Monday, June 8, 2015

साहब, हमें विंग से मुक्ति दे दो...

विनोद शर्मा
इंदौर। श्रीमान्, हमें सिफारिश से नहीं बल्कि मेरिट के आधार पर एंटी इवेजन विंग की जिम्मेदारी मिली थी। विंग को मलाई का डिब्बा समझने वाले आला अधिकारियों को न हम समझ आए, न हमारा काम। हमारे काम में अडंगा ही उनकी ड्यूटी रह गया। हम शहर के टैक्स चोरों से लड़ सकते हैं, अपने विभाग के अफसरों से नहीं, इसीलिए आप से निवेदन है कि आप तो हमें एंटी इवेजन विंग की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दें। यह हाल है वाणिज्यिक कर की एंटी इवेजन विंग, इंदौर का। तबादले का काउंटडाउन शुरू होते ही जहां जाने के लिए अधिकारियों में मारामारी मची है, वहीं मौजूदा अफसर सालभर से आयुक्त से कुछ इसी अंदाज में विंग से मुक्ति की गुहार कर रहे हैं।
 
 
प्रभारी और उपायुक्त को कुर्सी से चिढ़
एंटी इवेजन विंग के अधिकारियों की अपनी कुर्सी से चिड़चिड़ाहट बढ़ी 2014 की शुरूआत में। दोनों ही विंग के प्रभारी और उपायुक्त अपनी कुर्सी बदलने की मांग कर चुके हैं। अधिकारी इसकी वजह फरवरी 2015 में रिटायर हुए विभागीय संचालक प्रवीण बागड़ीकर को बताते हैं। उनकी मानें तो तत्कालीन आयुक्त अमित राठौर के नजदीकी रहते बागड़ीकर ने विंग के लिए अपने चहेते अधिकारियों में चाह जगाई। अफसरों का आरोप है कि बागड़ीकर स्वयं हमारी शिकायत आयुक्त को करते और बाद में आयुक्त को लगातार शिकायत मिल रही है कहकर हम पर कार्रवाई के लिए दबाव बनवाते। उन्हें उम्मीद थी कि उनके प्रयासों से टीम बदलेगी, इसीलिए उन्होंने विंग में पद दिलाने के प्रस्ताव बनाकर भी भेजे। कहा कि नए लोगों को मौका मिलना चाहिए। ट्रांसफर पर लगी रोक के कारण वे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हुए। इसके बाद भी उनकी शिकायतों का सिलसिला जारी रहा।
 
 
टांग खिंचाई से खिन्न
टैक्स कलेक्शन का टारगेट, सर्च-सर्वे की टेंशन, मैदानी अमले की कमी और आला अफसरों द्वारा की जा रही टांग खिंचाई ने इतना खिन्न कर दिया था कि अंतत: विंग अधिकारियों ने ही कुर्सी से हाथ जोड़ लिए। उपायुक्त वी.एस.भदौरिया, श्री सोनवलकर, अलका डामोर व अन्य अधिकारी इस संबंध में आला अधिकारियों को चिट्ठी लिख चुके हैं।
 
 
जहां 15 अधिकारी रहते थे, वहां छोड़े तीन
विंग अधिकारियों ने तत्कालीन अफसरों पर यह भी आरोप लगाए थे कि जिस विंग में कभी 15-15 अधिकारी होते थे, वहीं षड्यंत्रपूर्वक तीन वर्षों में अधिकारी दिए गए तीन-चार। विंग ‘ए’ में भदौरिया के साथ तीन अन्य अधिकारी हैं। जिनमें दो महिलाएं हैं। अलका डामोर बीमारी का हवाला देते हुए विंग से मुक्ति का लिख चुकी है। वहीं दूसरी अधिकारी भी बीमार हैं। यही स्थिति विंग-बी की है, यहां तो विंग संभालने वाला ही
नहीं है। विंग में अमले की कमी से छापेमार कार्रवाइयों का ग्राफ घटा, वहीं मैदानी अमले को टैक्स चोरों की दादागीरी का सामना भी करना पड़ा। अलका डामोर ने जिनकी गाड़ी पकड़ी थी उन्हीं ने उनके साथ धक्कामुक्की की। गाड़ी की चाबी और मोबाइल ले गए।
 
 
हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था
विंग के अधिकारी विंग मुक्ति के लिए अपनी बात रखते हुए यह भी कह चुके हैं कि इंदौर जैसे शहर में टैक्स चोरों पर छापा मारना और टैक्स वसूलने से ज्यादा टेंशन दायक है अफसरों की आंखों की किरकिरी बने रहना। क्योंकि टैक्स चोरों से तो लड़ झगड़कर हम जैसे-तैसे टैक्स ले आएंगे लेकिन गलतियां निकालने के आदी हो चुके अफसरों के सवालों के जवाब देना भारी पड़ जाएगा।

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