Monday, June 8, 2015

पाताल नापकर गंभीर से मिलेगी नर्मदा

विनोद शर्मा
 
इंदौर। गंभीर नदी से मिलकर उसकी झोली भरने से पहले नर्मदा को करीब 23 फीट (सात मीटर) की गहराई में ‘पाताल’ पथ से गुजरना होगा। तकरीबन 2100 करोड़ की नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के तहत नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) पाताल पथ के लिए पक्का मन बना चुका है। इससे 10 मेगावॉट तक बिजली बचेगी और बिजली बिल का खर्च भी 20-25 करोड़ तक कम होगा। परियोजना पर सर्वे के रूप में मैदान पर शुरू हो चुका है। सर्वे टीम को एक महीने में प्लान एनवीडीए को देना है। प्लान की फिजीबलिटी एनवीडीए की तकनीकी टीम तय करेगी। अधिकारियों का कहना है गंभीर से मिलने के लिए नर्मदा को पहाड़ों पर उतनी मेहनत नहीं करना पड़ेगी, जितनी शिप्रा मिलन में करना पड़ी थी। बड़वाह से चोरल तक परियोजना का रूट वही होगा, जो शिप्रा संगम के लिए था। चोरल घाट से लेकर आंबाचंदन गांव (सिमरोल-महू रोड स्थित) के बीच टनल बनाने की प्लानिंग है ताकि पानी को लिμट करने में आसानी रहे। अधिकारियों का कहना है टनल में विशेषज्ञता को देखते हुए ही नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी प्रा.लि. (एनईसीपीएल) को ठेका दिया है। कंपनी ने श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर काजीगुंड-बनीहाल के बीच दुर्गम पहाड़ी हिस्सों में नौ किलोमीटर लंबी टनल बनाई। 6.2 किलोमीटर की 12 टनल अलग बनाई। यह देश का सबसे सफल टनल प्रोजेक्ट रहा है।
 
 
22 फीट जमीन के नीचे बनेगी 11 फीट डाया की टनल
टनल की लंबाई कम से कम छह किलोमीटर और ज्यादा से ज्यादा चोरल से सीधे आंबाचंदन 17 किलोमीटर लंबी होगी। टनल का डाया 3.5 मीटर रहेगा यानी 11 फीट से ज्यादा। जितनी बड़ी टनल बनाना हो उससे दोगुना जमीन के नीचे खुदाई करना पड़ती है। मतलब यह कि यदि टनल का डाया (11 फीट का है तो उसकी खुदाई जमीनी सतह से 22 फीट नीचे करना पड़ेगी। एक साथ लंबी टनल तीन साल में बनाना संभव नहीं है। इसीलिए काम संभवत: 4-5 चरणों में एक साथ होगा ताकि टनल जल्दी बने।
 
 
ऐसे बनेगी टनल
पहाड़ों की अंदर-अंदर खुदाई हो, बाद में उन्हें सरिया-सीमेंट से पाइप जैसा रिंग आकार दिया जा सके।
निचले या सतही हिस्सों में खुदाई करके उसे चौतरफा कांक्रीट किया जा सके।
पहाड़ों के बीच खुदाई, कुछ पथरीला हिस्सा कच्चा भी रखा जा सकता है, ऊपरी सतह को कांक्रीट करके ताकि पत्थर न धंसें।
आंबाचंदन से दो किलोमीटर की दूरी से पहाड़ों की ओर एक छोटी नदी भी जो करीब 11 किलोमीटर चलकर चोरल में मिलती है। यह भी टनल के लिए रूट हो सकता है। इसी तरह आंबाचंदन से चोरल नदी भी 4 किलोमीटर दूर है। उस पर भी
बतौर रूट काम किया जा सकता है।

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