का जादू


10 बड़े बकायादों की सूची देकर की ठोस कार्रवाई की मांग
इंदौर. विनोद शर्मा ।
Ñरिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के प्रमुख रघुराम राजन ने बीते दिनों देश के दस प्रमुख डिफॉल्टर्स की सूची प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी है। इस सूची में इंदौर बेस्ड जूम डेवलपर्स प्रा.लि. का नाम भी शामिल हैं। आरबीआई प्रमुख का मानना है कि कर्ज के नाम पर बैंकों के साथ हुई देश की 10 बड़ी धोखाधड़ियों को सुलझाने के लिए जीनियस एक्शन प्लान बनाना होगा। दिलचस्प बात यह है कि इन बकायादारों में रीयल एस्टेट, मीडिया और डायमंड फर्मे शामिल हैं। इन सभी प्रकरणों में सीबीआई जांच कर रही है।
आरबीआई प्रमुख द्वारा सौंपी गई जानकारी के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और डायरेक्टोरेट आॅफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) इस मसले पर उनके साथ हैं। बकायादार जानता है कि उसे अपनी पूंजी कैसे बचाना है और भुगतान से कैसे बचना है। धोखेबाजों से की जाने वाली वसूली को धीमा नहीं किया जा सकता।  एक दशक में हुई सिर्फ 10 धोखेबाजी में धोखेबाजों से ही 22500 करोड़ रुपए लिए जाना है। इससे बैंकों के नॉन पर्फोर्मिंग असेट्स (एनपीए) में भी भारी इजाफा हुआ है। दिसंबर 2014 में जारी बैंकों की पीएसयू के अनुसार एनपीए का आंकड़ा 2 लाख 60 हजार 531 करोड़ पहुंच चुका है। सूची में कुल बकायादारों में से टॉप 30 बकायादारों के नाम शामिल हैं इसमें से शीर्ष 10 की स्थिति काफी चिंताजनक है।
पीएमओ ने इस संबंध अजित कुमार सेठ, कैबिनेट सचिव के साथ इस मामले को उठाने के लिए वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा विभाग को कहा है। पीएमओ धोखाधड़ी रिपोर्टिंग में आवश्यक संरचनात्मक परिवर्तन की शुरूआत के पक्ष में है और बड़े मूल्य की बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में समन्वय स्थापित करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने की जरूरत है। यह भी तय हुआ है कि एक उच्च स्तरीय कमेटी बनेगी जो बैंकिंग धोखाधड़ी विरोधी तंत्र को मजबूत बनाने के मानक तय करेगी।
जूम चौथी बड़ी कर्जेदार
जूम डेवलपर्स प्रा.लि. ने 2004 से 2009 के बीच यूरोप और यूएई में अलग-अलग विकास परियोजनाओं के नाम पर बैंक ग्यारंटी के लिए अप्लाई किया। काम शुरू करने के लिए 30 प्रतिशत राशि की बैंक ग्यारंटी चाहिए। कुल 25 बैंकों के कंसोर्टियम ने राशि मंजूर कर दी। इसी बीच 2008-09 में मंदी छाई रही जिसकी आड़ लेकर कंपनी ने स्वयं को दिवालिया घोषित कर दिया। पंजाब नेशनल बैंक  का 409 करोड़, यूनियन बैंक आॅफ इंडिया का 230 करोड़, युनाइटेड इंडिया बैंक का 167 करोड़, सिंडिकेट बैंक का 83 करोड़ और केनड़ा बैंक का 77 करोड़ रुपया बकाया है।
इन कंपनियों के नाम दिए...
किंगफीशन एअरलाइंस 2,673 करोड़
विनसम डाइमंड एंड ज्वैलरी 2,660 करोड़
जूम डेवलपर्स प्रा.लि. 1810 करोड़
सूर्या विनायक इंडस्ट्री 1,446 करोड़
इसके अलावा यह कंपनियां भी...
तिवारी ग्रुप, सूर्या विनायक इंडस्ट्री, डेक्कन कॉर्निकल होल्डिंग, फस्ट लीजिंग कंपनी आॅफ इंडिया, बायोलर इंडस्ट्रीज, सूर्या फार्मास्यूटिकल्स, प्राइप इम्पेक्स एंड प्राइम पल्सेस। एक अन्य बकायेदार के रूप में किसी फर्म का नाम नहीं बल्कि शिवराज पुरी का नाम है जिस पर सिटीबैंक के साथ 400 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
आरबीआई की प्लानिंग..
- मौजूदा व्यवस्था में बदलाव
- इरादतन बड़े डिफॉल्टरों को उद्योग के मुखिया के तौर पर सम्मान नहीं देना चाहिए बल्कि उन्हें देश के लोगों बेवजह बोझ डालने वालों के रूप में देखा जाना चाहिए।
- आरबीआई बैंकों को पुनर्गठन के मोर्चे पर अधिक लचीलापन देने को तैयार है, बशर्ते इससे रुकी हुई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिले।
- रिजर्व बैंक इस तथ्य को जानता है कि वह दबाव वाले हर छोटे बड़े कर्जे पर नियंत्रण नहीं कर सकता, इसलिए वह इस मामले पर लचीला रुख अपनाने को तैयार है। 

No comments:

Post a Comment