Monday, June 8, 2015

ओंकारेश्वर बांध 191 मीटर तक भरने की तैयारी

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Apr 10 2015 3:02AM | Updated Date: Apr 10 2015 3:02AM
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विनोद शर्मा

इंदौर। बेमौसम बरसात के साथ हुई फसलों की भारी बर्बादी से पहले ही टूट चुके खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार के किसान कपास-मूंग की फसल के लिए आसमान ताक रहे हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन के तमाम विरोध के बीच अब तीनों जिले के लाखों किसान एक सुर में बहुउद्देश्यीय ओंकारेश्वर डेम के जल स्तर को बढ़ाने की मांग करने लगे हैं। किसानों की मांग पर गुरुवार को नर्मदानगर में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें बांध को एक बार फिर 191 मीटर तक भरने की तैयारी शुरू हो गई।
 
 
तकरीबन सात हजार करोड़ की लागत से बने ओंकारेश्वर बांध और उससे जुड़ी नहरें 2007-08 से शो-पीस की तरह किसानों का मुंह चिढ़ा रही हैं। न पर्याप्त पानी भरा गया। न ही नहरों को सही बहाव मिला। न खेतों तक पानी पहुंचा। कारण था नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) वालों का आंदोलन। जिसकी वजह से बांध भरने की क्षमता बढ़ाने की तैयारियां शुरू करके बार-बार बंद करना पड़ी। लगातार हुई अच्छी बरसात से किसानों को दिक्कत नहीं हुई। 2014-15 की अल्प वर्षा ने एनबीए का साथ देने वाले कई किसानों को बेकफुट पर ला दिया। अब वे एनवीडीए के साथ हो गए। 
 
 
ओंकारेश्वर बांध फायदे और भी...
कृषि उत्पादन में 1500 करोड़ की प्रतिवर्ष वृद्धि।
बहाव नहर से सिंचाई होने से बहुमूल्य विद्युत ऊर्जा की बचत।
मिगत जल स्तर में सुधार।
फल, फूल एवं सब्जियों के उत्पादन में अप्रत्याक्षित वृद्धि।
हर कमांड क्षेत्र के नदी नालों में पशुओं के लिये गर्मी में पेयजल उपलब्धता।
निमाड़ क्षेत्र के फसल चक्र में परिवर्तन।
र्याप्त चारा,पशुपालन उद्योग को प्रोत्साहन।
कृषि आधारित उद्योग धंधो में वृद्धि होने से जीवन स्तर में सुधार।
 
 
2.23 लाख एकड़ जमीन की बूझेगी प्यास  
तीनों केनाल का कमांड एरिया 1.715 लाख हेक्टेयर है। खण्डवा, खरगोन एवं धार जिलों के 678 ग्रामों के 146800 हेक्टेयर (362750 एकड़) क्षेत्र में सिंचाई होना है। 2 मीटर ज्यादा पानी भरने से इसमें से 90 हजार हेक्टेयर (2,23,394 एकड़) जमीन को सिंचाई के लिए पानी दिया जा सकेगा।

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