Monday, June 8, 2015

करुणासागर ने दबाया नाला, सरकारी जमीन

-विनोद शर्मा
इंदौर। फ्लैट के साथ लाखों की छूट...गाड़ी-घोड़ा, सोना-चांदी इनाम में लो। कनाड़िया गांव में बनी करुणा सागर टाउनशिप के इन लुभावनों वादों की हकीकत कुछ और ही है। निर्माण के लिए जो जगह घेरी है, उसमें नदी-नाले सब आ गए हैं। जिस दिन प्रशासन ने नपती कर ली, कई फ्लैट नाले में नजर आएंगे।
करुणासागर में कीमत को लेकर भी ग्राहकों को चकमा दिया जा रहा है। विज्ञापन में फ्लैट पर जो छूट बताई जा रही है, मूल कीमत से उसका कोई लेना-देना नहीं है, बस छूट के नाम पर ग्राहकों को घेरने की कोशिश होती है। क्षेत्र के पटवारी व आरआई गड़बड़ी से आंखें मूंदें हैं। नाले पर इतनी सफाई से कब्जा किया गया है कि एकबारगी लगता है यह टाउनशिप का ही हिस्सा है। नाला छुपाने के लिए स्लैब डालकर सड़क बना दी गई। कब्जों से परेशान पड़ोसी जमीन मालिकों ने शिकायत प्रशासन तक पहुंचाई, लेकिन वह भी नाले की तरह दबा दी गई।
हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रालि, प्रशांतसागर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्रालि और पार्श्वनाथ रीयल एस्टेट के बैनरतले बनाई जा रही हाईवे करुणासागर टाउनशिप का काम २०११ से चल रहा है। महासागर कॉरपोरेट, ज्ञान सागर, अवधूतसागर, क्षीरसागर, सागर अपार्टमेंट, सहजानंद सागर, सत्संगसागर, प्रेमसागर और प्रशांत सागर जैसी परियोजनाओं के लुभावने चित्रों से सजे चार पेजी ब्रोशर में सिंगल और डबल बीएचके के फ्लैट बेचे जा रहे हैं। इन फ्लैट्स की हकीकत यह है कि बिल्डर ने एक तो कनाड़िया रोड की तरफ सरकारी जमीन दबा दी है वहीं पीछे की तरफ नाले पर कब्जा कर लिया।
नाले की निकासी नहीं होने से पानी मल्टी एरिया में आ गया, जिससे मल्टीवाले परेशान हुए। वहीं पास बना सरदार रोलिंग वालों का फार्म हाउस भी तालाब बन गया।
जैसा चाहा घुमा दिया नाला
बायपास की तरफ से एक नाला बहकर आता है जो कनाड़िया रोड को क्रॉस करके, तीन बंगले और सरदार रोलिंग वालों के फार्म हाउस के बीच से होते हुए करुणासागर तक जाता है। सरदार रोलिंग वालों के बंगले तक नाला खुला है। इसके बाद करुणासागर की जहां से बाउंड्री शुरू होती है वहीं से नाला पाइप में घुसा दिया गया। बिल्डर ने 70 मीटर तक सीधे आरसीसी की छत के रूप में सड़क बनाकर नीचे नाले को संकरा करके दफन कर दिया। आगे जाकर 50 मीटर लंबे हिस्से को मोड़ दिया। अभी यहां करुणा वालों के सुरक्षाकर्मियों व मजदूरों के झोपड़े और सुविधाघर बने हुए हैं।
सर्विस टैक्स विभाग की आंखों में भी झोंक रहे धूल
१२ मई २०१२ को सर्विस टैक्स विभाग ने प्रशांत सागर समूह पर छापा मारा था। छापे के दौरान इसकी पुष्टि हो चुकी है कि कंपनी सर्विस टैक्स की चोरी कर रही है। प्रशांत सागर ग्रुप की मार्केटिंग का कामकाज पार्श्वनाथ रीयल इस्टेट के पास था। यह ब्रोकरेज की श्रेणी में आता है। दोनों ने अपने लेन-देन की पूरी जानकारी विभाग को नहीं दी। जबकि फर्म हर फ्लैट की कीमत पर ३.०९ सर्विस टैक्स और ५ प्रतिशत वैट वसूला जाता है। इन समूहों ने फ्लैट ३० से ४० लाख रुपए में बेचे लेकिन सर्विस टैक्स गाइड लाइन की दर १५-२० लाख रुपए पर ही चुकाया। निर्माण पर सर्विस टैक्स १ जुलाई २०१० के बाद से लागू हुआ है लेकिन उन्होंने कई मल्टियों को बैक डेट में ही पूरा होना बता दिया। सागर डेवलपर्स के मालिक प्रशांत-आनंद सागर, पार्श्वनाथ ग्रुप के मालिक प्रदीप जैन बताए जाते हैं।
सरकारी जमीन पर भी कब्जा
मास्टर प्लान में कनाड़िया रोड की चौड़ाई ३० मीटर से ज्यादा है। अभी सड़क की चौड़ाई बमुश्किल चार मीटर है। एक तरफ ग्रामीणों का कब्जा है तो दूसरी तरफ करुणासागर, गढ़ा गोल्फ क्लब और सरदार रोलिंग के संचालकों का। करुणासागर ने १० बाय ९० फीट लंबा कब्जा कर रखा है। इसकी शिकायत भी हो चुकी है। मल्टी के सामने किराने की दुकान चला रहे तेजसिंह ने बताया कि करुणासागर ने जिस जमीन पर बाउंड्रीवाल तानी है वह कांकड़ की है। पहले सामने मेरा घर था जिसे इन्होंने तोड़ दिया।
मुख्यमंत्री की धौंस देने आ गए
करुणासागर वालों ने पीछे स्लैब डालकर नाले को बंद कर दिया। मैंने पटवारी और आरआई को जानकारी निकालने के लिए कहा था। आगे कुछ हुआ नहीं। उलटा, मल्टी के संचालक मुझे मुख्यमंत्री की धौंस देने आ गए।
- कमलाबाई मालवीय, सरपंच

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