अफसरों ने चौधरी को लीक किए गोपनीय कागज
इंदौर. विनोद शर्मा ।
देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई में कार्यरत 16 अधिकारियों पर तीन साल में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। इनमें कुछ अधिकारी वे भी हैं जिन्होंने जूम डेवलपर्स प्रा.लि. के उन कर्ताधर्ताओं की दिल खोलकर मदद की जिन्होंने 25 बैंकों को 2650 करोड़ की चपत लगाई। इसका खुलासा कार्मिक मामलों के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कर चुके हैं। शायद, यही वजह रही कि सीबीआई चार वर्षों में जूम के खिलाफ अपेक्षाकृत परिणाम नहीं दे पाई। चार वर्षों में शरद काबरा ही पहला ऐसा व्यक्ति है जो गिरफ्तार हुआ, हालांकि गिरफ्तारी भी ईडी ने की।
जूम डेवलपर द्वारा कर्ज लेकर बैंकों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोपों की जांच सीबीआई कर रही है। शुरुआत में सीबीआई ने काफी सक्रियता के साथ इस मामले की तहकीकात की। प्रकरण दर्ज करने के बाद थोड़ी-बहुत जांच हुई। फिलहाल कार्रवाई ज्यादा आगे नहीं बड़ी है। उधर, मार्च में मंत्री द्वारा विभाग की ओर से दिए गए बयान के अनुसार एजेंसी ने पिछले साल अज्ञात सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निर्देशक विजय मदनलाल चौधरी की मदद की। इन अधिकारियों ने मुंबई में जो सीबीआई की बैंकिंग एंड सिक्योरिटी फ्रॉड सेल है वहां से कथित तौर पर गोपनीय सरकारी दस्तावेज लीक करके चौधरी को दिए। ताकि सीबीआई की जांच में जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं चौधरी उनका तोड़ निकाल सके। इस पूरे मामले का खुलासा 11 मार्च 2015 को दक्षीण भारत का मुख्य अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदु’ भी कर चुका है।
सीबीआई अफसरों पर हुई यह कार्रवाई
16 दागी अफसर मिले जो इंस्पेक्टर से लेकर डीएसपी रेंक के हैं। मामला दर्ज करके चार्जशीट पकड़ा दी। एक को नौकरी से हटा दिया। एक का डिमोशन कर दिया। एक को बर्खास्त कर दिया। नौ मामलों में से पांच अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही है। चार मामलों में से एक अधिकारी को बर्खास्त किया गया और इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई। एक अधिकारी को सेवानिवृति कर दिया गया जबकि दो मामलों में जांच चल रही है।
ऐसा है पूरा मामला
ऐसी है जूम...
जूम डेवलपर्स लिमिटेड के डायरेक्टर विजय चौधरी और उसके ससूर बीएल केजरीवाल हैं। कंपनी मुंबई से अपने प्रोजेक्ट डेवलपमेंट और आईटी गतिविधियों को संचालित करती है। इंदौर में वह प्रसंस्करण संयंत्र, रसायन एवं पेट्रो रसायन संयंत्र, इस्पात संयंत्र, वाहनों के कलपुर्जे आदि विभिन्न क्षेत्र की परियोजनाओं से जुड़ी है।
यूं बड़ा खेल
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के अनुसार, ईसीजीसी ने पंजाब नैशनल बैंक के नेतृत्व में 25 बैंकों के कंसोर्टियम ने कंपनी को 2003 से 2009 के बीच 2,114 करोड़ रुपये मूल्य की 193 काउंटर गारंटी जारी की थी। इसके तहत विभिन्न देशों में परियोजनाओं संचालन के लिए विदेशी खरीदारों द्वारा निर्यातक को किए गए अग्रिम भुगतानों को कवर किया जाना था। हालांकि सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2,066 करोड़ रुपये मूल्य के 190 कवर परियोजनाओं के पूरे न होने से संबंधित थे। बैंक गारंटी केश कराबर मंदी का बहाना बनाकर काम बंद कर दिया।
ईडी क्यों
सितंबर 2014 में वित्त मंत्रालय ने कुछ बड़े बैंक डिफाल्टरों के नाम ईडी को सौंपे और फेमा-पीएमएलए की जांच करने को कहा। अंतत: सीबीआई ने ईडी को फाइल सौंप दी। ईडी ने ईसीआईआर दर्ज करके जांच शुरू कर दी। 2011 से 2014 के बीच सीबीआई की जांच भले आगे नहीं बढ़ी लेकिन ईडी ने 10 महीनों में ही काबरा को गिरफ्तार करके अपनी कॉलर ऊंची कर ली।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई में कार्यरत 16 अधिकारियों पर तीन साल में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। इनमें कुछ अधिकारी वे भी हैं जिन्होंने जूम डेवलपर्स प्रा.लि. के उन कर्ताधर्ताओं की दिल खोलकर मदद की जिन्होंने 25 बैंकों को 2650 करोड़ की चपत लगाई। इसका खुलासा कार्मिक मामलों के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कर चुके हैं। शायद, यही वजह रही कि सीबीआई चार वर्षों में जूम के खिलाफ अपेक्षाकृत परिणाम नहीं दे पाई। चार वर्षों में शरद काबरा ही पहला ऐसा व्यक्ति है जो गिरफ्तार हुआ, हालांकि गिरफ्तारी भी ईडी ने की।
जूम डेवलपर द्वारा कर्ज लेकर बैंकों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोपों की जांच सीबीआई कर रही है। शुरुआत में सीबीआई ने काफी सक्रियता के साथ इस मामले की तहकीकात की। प्रकरण दर्ज करने के बाद थोड़ी-बहुत जांच हुई। फिलहाल कार्रवाई ज्यादा आगे नहीं बड़ी है। उधर, मार्च में मंत्री द्वारा विभाग की ओर से दिए गए बयान के अनुसार एजेंसी ने पिछले साल अज्ञात सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निर्देशक विजय मदनलाल चौधरी की मदद की। इन अधिकारियों ने मुंबई में जो सीबीआई की बैंकिंग एंड सिक्योरिटी फ्रॉड सेल है वहां से कथित तौर पर गोपनीय सरकारी दस्तावेज लीक करके चौधरी को दिए। ताकि सीबीआई की जांच में जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं चौधरी उनका तोड़ निकाल सके। इस पूरे मामले का खुलासा 11 मार्च 2015 को दक्षीण भारत का मुख्य अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदु’ भी कर चुका है।
सीबीआई अफसरों पर हुई यह कार्रवाई
16 दागी अफसर मिले जो इंस्पेक्टर से लेकर डीएसपी रेंक के हैं। मामला दर्ज करके चार्जशीट पकड़ा दी। एक को नौकरी से हटा दिया। एक का डिमोशन कर दिया। एक को बर्खास्त कर दिया। नौ मामलों में से पांच अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही है। चार मामलों में से एक अधिकारी को बर्खास्त किया गया और इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई। एक अधिकारी को सेवानिवृति कर दिया गया जबकि दो मामलों में जांच चल रही है।
ऐसा है पूरा मामला
ऐसी है जूम...
जूम डेवलपर्स लिमिटेड के डायरेक्टर विजय चौधरी और उसके ससूर बीएल केजरीवाल हैं। कंपनी मुंबई से अपने प्रोजेक्ट डेवलपमेंट और आईटी गतिविधियों को संचालित करती है। इंदौर में वह प्रसंस्करण संयंत्र, रसायन एवं पेट्रो रसायन संयंत्र, इस्पात संयंत्र, वाहनों के कलपुर्जे आदि विभिन्न क्षेत्र की परियोजनाओं से जुड़ी है।
यूं बड़ा खेल
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के अनुसार, ईसीजीसी ने पंजाब नैशनल बैंक के नेतृत्व में 25 बैंकों के कंसोर्टियम ने कंपनी को 2003 से 2009 के बीच 2,114 करोड़ रुपये मूल्य की 193 काउंटर गारंटी जारी की थी। इसके तहत विभिन्न देशों में परियोजनाओं संचालन के लिए विदेशी खरीदारों द्वारा निर्यातक को किए गए अग्रिम भुगतानों को कवर किया जाना था। हालांकि सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2,066 करोड़ रुपये मूल्य के 190 कवर परियोजनाओं के पूरे न होने से संबंधित थे। बैंक गारंटी केश कराबर मंदी का बहाना बनाकर काम बंद कर दिया।
ईडी क्यों
सितंबर 2014 में वित्त मंत्रालय ने कुछ बड़े बैंक डिफाल्टरों के नाम ईडी को सौंपे और फेमा-पीएमएलए की जांच करने को कहा। अंतत: सीबीआई ने ईडी को फाइल सौंप दी। ईडी ने ईसीआईआर दर्ज करके जांच शुरू कर दी। 2011 से 2014 के बीच सीबीआई की जांच भले आगे नहीं बढ़ी लेकिन ईडी ने 10 महीनों में ही काबरा को गिरफ्तार करके अपनी कॉलर ऊंची कर ली।
No comments:
Post a Comment