-विनोद शर्मा
इंदौर। जिन चार सहकारी साख संस्थाओं ने देशभर की को-आॅपरेटिव बैंकों को आयकर के दायरे में ला दिया, उनमें अब तक करीब 700 करोड़ का हिसाब अफसरों की पहुंच से दूर है। बताया जा रहा है कि यदि दावेदारों का अता-पता नहीं मिलता है तो पूरी रकम चार संस्थाओं के अध्यक्षों पर थोप दी जाएगी। यानी इस राशि पर बनने वाले 33 प्रतिशत आयकर (करीब 231 करोड़) की देनदारी इन अध्यक्षों के गले की फांस बनना तय है। डायरेक्टर जनरल इनकम टैक्स (डीजीआईटी) इन्वेस्टिगेशन ने सितंबरअक् टूबर 2014 में इंदौर की गुरुशरण सहकारी साख संस्था, कान्हा क्रेडिट को- आॅपरेटिव, धार की राजेंद्र सूरी सहकारी साख संस्था और उज्जैन की श्री वर्धमान साख सहकारी संस्था के खिलाफ छापेमार कार्रवाई करके 1000 करोड़ के बेहिसाबी लेनदेन का खुलासा किया था।
श्रीवर्धमान की रिपोर्ट सीबीडीटी तक जा चुकी है। राजेंद्र सूरी की रिपोर्ट भी तैयार है। रिपोर्ट के अनुसार राजेंद्र सूरी का 150 करोड़ का जो बेहिसाबी लेन-देन मिला था, आयकर की टीम इसमें से करीब 100 करोड़ का पता लगा चुकी है। 50 करोड़ का हिसाब बाकी है। इसी तरह श्रीवर्धमान में 300 करोड़ के बेहिसाबी लेनदेन में अब तक 120 करोड़ का हिसाब व्यापारियों से पूछताछ में मिल चुका है। 180 करोड़ अब भी बेहिसाब है।
श्री वर्धमान साख सह. संस्था :-
30 सितंबर को सर्वे। जांच में पता चला सोसायटी के माध्यम से करीब 300 करोड़ का लेन-देन हुआ है। सोसायटी के माध्यम से करीब 125 व्यापारी लेन-देन करते थे, जो कि मप्र, गुजरात अन्य राज्य के बताए जाते हैं।
30 सितंबर को सर्वे। जांच में पता चला सोसायटी के माध्यम से करीब 300 करोड़ का लेन-देन हुआ है। सोसायटी के माध्यम से करीब 125 व्यापारी लेन-देन करते थे, जो कि मप्र, गुजरात अन्य राज्य के बताए जाते हैं।
जांच रिपोर्ट में उजागर हुए खेल :-
काली कमाई को वैध करने के लिए नकद लेकर चेक और डीडी बनाना।
खातेदारों की संख्या में भारी अंतर।
आरबीआई की जानकारी के बिना बंैकिंग।
फर्जी चेक और डीडी बेचकर पैसा कमाना।
अन्य राज्यों की बैंकों से संबंध।
देशी हवाला का कारोबार।
फर्जी लोन के दस्तावेज बनाकर दिए।
काली कमाई को वैध करने के लिए नकद लेकर चेक और डीडी बनाना।
खातेदारों की संख्या में भारी अंतर।
आरबीआई की जानकारी के बिना बंैकिंग।
फर्जी चेक और डीडी बेचकर पैसा कमाना।
अन्य राज्यों की बैंकों से संबंध।
देशी हवाला का कारोबार।
फर्जी लोन के दस्तावेज बनाकर दिए।
500 सदस्यों को नोटिस :-
संस्थाओं से प्राप्त 500 से अधिक खातेदारों को नोटिस थमाकर इन चारों संस्थाओं में जमा राशि का हिसाब पूछा गया है। इनमें सबसे ज्यादा सदस्य धार की राजेंद्र सूरी में है। उधर, कई सदस्यों ने जमा राशि के हिसाब के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज भी आयकर को सौंप दिए हैं।
संस्थाओं से प्राप्त 500 से अधिक खातेदारों को नोटिस थमाकर इन चारों संस्थाओं में जमा राशि का हिसाब पूछा गया है। इनमें सबसे ज्यादा सदस्य धार की राजेंद्र सूरी में है। उधर, कई सदस्यों ने जमा राशि के हिसाब के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज भी आयकर को सौंप दिए हैं।
गुरुशरण और कान्हा :-
इंदौर में एक ही संचालक द्वारा संचालित गुरुशरण और कान्हा को-आॅपरेटिव बैंकों में 575 करोड़ का हिसाब मिला था। इसमें से आयकर विभाग की टीम अब तक 125 करोड़ से ज्यादा के हिसाब तक पहुंच चुकी है। 450 करोड़ अब भी विभाग की जद से दूर है। 80 फीसदी हिस्सा गुरुशरण का है, जबकि 20 प्रतिशत हिस्सा कान्हा का। इनकी रिपोर्ट भी अंतिम पढ़ाव पर है।
इंदौर में एक ही संचालक द्वारा संचालित गुरुशरण और कान्हा को-आॅपरेटिव बैंकों में 575 करोड़ का हिसाब मिला था। इसमें से आयकर विभाग की टीम अब तक 125 करोड़ से ज्यादा के हिसाब तक पहुंच चुकी है। 450 करोड़ अब भी विभाग की जद से दूर है। 80 फीसदी हिस्सा गुरुशरण का है, जबकि 20 प्रतिशत हिस्सा कान्हा का। इनकी रिपोर्ट भी अंतिम पढ़ाव पर है।
राजेंद्र सूरी साख सह. मर्या. :-
राजगढ़ में मुख्यालय। 31 अक्टूबर 2014 को हुआ सर्वे। 10 करोड़ का देसी हवाला मिला। 30 करोड़ के एफडीआर और कुछ खातों में 27 करोड़ रुपए जमा मिले। गुरुशरण में इसी संस्था का 150 करोड़ रुपया जमा मिला।
राजगढ़ में मुख्यालय। 31 अक्टूबर 2014 को हुआ सर्वे। 10 करोड़ का देसी हवाला मिला। 30 करोड़ के एफडीआर और कुछ खातों में 27 करोड़ रुपए जमा मिले। गुरुशरण में इसी संस्था का 150 करोड़ रुपया जमा मिला।
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