खजाना खाली, खुद खौफ में खौफ दिखाने वाले अफसर
विनोद शर्मा इंदौर। आयकर, सेंट्रल एक्साइज और वाणिज्यिक कर...। आम आदमी, व्यापारी और उद्योगपतियों की नींद उड़ाने वाले इन विभागों की हालत इन दिनों पतली है। पतली हो भी क्यों न? टार्गेट के मुकाबले वसूली के लिए पूरी ताकत झोंकने के बावजूद तीनों विभाग वसूली से करीब 2000 करोड़ रुपए पीछे रह गए। अब दिक्कत है जवाब की, जो सीबीडीटी, सीबीईसी या फिर वित्त मंत्रालय को देना है।
31 मार्च बीतने के साथ ही वित्त वर्ष 2014-15 का लेखा-जोखा भी करीब- करीब बंद हो चुका है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय किए गए टारगेट को पूरा करने में आयकर, सेंट्रल एक्साइज और वाणिज्यिक किसी ने भी कसर नहीं छोड़ी। 31 मार्च को आयकर के कैश काउंटर रात 11 बजे तक चालू रहे। इसके अलावा नियमित काउंटर्स की संख्या अलग बढ़ा दी गई थी। इसके बावजूद इनकम टैक्स 2550 करोड़ के टारगेट से दूर रहा।
मंदी के कारण घटाया गया था टारगेट, फिर भी दूर
बताया जा रहा है कि इनकम टैक्स, वैल्थ टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स और टीडीएस सभी जगह विभाग की हालत खस्ता है। इसीलिए विभाग टारगेट से करीब-करीब 400 करोड़ रुपए तक दूर रह सकता है। हालांकि अंतिम आंकड़े 5 अपै्रल तक ही सामने आएंगे। आयकर की स्थिति देशभर में यही है। देश के लिए सीबीडीटी ने 7.36 लाख करोड़ का टार्गेट दिया था। जिसे मंदी देखते हुए घटाकर 7.06 करोड़ कर दिया था। 30 मार्च तक वसूली हुआ करीब-करीब 6.30 लाख करोड़। यानी एक लाख करोड़ अभी भी दूर।
वाणिज्यिक कर को 1000 करोड़ का फटका
वाणिज्यिक कर विभाग को 22770 करोड़ रुपए का टार्गेट मिला था। सालभर की छापेमार कार्रवाई और पेट्रोल-डीजल जैसी जरूरत पर वेट बढ़ाकर भी विभाग टारगेट तक नहीं पहुंच पाया। अधिकारिक सूत्रों की मानें तो तमाम कोशिशों के बावजूद वसूली का आंकड़ा 21700 करोड़ से ऊपर नहीं रहा। करीब 1000 करोड़ रुपए से पिछड़कर वाणिज्यिक कर विभाग ने वित्त मंत्रालय का गणित भी गड़बड़ा दिया है।
अस्सी प्रतिशत ही वसूला
कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एवं सर्विस टैक्स सेंट्रल बोर्ड आॅफ एक्साइज एंड कस्टम (सीबीईसी) ने आयुक्त कार्यालय, इंदौर और ग्वालियर को मिलाकर जो कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एवं सर्विस टैक्स वसूली टारगेट दिया था वह शत प्रतिशत नहीं रहा। करीब-करीब 80 प्रतिशत ही राशि वसूल हो पाई।
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