Monday, June 8, 2015

सुप्रीम कोर्ट में फंसी सयाजी होटल की मनमानी मंजिलें

By Dabangdunia News Service | Publish Date: May 4 2015 3:00AM | Updated Date: May 4 2015 3:00AM
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विनोद शर्मा
 
 
इंदौर। क्लब की मेम्बरशिप से लेकर बिल्डिंग परमिशन देने वाले अफसरों के खिलाफ ट्रायल का आदेश देकर सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर की सयाजी होटल की नीव हिला दी है। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि होटल निर्माण के लिए हाईराइज कमेटी ने 1810.04 वर्गमीटर ग्राउंड कवरेज मंजूर किया था। इसे रिवाइज के नाम पर निगम ने 4759.11 वर्गमीटर कर दिया। अंतर है सीधे 3476.25 वर्गमीटर का। हाईराइज कमेटी के वजूद को नकारकर निगम के बिल्डिंग आॅफिसर ने न सिर्फ इसकी अनुमति दी बल्कि सातवें ही दिन पूर्णता प्रमाण-पत्र भी पकड़ा दिया।
 
 
ये हैं कमेटी में
संभागायुक्त की अध्यक्षता वाली हाईराइज कमेटी में कलेक्टर, एसपी, नगर निगम आयुक्त, अधीक्षण यंत्री आईडीए, अधीक्षण यंत्री पीडब्ल्यूडी, संभागीय अभियंता बिजली वितरण कंपनी और संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश शामिल रहते हैं।
 
 
ऐसे मिलती है मंजूरी 
फायर फाइटिंग, पानी, बिजली और सीवरेज की प्राथमिकता तय करते हुए कमेटी निर्माण की मंजूरी देती है। सयाजी होटल को ऐसी ही अनुमति 23 दिसंबर 1993 को जारी हुई थी। तकरीबन तीन लाख फीट में फैले प्लॉट पर मल्टी स्टोरी होटल और क्लब का 1810.04 वर्गमीटर (19483 वर्गफीट) निर्माण मंजूर हुआ।
 
 
ऐसा था कारनामा
11 महीने बाद (22 नवंबर 1994) को सयाजी प्रबंधन ने नवीनीकरण का आवेदन लगाया, जिसे निगम के भवन अधिकारी जीएस जादौन ने 12 जनवरी 1995 को बिना सक्षम स्वीकृति के ही मंजूर कर दिया।
 
 
सात दिन में ही बन गई बिल्डिंग
होटल सयाजी के लिए हाईराइज कमेटी ने सबसे पहला नक्शा 23 दिसंबर 1993 को मंजूर किया था। 22 नवंबर 1994 को नवीनीकरण के लिए निगम में लगाया गया। तब तक निर्माण हो रहा था। रिवाइज नक्शा मंजूर हुआ 12 जनवरी 1995 को। यानी आवेदन के 51वें दिन। कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया 19 जनवरी 1995 को। संशोधन के अनुसार निर्माण मूल मंजूरी के मुकाबले 262 प्रतिशत ज्यादा होना था। इससे साफ है कि होटल प्रबंधन ने वह निर्माण पहले ही कर लिया था, जिसकी मंजूरी उसे रिवाइज्ड प्लान में मिली।
 
 
फायर की भूमिका भी संदिग्ध
बिल्डिंग कम्प्लीट होने से पहले 18 अक्टूबर 1994 (यानी रिवाइज्ड प्लान के लिए आवेदन करने से महीनेभर पहले) फायर ने एनओसी दी। यानी फायर की एनओसी मूल निर्माण के लिए थी, जबकि 19 जनवरी 1995 को 267 प्रतिशत ज्यादा निर्माण हो चुका था। इसका फायर की फाइल में कोई जिक्र नहीं था। फिर भी फायर ने एनओसी रद्द करने में तीन साल (रद्द दिनांक 19 अक्टूबर 1997) लगा दिए। अतिरिक्त निर्माण के बावजूद फायर एनओसी रिवाइज्ड नहीं की 
गई।
 
 
एक नजर में सयाजी
मूल मंजूरी के अनुसार 1810.04 वर्गमीटर (19483 वर्गफीट)
संशोधन के बाद : 4759.11 वर्गमीटर (51226 वर्गफीट)
अंतर : 3476.25 वर्गमीटर
(37418 वर्गफीट)
संपत्ति कर : 5.45 लाख रुपए के संपत्ति कर को जादौन ने स्वयं और अपने परिवार के पांच सदस्यों को सयाजी क्लब की आजीवन सदस्यता लेकर माफ कर दिया।
 
 
सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं दी फाइल
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के पेरा नं. 10 में स्पष्ट कर दिया है कि संसोधन के नाम पर अधिकारियों ने मानदंडों के विपरीत अतिरिक्त निर्माण अनुमति दी। हमारे पास न तो सयाजी की मंजूरी के मूल दस्तावेज हैं और न ही रिवाइज्ड प्लान के। हमारे पास निर्माण की सीमित जानकारी उपलब्ध है।

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