25 बैंकों को 2650 करोड़ की चपत लगा चुके जूम समूह के सर्वेसर्वा की रणनीति उजागर
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जूम डेवलपर्स प्रा.लि. के सर्वेसर्वा विजय चौधरी ने बैंक गारंटी के नाम पर 25 बैंकों से जो 2650 करोड़ रुपए अर्जित किए थे उनका ज्यादातर इस्तेमाल पत्नी और बेटियों के लिए कंपनियां शुरू करने में किया गया है। इन कंपनियों पर किसी तरह की सरकारी जांच की आंच न आए इसीलिए वे इन कंपनियों से दूर ही रहे। इसका खुलासा दबंग दुनिया की पड़ताल में हुआ। छानबीन के दौरान पता चला कि बैंकों की बकायादारी के मामले में सितंबर 2010 में सीबीआई द्वारा छानबीन शुरू किए जाने के बाद से 2013 तक चौधरी परिवार ने आधा दर्जन नई कंपनियां खड़ी की।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जूम डेवलपर्स के वाइस प्रेसीडेंट शरद काबरा से हुई पूछताछ के बाद जूम समूह के कर्ताधर्ता विजय चौधरी, पत्नी मंजूरी चौधरी और बेटियां दिव्या और भव्या को भी समन दिए थे लेकिन कोई हाजिर नहीं हुआ। इसीलिए एक तरफ डिपार्टमेंट ने जहां पूरे परिवार को फरार घोषित कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है वहीं इसी परिवार से जुड़ी अलग-अलग जानकारियां भी ईडी के सामने आने लगी हैं। पता चला है कि सीबीआई की इन्वेस्टिगेशन शुरू होने के बाद एक तरफ विजय चौधरी ने जहां जूम समूह की ज्यादातर कंपनियों से इस्तीफा देकर अपने मातहतों को ‘मालिक’ बना दिया है वहीं वे पत्नी और बेटियों के नाम पर एक के बाद एक कंपनियां खोलते जा रहे हैं। उन्होंने कर्जे के नाम पर कालापीला करके जो भी पैसा कमाया है उसे चुकाने के बजाय वे इन्हीं कंपनियों के नाम से चला रहे हैं।
दस्तावेजों की मानें तो विजय चौधरी 10 कंपनियो में डायरेक्टर हैं और ये वे कंपनियां हैं जो 3 अक्टूबर 2006 तक या उससे पहले पंजीबद्ध हो चुकी थीं। इसी तरह मंजरी चौधरी भी उन्हीं 10 कंपनियों में डायरेक्टर हैं जिनका पंजीयन दिसंबर 2008 से पहले हो चुका था। 2008 के बाद बनी कंपनियों में बेटियों को डायरेक्टर बनाया गया है।
ऐसे जन्मी कंपनियां...
मंजरी वेल्यू इन्हांसिंग इंटरप्राइजेस प्रा.लि.। यह कंपनी 26 अक्टूबर 2012 को जन्मी। इस कंपनी में दिव्या चौधरी और भव्या चौधरी डायरेक्टर हैं। रेयोकॉर्प इम्पेक्स ट्रेडिंग प्रा.लि.। यह कंपनी 15 मार्च 2011 को रजिस्टर्ड हुई और इसमें दिव्या को डायरेक्टर बनाया गया 16 नवंबर 2011 को। इसी तरह रेयोकॉर्प फाइनेंशियल कंसलटेंट प्रा.लि. पंजीबद्ध हुई 17 मार्च 2011 को।
यह है पूरे परिवार की जन्म कुंडली...
नाम डी.आई. जन्म दिनांक
विजय चौधरी 79920 03/08/1958
मंजरी चौधरी 79968 26/10/1965
भव्या चौधरी 540190 11/10/1986
दिव्या चौधरी 3130651 06/11/1988
दिव्या चौधरी डायरेक्टर है....यहां..
जियो टेक्नोलोजिस प्रा.लि. 30 जून 2010 से
सिक्स्थ डाइमेंशन सिस्टम्स एंड सॉल्यूशन 15 नवंबर 2010 से
हिंदुस्तान पेटर ओटस प्रा.लि. 12 जनवरी 2011 से
रेयोकॉर्प फाइनेंशियल कं.प्रा.लि. 16 नवंबर 2011 से
रेयोकॉर्प इम्पेक्स एंड ट्रे.प्रा.लि. 16 नवंबर 2011 से
मंजरी वेल्यू इन्हांसिंग प्रा.लि. 26 अक्टूबर 2012 से
इंटेनशन्स एंड अटेंशन्स एच.आर. 20 अपै्रल 2013 से
भव्या चौधरी डायरेक्टर है
सिक्स्थ डायमेंशन सिस्टम एंड सॉल्यूशन 15 नवंबर 2010 से
जियो टेक्नोलॉजिस प्रा.लि. 30 जून 2010 से
मंजरी वेल्यू इन्हांसिंग इंटरप्राइजेस 26 अक्टूबर 2012 से
यह कंपनियां बनी 2010 के बाद...
मंजरी वेल्यू इन्हांसिंग इंटरप्राइजेस 26 अक्टूबर 2012
सिक्स्थ डायमेंशन सिस्टम एंड सॉल्यूशन 15 नवंबर 2010
रेयोकॉर्प फाइनेंशियल कं.प्रा.लि. 17 मार्च 2011
इंटेनशन्स एंड अटेंशन्स एच.आर. 20 अपै्रल 2013
रेयोकॉर्प इंपैक्स ट्रेडिंग कंपनी 15 मार्च 2011
ऐसे बढ़ी कार्रवाई चौधरी पर...
अपै्रल 2010 : बड़े डिफॉल्टर्स की सूची सार्वजनिक हुई।
सितंबर 2010 : आरबीआई ने मामला सीबीआई को सौंपा।
अक्टूबर 2010 : सीबीआई ने इन्वेस्टिगेशन शुरू की।
जनवरी 2011 : सीबीआई ने प्रकरण दर्ज किया।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जूम डेवलपर्स प्रा.लि. के सर्वेसर्वा विजय चौधरी ने बैंक गारंटी के नाम पर 25 बैंकों से जो 2650 करोड़ रुपए अर्जित किए थे उनका ज्यादातर इस्तेमाल पत्नी और बेटियों के लिए कंपनियां शुरू करने में किया गया है। इन कंपनियों पर किसी तरह की सरकारी जांच की आंच न आए इसीलिए वे इन कंपनियों से दूर ही रहे। इसका खुलासा दबंग दुनिया की पड़ताल में हुआ। छानबीन के दौरान पता चला कि बैंकों की बकायादारी के मामले में सितंबर 2010 में सीबीआई द्वारा छानबीन शुरू किए जाने के बाद से 2013 तक चौधरी परिवार ने आधा दर्जन नई कंपनियां खड़ी की।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जूम डेवलपर्स के वाइस प्रेसीडेंट शरद काबरा से हुई पूछताछ के बाद जूम समूह के कर्ताधर्ता विजय चौधरी, पत्नी मंजूरी चौधरी और बेटियां दिव्या और भव्या को भी समन दिए थे लेकिन कोई हाजिर नहीं हुआ। इसीलिए एक तरफ डिपार्टमेंट ने जहां पूरे परिवार को फरार घोषित कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है वहीं इसी परिवार से जुड़ी अलग-अलग जानकारियां भी ईडी के सामने आने लगी हैं। पता चला है कि सीबीआई की इन्वेस्टिगेशन शुरू होने के बाद एक तरफ विजय चौधरी ने जहां जूम समूह की ज्यादातर कंपनियों से इस्तीफा देकर अपने मातहतों को ‘मालिक’ बना दिया है वहीं वे पत्नी और बेटियों के नाम पर एक के बाद एक कंपनियां खोलते जा रहे हैं। उन्होंने कर्जे के नाम पर कालापीला करके जो भी पैसा कमाया है उसे चुकाने के बजाय वे इन्हीं कंपनियों के नाम से चला रहे हैं।
दस्तावेजों की मानें तो विजय चौधरी 10 कंपनियो में डायरेक्टर हैं और ये वे कंपनियां हैं जो 3 अक्टूबर 2006 तक या उससे पहले पंजीबद्ध हो चुकी थीं। इसी तरह मंजरी चौधरी भी उन्हीं 10 कंपनियों में डायरेक्टर हैं जिनका पंजीयन दिसंबर 2008 से पहले हो चुका था। 2008 के बाद बनी कंपनियों में बेटियों को डायरेक्टर बनाया गया है।
ऐसे जन्मी कंपनियां...
मंजरी वेल्यू इन्हांसिंग इंटरप्राइजेस प्रा.लि.। यह कंपनी 26 अक्टूबर 2012 को जन्मी। इस कंपनी में दिव्या चौधरी और भव्या चौधरी डायरेक्टर हैं। रेयोकॉर्प इम्पेक्स ट्रेडिंग प्रा.लि.। यह कंपनी 15 मार्च 2011 को रजिस्टर्ड हुई और इसमें दिव्या को डायरेक्टर बनाया गया 16 नवंबर 2011 को। इसी तरह रेयोकॉर्प फाइनेंशियल कंसलटेंट प्रा.लि. पंजीबद्ध हुई 17 मार्च 2011 को।
यह है पूरे परिवार की जन्म कुंडली...
नाम डी.आई. जन्म दिनांक
विजय चौधरी 79920 03/08/1958
मंजरी चौधरी 79968 26/10/1965
भव्या चौधरी 540190 11/10/1986
दिव्या चौधरी 3130651 06/11/1988
दिव्या चौधरी डायरेक्टर है....यहां..
जियो टेक्नोलोजिस प्रा.लि. 30 जून 2010 से
सिक्स्थ डाइमेंशन सिस्टम्स एंड सॉल्यूशन 15 नवंबर 2010 से
हिंदुस्तान पेटर ओटस प्रा.लि. 12 जनवरी 2011 से
रेयोकॉर्प फाइनेंशियल कं.प्रा.लि. 16 नवंबर 2011 से
रेयोकॉर्प इम्पेक्स एंड ट्रे.प्रा.लि. 16 नवंबर 2011 से
मंजरी वेल्यू इन्हांसिंग प्रा.लि. 26 अक्टूबर 2012 से
इंटेनशन्स एंड अटेंशन्स एच.आर. 20 अपै्रल 2013 से
भव्या चौधरी डायरेक्टर है
सिक्स्थ डायमेंशन सिस्टम एंड सॉल्यूशन 15 नवंबर 2010 से
जियो टेक्नोलॉजिस प्रा.लि. 30 जून 2010 से
मंजरी वेल्यू इन्हांसिंग इंटरप्राइजेस 26 अक्टूबर 2012 से
यह कंपनियां बनी 2010 के बाद...
मंजरी वेल्यू इन्हांसिंग इंटरप्राइजेस 26 अक्टूबर 2012
सिक्स्थ डायमेंशन सिस्टम एंड सॉल्यूशन 15 नवंबर 2010
रेयोकॉर्प फाइनेंशियल कं.प्रा.लि. 17 मार्च 2011
इंटेनशन्स एंड अटेंशन्स एच.आर. 20 अपै्रल 2013
रेयोकॉर्प इंपैक्स ट्रेडिंग कंपनी 15 मार्च 2011
ऐसे बढ़ी कार्रवाई चौधरी पर...
अपै्रल 2010 : बड़े डिफॉल्टर्स की सूची सार्वजनिक हुई।
सितंबर 2010 : आरबीआई ने मामला सीबीआई को सौंपा।
अक्टूबर 2010 : सीबीआई ने इन्वेस्टिगेशन शुरू की।
जनवरी 2011 : सीबीआई ने प्रकरण दर्ज किया।
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