गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में दिल्ली से आगे इंदौर
विनोद शर्मा-
इंदौर। सड़क और पार्किंग जैसी बुनियादी सहूलियतों के संकट के बावजूद मप्र की व्यावसायिक राजधानी इंदौर आबादी के अनुपात में वाहनों की उपलब्धता के मामले में देश की राजधानी दिल्ली और मायानगरी मुंबई को भी पीछे छोड़ चुका है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा बीते दिनों जारी वार्षिक रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति हजार व्यक्ति वाहनों की उपलब्धता के मामले में चंडीगढ़ पहली पायदान पर है, जबकि इंदौर चौथी पर। दिल्ली नौवें क्रम पर है।
ऐसे हुआ खुलासा
मंत्रालय ने आंकड़ों का खुलासा ईअर बुक 2014 में किया। बुक में सड़क और वाहनों से संबंधित कई तरह के सर्वे हैं। इसी कड़ी में एक सर्वे रिपोर्ट 31 मार्च 2012 तक की भी शामिल है। रिपोर्ट में देश के प्रमुख 16 शहरों में आबादी के अनुपात में वाहनों की उपलब्धता का सर्वे किया गया था। इसके अनुसार प्रति 1000 व्यक्ति इंदौर में 617 वाहन पंजीबद्ध हैं। यहां 13 लाख वाहन पंजीबद्ध हैं। इनमें प्रति हजार व्यक्ति पर 70 कार-जीप पंजीबद्ध है, जबकि 471 दोपहिया वाहन हैं। इससे पहले जो रिपोर्ट आई थी, उसमें जिन 16 शहरों का सर्वे हुआ था उनमें कोयम्बटूर के बाद इंदौर दूसरे क्रम पर था।
हर दूसरे व्यक्ति के पास वाहन
इंदौर जिले की आबादी 35 लाख है और वाहन पंजीबद्ध हैं करीब 15 लाख। यानी करीब-करीब हर दूसरे व्यक्ति के पास वाहन है। सबसे ज्यादा वाहनों की उपलब्धता नगरीय क्षेत्र में है। हालात यह है कि शहर में वाहन ज्यादा हैं और रखने के लिए जगह कम। इसीलिए जाम लगता है।
लोक परिवहन ने प्रभावित नहीं किया 2005 में सिटी बस सेवा शुरू की गई थी। मकसद था इंदौर में पंजीबद्ध होने वाले वाहनों की संख्या में बेहिसाब बढ़ोतरी को रोकना। 10 साल हो चुके हैं पर वाहनों के पंजीयन का ग्राफ जरा भी प्रभावित नहीं हुआ। इसकी बड़ी वजह लोक परिवहन की खामियां और सफर में लगने वाले समय के साथ कई स्थानों तक लोक परिवहन की पहुंच न होना।
नौवें क्रम पर है दिल्ली
दिल्ली की आबादी 16.30 मिलियन है और वाहनों की 7.4 मिलियन। प्रति हजार व्यक्ति पर 451 वाहन हैं। इसमें से 286 दोपहिया वाहन हैं और 137 कार हंै। वाहनों की एकमुश्त संख्या के मामले में दिल्ली बाकी शहरों से आगे है, लेकिन आबादी अनुपात के लिहाज से दिल्ली से ज्यादा कारें चंडीगढ़ में है। दो पहिया इंदौर से भी कम है।
ऐसे हुआ खुलासा
मंत्रालय ने आंकड़ों का खुलासा ईअर बुक 2014 में किया। बुक में सड़क और वाहनों से संबंधित कई तरह के सर्वे हैं। इसी कड़ी में एक सर्वे रिपोर्ट 31 मार्च 2012 तक की भी शामिल है। रिपोर्ट में देश के प्रमुख 16 शहरों में आबादी के अनुपात में वाहनों की उपलब्धता का सर्वे किया गया था। इसके अनुसार प्रति 1000 व्यक्ति इंदौर में 617 वाहन पंजीबद्ध हैं। यहां 13 लाख वाहन पंजीबद्ध हैं। इनमें प्रति हजार व्यक्ति पर 70 कार-जीप पंजीबद्ध है, जबकि 471 दोपहिया वाहन हैं। इससे पहले जो रिपोर्ट आई थी, उसमें जिन 16 शहरों का सर्वे हुआ था उनमें कोयम्बटूर के बाद इंदौर दूसरे क्रम पर था।
हर दूसरे व्यक्ति के पास वाहन
इंदौर जिले की आबादी 35 लाख है और वाहन पंजीबद्ध हैं करीब 15 लाख। यानी करीब-करीब हर दूसरे व्यक्ति के पास वाहन है। सबसे ज्यादा वाहनों की उपलब्धता नगरीय क्षेत्र में है। हालात यह है कि शहर में वाहन ज्यादा हैं और रखने के लिए जगह कम। इसीलिए जाम लगता है।
लोक परिवहन ने प्रभावित नहीं किया 2005 में सिटी बस सेवा शुरू की गई थी। मकसद था इंदौर में पंजीबद्ध होने वाले वाहनों की संख्या में बेहिसाब बढ़ोतरी को रोकना। 10 साल हो चुके हैं पर वाहनों के पंजीयन का ग्राफ जरा भी प्रभावित नहीं हुआ। इसकी बड़ी वजह लोक परिवहन की खामियां और सफर में लगने वाले समय के साथ कई स्थानों तक लोक परिवहन की पहुंच न होना।
नौवें क्रम पर है दिल्ली
दिल्ली की आबादी 16.30 मिलियन है और वाहनों की 7.4 मिलियन। प्रति हजार व्यक्ति पर 451 वाहन हैं। इसमें से 286 दोपहिया वाहन हैं और 137 कार हंै। वाहनों की एकमुश्त संख्या के मामले में दिल्ली बाकी शहरों से आगे है, लेकिन आबादी अनुपात के लिहाज से दिल्ली से ज्यादा कारें चंडीगढ़ में है। दो पहिया इंदौर से भी कम है।
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