Monday, June 8, 2015

एक ही स्टूडेंट को दो कॉलेजों से मिली स्कॉलर्शीप

इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्कॉलर्शीप घोटाला
इंदौर. विनोद शर्मा ।
‘‘18 अपै्रल 1990 को जन्में अमर पिता कमल पटेल ‘जो कि ओबीसी जाति वर्ग के हैं’, ने 2010-11 में मालवा इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी इंदौर से बीई (कम्प्यूटर साइंस) प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया। 2012-13 तक वे इसी कॉलेज में रहे और फाइनल किया। उन्हें 2010-11 में 36 हजार स्कॉलर्शीप भी मिली। चौकाने वाली बात यह है कि अमर पिता कमल पटेल के नाम पर ही 2010-11 में एक्रोपॉलिस टेक्नीकल कैम्पस इंदौर से भी 36 हजार की ही स्कॉलर्शीप जारी हुई। एक ही साल में एक ही स्टूडेंट्स दो अलग-अलग कॉलेज से एक ही कोर्स नहीं कर सकता, फिर भी उसे स्कॉलर्शीप जारी हुई दो जगह से।’’
यह सिर्फ एक उदाहरण है जिसका जिक्र अखिल भारतीय इंजीनियरिंग छात्र संगठन (ईएसओआई) ने अपनी शिकायत में प्राथमिकता से किया है। ईएसओ के इंदौर संभागीय अध्यक्ष शौरभ शुक्ल ने बताया कि सिर्फ अमर ही नहीं, ऐसे कई उदाहरण हैं जो साबित करते हैं कि इंदौर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कैसे स्कॉलर्शीप घोटाले को अंजाम दिया गया है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी आदिम जाति कल्याण विभाग के माध्यम से ही विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप दी जाती है। कई दस्तावेज जब्त किए गए जिससे पता चला कि यहां भी घोटाला हुआ। यह घोटाला पैरामेडिकल कॉलेजों से बड़ा है। पैरामेडिकल कॉलेजों में करीब 25 करोड़ तो इंजीनियरिंग कॉलेज में अब तक 30 करोड़ के घोटाले की जानकारी अफसरों के हाथ लगी है।
एक स्टूडेंट, एक वर्ष, दो मास्टर डिग्री, दोनों ही छात्रवृति
जुलाई 1990 में जन्में आलोक विनायक प्रसाद पटेल ओबीसी जातिवर्ग से है। आलोक ने एस्ट्रल इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च में 2012-13 में एमबीए प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। 2013-14 में वे दूसरे वर्ष में आए। उन्हें सालाना 30 हजार की स्कॉलर्शीप मिली। यहां चौकाने वाली बात यह थी कि आलोक ने 2013-14 जबकि वह एमबीए दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहा था उसके नाम से श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट आॅफ मैनेजमेंट में एमसीए दूसरे वर्ष में प्रवेश जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं 35 हजार की स्कॉलर्शीप भी जारी हुई। एक ही साल में एमबीए और एमसीए करना नामुकीन है।

उम्र का अर्धशतक लगा चुके लोगों को मिली स्कॉलर्शीप...
श्री शुक्ल ने बताया कि कॉलेजों में अधिकारियों के तालमेल के साथ स्कॉलर्शीप का गौरखधंधा चल रहा है। ईएसओ ने जो दस्तावेज जुटाए हैं उनके अनुसार कई ऐसे लोगों को छात्रवृत्ति दी गई जिनकी उम्र 45 से 50 के बीच है। एमबीए, बीई और एमसीए जैसे कोर्सेस करने के लिए आगे आए इन तमाम लोगों ने अपनी आय की फर्जी जानकारी दी। शुक्ल ने बताया कि कई दस्तावेजों पर नायब तहसीलदार की फर्जी सील लगी है।
ऐसे बटी रेवड़ी की तरह स्कॉलर्शीप...
लाभान्वित जन्म दिनांक जाति श्रेणी कोर्स शिक्षण सत्र वार्षिक आय कॉलेज
हीरालाल चौधरी 1/2/1966 ओबीसी डी फार्मा-2 2009-10 36 हजार सेंट्रल इंडिया इंस्टिट्यूट
सोफिया कुरैशी 3/8/1968 ओबीसी एमबीए-1 2011-12 48 हजार व्यंकटेश्वर इंस्टिट्यूट आॅफ टे.
यशपाल सिंह 7/1/1969 ओबीसी एमबीए-1 2012-13 40 हजार शिवकुमार सिंह इंस्टिट्यूट
विकास भावसार 1/5/1970 एससी बीई(एम)-2 2012-13 30 हजार प्रीतम इंस्टिट्यूट
रामदास नागले 5/1/1970 एससी बीई(एम)-2 2012-13 30 हजार विक्रांत इंस्टिट्यूट
के.आर.देशमुख 8/4/1970 ओबीसी बीई(एम)-2 2011-12 60 हजार शिवकुमार सिंह इंस्टिट्यूट
जितेंद्र चौधरी 1/1/1972 एससी एमबीए-1 2011-12 36 हजार प्रीतम इंस्टिट्यूट
मोहन रायदास 1/3/1972 एससी बीई(एम)-2 2011-12 36 हजार स्टार अकेडमी
पी.एस.गेहलोत 1/9/1973 एससी बीई-1 2012-13 36 हजार मथुरादेवी इंस्टिट्यूट
हमारी शिकायतों पर हुई कार्रवाई...
ईएसओ ने स्कॉलरशिप में फजीर्वाड़े की जो शिकायतें की उनकी गंभीरता को देखते हुए जबलपुर प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जिले के 18 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों से पिछले तीन सालों में जिन छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है, इसका ब्यौरा मांगा गया है। मामला सीधे तौर पर फर्जी छात्रों और एक ही छात्र के नाम पर कई कॉलेजों में छात्रवृत्ति देने से जुड़ा है।
इन बिंदुओं पर हो रही है जांच
ऐसे छात्रों के नाम ढूंढने की कोशिश की जा रही है, जिनके नाम एक से ज्यादा कॉलेज में हैं। कॉलेज में दर्ज नाम पर छात्र पढ़ रहा है या नहीं, ये देखा जा रहा है। कॉलेज ने कितने छात्रों के नाम पर स्कॉलरशिप ली और वास्तविक छात्र कितने हैं। किसी फर्जी छात्र के नाम पर तो स्कॉलरशिप नहीं ली जा रही है। 

No comments:

Post a Comment