- ईडी में आकर झूठा बयान देना जूम डेवलपर्स के वाइस प्रेसीडेंट शरद काबरा को पड़ा महंगा
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
बैलेंस शीट और बैंक गारंटी में फर्जीवाड़ा करके जूम डेवलपर्स को 2650 करोड़ का लोन दिलाने वाले शरद काबरा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इंदौर ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब समन मिलने के बाद काबरा अपना पक्ष रखने ईडी पहुंचा और अफसरों के सवालों के झूठे जवाब देता रहा। जूम डेवलपर्स में कंपनी सेक्रेटरी (सीएस), डायरेक्टर होते हुए वाइस प्रेसीडेंट पद तक पहुंचा काबरा 135 कंपनियों में बतौर डायरेक्टर या पार्ट टाइम डायरेक्टर के रूप में दखल रखता है।
सीबीआई की अनुसंशा पर जूम डेवलपर्स प्रा.लि. के खिलाफ ईडी इन्फोर्समेंट केस इन्फार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करके जांच कर रहा है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों पर जवाब के लिए संचालकों को बयान देने बुलाया जा रहा है। इसी कड़ी में कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट शरद कुमार काबरा ‘जिनका पता पोवल, मुंबई है’, को समन जारी करके बुलाया था। काबरा आया भी। पूछताछ के दौरान जब उससे जूम डेवलपर्स ने कैसे बैंकों को टोपी पहनाई? इस संबंध में सवाल पूछे गए। जवाब में वह जो कहानी सुना रहा था वह जांच के दौरान ईडी के अफसरों के हाथ लगे दस्तावेजों से उलट थी। इसीलिए झूठे बयान देने के आरोप में धारा-19 के तहत उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
बूम पर ले गए जूम को...
शरद कुमार काबरा बैंकिंग का मास्टर है। शुरूआत में वह जूम में कंपनी सेकेट्ररी था। उसने फर्जीवाड़ा करके बैलेंस सीट मजबूत की। बाद में भारी भरकम प्रोजेक्ट बताकर उन पर बैंक गारंटी ली। यहां तक की फॉरेंट एंटेटिस (विदेशी कंपनियों) के साथ विदेशी निवेश बताकर जूम को बैंक गारंटी दिलाई। बाद में बैंक गारंटी को केश कराया और फिर मंदी की मार का हवाला देकर जूम को दिवालिया घोषित करवा दिया।
बैलेंस सीट को मजबूत करने के लिए काबरा ने एक कंपनी से दूसरी कंपनी में पैसा पहुंचाया, दूसरी से तीसरी में और तीसरी से फिर पहली में। तीसरी कंपनी विदेश में पंजीबद्ध करा ली। उसके दम पर बताया जाता रहा कि जूम की न सिर्फ बैलेंस सीट मजबूत है बल्कि विदेशी कारोबार भी तगड़ा है।
मुश्किल है जमानत
ईडी ने गिरफ्तार करके देर रात तक काबरा को अपने रिमांड रूम में रखा। हालांकि अधिकारियों का कहना था कि आवश्यकता पड़ने पर काबरा को रात में ही कोतवाली पुलिस को सौंपा जा सकता है।
जानकारों की मानें तो मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा-19 के तहत जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी होती है उसे कोर्ट से भी जमानत नहीं मिलती है। क्योंकि धारा 45 के तहत मजिस्ट्रिेट को जमानत देने से पहले बताना होता है कि आरोपी पर आरोप सिद्ध नहीं हो रहे हैं।
135 कंपनियों में डायरेक्टर
अधिकारियों ने बताया कि शरद कुमार काबरा न सिर्फ जूम बल्कि करीब 135 कंपनियों से जुड़ा है। इनमें कई में डायरेक्टर हैं जबकि कई में डायरेक्टर रह चुका है। जिन कंपनियों में डायरेक्टर है उनमें जूम सॉफ्टेक प्रा.लि., जूम बिल्डवेल प्रा.लि., जूम मोटेल्स प्रा.लि., जूम मोटेल्स भुवनेशवर प्रा.लि., जूम मोटेल्स पॉन्डिचरी प्रा.लि., पेरा माउंट पॉवर टेक प्रा.लि., अजमेर वेस्ट प्रोसेसिंग कंपनी प्रा.लि., कोरटालयर ब्रिज प्रा.लि., जॉडिक टेक्नो सर्विस प्रा.लि., ब्लू प्लानेट नॉलेज सर्विस ्रप्रा.लि, उप्स इंटरनेशनल सिक्योरिटीज प्रा.लि., ग्रीन लाइन रीयल टेक प्रा.लि. जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसमें करीब 50 से ज्यादा ग्रुप ऐसे हैं जिनका टाइटल जूम के नाम पर रजिस्टर्ड है।
इन बैंकों की शिकायत पर आगे बढ़ी कार्रवाई
पंजाब नेशनल बैंक 409 करोड़
यूनियन बैंक आॅफ इंडिया 230 करोड़
युनाइटेड इंडिया बैंक 167 करोड़
सिंडिकेट बैंक 83 करोड़
केनड़ा बैंक 77 करोड़
2011 में जारी की नॉन प्रोडक्टिव असेट्स
बैंक राशि (करोड़ में)
पीएनबी 300
इंडियन बैंक 120
सेंट्रल बैंक 100
यूनियन बैंक 50
देना बैंक 56
बैंक आॅफ बड़ौदा 36
फेडरल बैंक 17
(पंजाब नेशनल बैंक ने 450 करोड़ में से 300 करोड़ रुपए एनपीए घोषित किया था जो कि वित्तीय वर्ष 2010-11 के कुल एनपीए अमाउंट का 8 प्रतिशत था। बैंकें मान चुकी थी कि अब पैसा मिलना ही नहीं है।)
इन बैंकों को पहनाई टोपी....
1.यूनाइटेड इंडिया बैंक, 2.पंजाब एंड सिंध बैंक, 3. कर्नाटक बैंक, 4. इलाहाबाद बैंक, 5. सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया, 6. देना बैंक, 7. यूनियन बैंक आॅफ इंडिया, 8. आंध्रा बैंक, 9. सिंडीकेट बैंक, 10. बैंक आॅफ बड़ौदा, 11 इंडियन ओवरसीज बैंक, 12. कॉपोर्रेशन बैंक 13. इंडियन बैंक, 14. विजया बैंक, 15. पटियाला बैंक, 16 स्टेट बैंक आॅफ बीकानेर एंड जयपुर 17. ओरियंटल बैंक आॅफ कॉमर्स, 18. यूको बैंक, 19. स्टेट बैंक आॅफ हैदराबाद, 20. केनरा बैंक, 21. पंजाब नेशनल बैंक, 22. स्टेट बैंक आॅफ त्रावणकोर 23 तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक लिमिटेड 24. फेडरल बैंक 25. स्टेट बैंक आॅफ इंडिया।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
बैलेंस शीट और बैंक गारंटी में फर्जीवाड़ा करके जूम डेवलपर्स को 2650 करोड़ का लोन दिलाने वाले शरद काबरा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इंदौर ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब समन मिलने के बाद काबरा अपना पक्ष रखने ईडी पहुंचा और अफसरों के सवालों के झूठे जवाब देता रहा। जूम डेवलपर्स में कंपनी सेक्रेटरी (सीएस), डायरेक्टर होते हुए वाइस प्रेसीडेंट पद तक पहुंचा काबरा 135 कंपनियों में बतौर डायरेक्टर या पार्ट टाइम डायरेक्टर के रूप में दखल रखता है।
सीबीआई की अनुसंशा पर जूम डेवलपर्स प्रा.लि. के खिलाफ ईडी इन्फोर्समेंट केस इन्फार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करके जांच कर रहा है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों पर जवाब के लिए संचालकों को बयान देने बुलाया जा रहा है। इसी कड़ी में कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट शरद कुमार काबरा ‘जिनका पता पोवल, मुंबई है’, को समन जारी करके बुलाया था। काबरा आया भी। पूछताछ के दौरान जब उससे जूम डेवलपर्स ने कैसे बैंकों को टोपी पहनाई? इस संबंध में सवाल पूछे गए। जवाब में वह जो कहानी सुना रहा था वह जांच के दौरान ईडी के अफसरों के हाथ लगे दस्तावेजों से उलट थी। इसीलिए झूठे बयान देने के आरोप में धारा-19 के तहत उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
बूम पर ले गए जूम को...
शरद कुमार काबरा बैंकिंग का मास्टर है। शुरूआत में वह जूम में कंपनी सेकेट्ररी था। उसने फर्जीवाड़ा करके बैलेंस सीट मजबूत की। बाद में भारी भरकम प्रोजेक्ट बताकर उन पर बैंक गारंटी ली। यहां तक की फॉरेंट एंटेटिस (विदेशी कंपनियों) के साथ विदेशी निवेश बताकर जूम को बैंक गारंटी दिलाई। बाद में बैंक गारंटी को केश कराया और फिर मंदी की मार का हवाला देकर जूम को दिवालिया घोषित करवा दिया।
बैलेंस सीट को मजबूत करने के लिए काबरा ने एक कंपनी से दूसरी कंपनी में पैसा पहुंचाया, दूसरी से तीसरी में और तीसरी से फिर पहली में। तीसरी कंपनी विदेश में पंजीबद्ध करा ली। उसके दम पर बताया जाता रहा कि जूम की न सिर्फ बैलेंस सीट मजबूत है बल्कि विदेशी कारोबार भी तगड़ा है।
मुश्किल है जमानत
ईडी ने गिरफ्तार करके देर रात तक काबरा को अपने रिमांड रूम में रखा। हालांकि अधिकारियों का कहना था कि आवश्यकता पड़ने पर काबरा को रात में ही कोतवाली पुलिस को सौंपा जा सकता है।
जानकारों की मानें तो मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा-19 के तहत जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी होती है उसे कोर्ट से भी जमानत नहीं मिलती है। क्योंकि धारा 45 के तहत मजिस्ट्रिेट को जमानत देने से पहले बताना होता है कि आरोपी पर आरोप सिद्ध नहीं हो रहे हैं।
135 कंपनियों में डायरेक्टर
अधिकारियों ने बताया कि शरद कुमार काबरा न सिर्फ जूम बल्कि करीब 135 कंपनियों से जुड़ा है। इनमें कई में डायरेक्टर हैं जबकि कई में डायरेक्टर रह चुका है। जिन कंपनियों में डायरेक्टर है उनमें जूम सॉफ्टेक प्रा.लि., जूम बिल्डवेल प्रा.लि., जूम मोटेल्स प्रा.लि., जूम मोटेल्स भुवनेशवर प्रा.लि., जूम मोटेल्स पॉन्डिचरी प्रा.लि., पेरा माउंट पॉवर टेक प्रा.लि., अजमेर वेस्ट प्रोसेसिंग कंपनी प्रा.लि., कोरटालयर ब्रिज प्रा.लि., जॉडिक टेक्नो सर्विस प्रा.लि., ब्लू प्लानेट नॉलेज सर्विस ्रप्रा.लि, उप्स इंटरनेशनल सिक्योरिटीज प्रा.लि., ग्रीन लाइन रीयल टेक प्रा.लि. जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसमें करीब 50 से ज्यादा ग्रुप ऐसे हैं जिनका टाइटल जूम के नाम पर रजिस्टर्ड है।
इन बैंकों की शिकायत पर आगे बढ़ी कार्रवाई
पंजाब नेशनल बैंक 409 करोड़
यूनियन बैंक आॅफ इंडिया 230 करोड़
युनाइटेड इंडिया बैंक 167 करोड़
सिंडिकेट बैंक 83 करोड़
केनड़ा बैंक 77 करोड़
2011 में जारी की नॉन प्रोडक्टिव असेट्स
बैंक राशि (करोड़ में)
पीएनबी 300
इंडियन बैंक 120
सेंट्रल बैंक 100
यूनियन बैंक 50
देना बैंक 56
बैंक आॅफ बड़ौदा 36
फेडरल बैंक 17
(पंजाब नेशनल बैंक ने 450 करोड़ में से 300 करोड़ रुपए एनपीए घोषित किया था जो कि वित्तीय वर्ष 2010-11 के कुल एनपीए अमाउंट का 8 प्रतिशत था। बैंकें मान चुकी थी कि अब पैसा मिलना ही नहीं है।)
इन बैंकों को पहनाई टोपी....
1.यूनाइटेड इंडिया बैंक, 2.पंजाब एंड सिंध बैंक, 3. कर्नाटक बैंक, 4. इलाहाबाद बैंक, 5. सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया, 6. देना बैंक, 7. यूनियन बैंक आॅफ इंडिया, 8. आंध्रा बैंक, 9. सिंडीकेट बैंक, 10. बैंक आॅफ बड़ौदा, 11 इंडियन ओवरसीज बैंक, 12. कॉपोर्रेशन बैंक 13. इंडियन बैंक, 14. विजया बैंक, 15. पटियाला बैंक, 16 स्टेट बैंक आॅफ बीकानेर एंड जयपुर 17. ओरियंटल बैंक आॅफ कॉमर्स, 18. यूको बैंक, 19. स्टेट बैंक आॅफ हैदराबाद, 20. केनरा बैंक, 21. पंजाब नेशनल बैंक, 22. स्टेट बैंक आॅफ त्रावणकोर 23 तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक लिमिटेड 24. फेडरल बैंक 25. स्टेट बैंक आॅफ इंडिया।
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