-विनोद शर्मा
इंदौर। जानकर आश्चर्य होगा कि विधायक रमेश मेंदोला उर्फ दादा को साल भर में जो कथित दान (चंदा) मिलता है वह राशि इंदौर के खजराना मंदिर और उज्जैन के महाकाल मंदिर को सालाना मिलने वाले दान से भी ज्यादा है। ये आंकड़ा मेंदोला के खिलाफ आयकर में हुई शिकायत के बाद साफ हुआ। दोनों मंदिरों की बैलेंसशीटें जो आंकड़े बताती हैं मेंदोला उतना तो एक-दो आयोजनों में ही खर्च कर देते हैं। उनकी दान की कमाई का बड़ा हिस्सा भजन-भंडारों, परिचय-विवाह सम्मेलन जैसे कामों पर खर्च हो रहा है तो बाकी राजनीति में उड़ जाता है।
दान है या मजबूरी
वैसे भगवान और दादा के दरबार में दान की परिभाषाएं अलग-अलग हैं। भगवान को लोग स्वेच्छा से दान देते हैं लेकिन मेंदोला के दरबार में आंकड़ा भी उनकी मर्जी का रहता है और भक्त भी। जिसे चाहें फोन कर उतना दान मंगवा लेते हैं जितना वे चाहें। दादा के पीड़ितों की मानें तो दस-बीस हजार का दान तो डपटकर वापस लौटा देतें हैं। हर साल एक जीरो बढ़ता जा रहा है। शहर में किसी उद्योगपति, व्यापारी, व्यवसायी, रियल एस्टेट कारोबारी के दिल पर हाथ रखो वो दादा का दानपीड़ित मिलेगा।
वैसे भगवान और दादा के दरबार में दान की परिभाषाएं अलग-अलग हैं। भगवान को लोग स्वेच्छा से दान देते हैं लेकिन मेंदोला के दरबार में आंकड़ा भी उनकी मर्जी का रहता है और भक्त भी। जिसे चाहें फोन कर उतना दान मंगवा लेते हैं जितना वे चाहें। दादा के पीड़ितों की मानें तो दस-बीस हजार का दान तो डपटकर वापस लौटा देतें हैं। हर साल एक जीरो बढ़ता जा रहा है। शहर में किसी उद्योगपति, व्यापारी, व्यवसायी, रियल एस्टेट कारोबारी के दिल पर हाथ रखो वो दादा का दानपीड़ित मिलेगा।
सालाना आय का आंकड़ा
खजराना मंदिर-२.५ से ३ करोड़
महाकाल-१२ करोड़
रणजीत हनुमान -६ से ७ लाख रुपए
गोपाल मंदिर-२.५ से ३ लाख
मल्हारी मार्तण्ड-१.२५ से १.५० लाख
नंदानगर सांई मंदिर- १२ से १५ लाख
गोम्मटगिरी-५० हजार
रमेश मेंदोला - २० करोड़
महाकाल-१२ करोड़
रणजीत हनुमान -६ से ७ लाख रुपए
गोपाल मंदिर-२.५ से ३ लाख
मल्हारी मार्तण्ड-१.२५ से १.५० लाख
नंदानगर सांई मंदिर- १२ से १५ लाख
गोम्मटगिरी-५० हजार
रमेश मेंदोला - २० करोड़
दान के बदले दादा करवाते हैं ये काम
जमीन-जायदाद के विवाद सुलझाए जाते हैं।
निगम, आईडीए और पीडब्ल्यूडी से ठेके दिलाए जाते हैं।
लंबित भुगतान कराए जाते हैं।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण बचाए जाते हैं।
जमीन-जायदाद के विवाद सुलझाए जाते हैं।
निगम, आईडीए और पीडब्ल्यूडी से ठेके दिलाए जाते हैं।
लंबित भुगतान कराए जाते हैं।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण बचाए जाते हैं।
कुछ उदाहरण
गोल स्कूल मैदान में चार हाईमास्ट लगे हैं। इनमें से दो कंपनी ने अपने खर्चे से लगाए। नौ लाख रुपए के ये हाईमास्ट दादा की मंशा के मुताबिक ठेकेदार कभी गोल स्कूल से निकालकर आईटीआई मैदान में लगा देता है, तो कभी गोल स्कूल ले आता है। इन्हें निकालने लगाने में कंपनी का लाख रुपया अब तक खर्च हो चुका है।
नागेंद्रसिंह ठाकुर, हेमंत यादव जैसे जमीन कारोबार से जुड़े कई लोग हैं जो एक-एक बार में दो से पांच लाख तक दान करते हैं। इनमें से कुछ रोटेशन प्रणाली से काम करते हैं।
दो साल पहले तक परदेशीपुरा चौराहे पर इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाले मन्ना चौकसे दादा का नाम सुनते ही कांप जाते हैं। इतना पैसा दे चुके हैं कि अब तो दादा के नाम सुनते ही छिप जाते हैं। डेढ़ साल से दादा की लिस्ट में उनका नाम नहीं है।
दादा के दत्तक भाई मुन्ना डॉक्टर भी दो साल पहले रोज-रोज के दान से हाथ जोड़ चुके थे। दोनों में जमकर कहासुनी हुई। दादा ने उसकी गाड़ियां लौटा दीं। अपने सभी चहेतों, अनुयायिओं और सरकारी गाड़ियों (नगर निगम आदि) को फरमान जारी कर दिया कोई भी मुन्ना के पंप से पेट्रोल-डीजल नहीं लेगा। इससे बिक्री घट गई। आखिर मुन्ना को दान देना कबूल करना पड़ा तब पंप से प्रतिबंध खुला।
नागेंद्रसिंह ठाकुर, हेमंत यादव जैसे जमीन कारोबार से जुड़े कई लोग हैं जो एक-एक बार में दो से पांच लाख तक दान करते हैं। इनमें से कुछ रोटेशन प्रणाली से काम करते हैं।
दो साल पहले तक परदेशीपुरा चौराहे पर इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाले मन्ना चौकसे दादा का नाम सुनते ही कांप जाते हैं। इतना पैसा दे चुके हैं कि अब तो दादा के नाम सुनते ही छिप जाते हैं। डेढ़ साल से दादा की लिस्ट में उनका नाम नहीं है।
दादा के दत्तक भाई मुन्ना डॉक्टर भी दो साल पहले रोज-रोज के दान से हाथ जोड़ चुके थे। दोनों में जमकर कहासुनी हुई। दादा ने उसकी गाड़ियां लौटा दीं। अपने सभी चहेतों, अनुयायिओं और सरकारी गाड़ियों (नगर निगम आदि) को फरमान जारी कर दिया कोई भी मुन्ना के पंप से पेट्रोल-डीजल नहीं लेगा। इससे बिक्री घट गई। आखिर मुन्ना को दान देना कबूल करना पड़ा तब पंप से प्रतिबंध खुला।
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