Monday, June 15, 2015

कान्हां के 70 सदस्यों को नोटिस, गुरुशरण अब भी पहेली

इनकम टैक्स इंटेलीजेंस को बड़ी संस्था के दस्तावेजों की अब भी तलाश
- रिपोर्ट पर आयुक्त ने शुरू की कार्रवाई 

इंदौर. विनोद शर्मा ।
कान्हां के्रडिट को-आॅपरेटिव बैंक में डीडी और चेक बनवाने वाले 70 व्यापारियों को आयकर ने नोटिस जारी कर दिए हैं जबकि गुरुशरण के्रडिट को-आॅपरेटिव बैंक के दस्तावेज अब भी आयकर की पहुंच से दूर है। आयकर की इंटेलीजेंस विंग को इस बात के दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिले हैं कि गुरुशरण में कितने सदस्य हैं और कितने रुपए का बेहिसाब कारोबार हुआ। 550 करोड़ का आंकड़ा सिर्फ कान्हां का है जो कि गुरुशरण बंद करने के बाद 2013 में शुरू की गई थी।
इनकम टैक्स की इंटेलीजेंस यूनिट ने अक्टूबर 2014 में रिवर साइड रोड स्थित कान्हां और  गुरुशरण के्रडिट को-आॅपरेटिव बैंक के खिलाफ छापेमार कार्रवाई करते हुए 550 करोड़ से अधिक का हिसाब-किताब पकड़ा था। जांच में यह भी स्पष्ट हो चुका है कि गुरुशरण चूंकि पहले क्रेडिट को-आॅपरेटिव बैंक थी जो कि सहकारिता अधिनियम के तहत सहकारिता विभाग की दखल से बाहर थी। 2013 में बैंक बदले नियमों के साथ संस्था की जद में आई। इसीलिए संचालकों ने बैंक बंद करने की तैयारी शुरू कर दी और कान्हां के नाम से दूसरी बैंक बना दी। इंटेलीजेंस विंग ने जब छापेमार कार्रवाई की तो गुरुशरण बैंक में ही कान्हां भी चलती मिली। दोनों के संचालक भी समान हैं।
इन्वेस्टिगेशन के दौरान इनकम टैक्स के सामने तकरीबन 150 व्यापारियों के नाम आए। इनमें से 70 कान्हां के सदस्य हैं। बड़ी बात यह है कि यही 70 नाम ऐसे थे जिनके नाम का जिक्र गुरुशरण और कान्हां दोनों में है। कान्हां के जब्त रिकार्ड के अनुसार इन 70 सदस्यों ने 125 करोड़ रुपए बैंक से इधर-उधर किए। इंटेलीजेंस ने इसकी रिपोर्ट आयकर आयुक्त को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर इन 70 कारोबारियों को नोटिस भी जारी हो चुके हैं। बड़ी पहेली गुरुशरण के दस्तावेजी प्रमाण और उनके 150 सदस्यों के लेन-देन का रिकार्ड है जो अब तक विभाग की जद से दूर है।
फिर जवाब ला कहां से रहा है...?
इंटेलीजेंस को छानबीन के दौरान गुरुशरण का रिकार्ड मौके पर मिला नहीं है लेकिन गुरुशरण से संबंधित जितने भी सवाल अब तक जन्में हैं संचालकों ने उनके जवाब में दस्तावेज जरूर पेश किए हैं। ऐसे में विंग के सामने बड़ा सवाल यह है कि आखिर संचालकों ने दस्तावेज ऐसे कौनसे गोपनीय स्थान पर रखे जहां तक उनकी नजर नहीं पहुंच पाई। इस संबंध में वे संस्था के संचालकों तक से पूछ चुके हैं लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
फिर तो आठ गुना ज्यादा निकलता कारोबार
इंदौर में एक ही संचालक द्वारा संचालित गुरुशरण और कान्हा को-आॅपरेटिव बैंकों में कार्रवाई की।  इंटेलीजेंस विंग को सिर्फ कान्हां के रिकार्ड मिले और उसी में 550 करोड़ का बेहिसाब है। कान्हा सोसायटी का पंजीयन 4 फरवरी 2014 को हुआ जबकि छापा पड़ा 20 नवंबर 2014 को। सिर्फ 289 में पंजीयन और छापे के बीच 550 करोड़ का हिसाब वह भी सिर्फ 70 व्यापारियों के साथ। यानी हर दिन औसत 1 करोड़ 90 लाख 31 हजार 141 रुपए का कारोबार।
वहीं गुरुशरण सोसायटी का पंजीयन सहकारिता स्वायत्तता अधिनियम के तहत 2008 में हुआ था लेकिन 2013 में सरकार ने यह अधिनियम समाप्त कर दिया था। फिर भी संस्था पुराने प्रावधानों पर 2014 तक कामकाज करती रही। यानी 150 सदस्यों के साथ संस्था छह साल (2190 दिन) काम किया।  कान्हां के औसत कारोबार के हिसाब से ही बात करें तो गुरुशरण ने 2190 में 4167 करोड़ 81 लाख 98 हजार 790 रुपए का कारोबार किया। जबकि यहां सदस्यों की संख्या 150 थी और कान्हां के कारोबार का औसत 70 सदस्यों से निकाला।
   

No comments:

Post a Comment