Wednesday, August 20, 2025

एमओएस हजम करके बुना 90 करोड़ के मुनाफे का सपना

तीन तरफा रोड पर झुल गया गिरीराज का ड्रीम 

इंदौर. नगर संवाददाता । 
इंदौर में अवैध इमारतें खड़ी करने के आदी हो चुके नीरज उर्फ निक्की नीमा की गिरीराज ड्रीम्स पर नगर निगम मेहरबान है। इसीलिए तो लगातार हो रही शिकायतों को नजरअंदाज करके बिल्डिंग को पोषित करने का पाप नगर निगम मुख्यालय में बैठे अफसर कर रहे हैं। दूसरी तरफ सरकारी संरक्षण से बेखौफ नीमा ने तीन तरफ जो सड़क है उससे सटाकर बिल्डिंग बना दी।  
  गिरीराज ड्रीम्स जिस प्लॉट पर बन रही है वह राजस्व रिकार्ड में प्रतिभा सिन्टेक्स लिमिटेड के डायरेक्टर शिवकुमार चौधरी व अन्य के नाम दर्ज है। 2 फरवरी 2024 को नगर निगम ने 16951.32 वर्गफीट के इस प्लॉट पर भवन अनुज्ञा (PMT/IND/0152/296/2024) जारी की थी। 1.3 फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) और 26.52 प्रतिशत के प्रस्तावित ग्राउंड कवरेज के साथ कुल 21949.44 वर्गफीट निर्माण की अनुमति दी गई थी। इसमें 3862.73 वर्गफीट निर्माण व्यावसायिक उपयोग के लिए होना है जबकि 18086.70 वर्गफीट निर्माण का उपयोग आवासीय होना है। 
 प्लॉट के बाकी हिस्से का एमओएस के रूप में होना था। सामने 25 फीट, पीछे 20 फीट, एक तरफ 20 फीट, दूसरी तरफ 20 फीट जमीन खूली छोड़ना थी ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक हित में हो सके। नीमा ने चारों तरफ कब्जा कर लिया। बिल्डिंग की प्लींथ तीन तरफ सड़कों से मिला दी वहीं पश्चिम की ओर बनी बिल्डिंग तरफ 5-6 फीट जमीन छोड़ी। ऐसा करके नीमा ने ग्राउंड कवरेज (प्लींथ) बढ़ा लिया ताकि उस पर मंजूरी से ढ़ाई-तीन गुना अधिक निर्माण करके मनमाना मुनाफा कमाया जा सके।  
निगाहें करोड़ों के मुनाफे पर
बिल्डिंग जहां है वहां बाजार मुल्य 15 हजार रुपए/वर्गफीट है। जिस ग्राउंड कवरेज के साथ बिल्डिंग बन रही है उसमें 81 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण होना है। जो मंजूरी से 59416.89 वर्गफीट अधिक है। मतलब करीब 90 करोड़ का मुनाफा। चूंकि मुनाफा बढ़ा है इसीलिए नीमा को रिस्क लेना परवर रहा है। उनका मानना है कि यदि बहुत ज्यादा विरोध हुआ और शिकायतें हुई भी तो 1-2 करोड़ रुपए बांटकर मामला रफा-दफा करा सकते हैं। बाकि मुनाफ तो होगा ही।  
शिकायतें होती रही, बिल्डिंग तनती रही
बिल्डिंग को लेकर लगातार शिकायतें होती रही है। कुछ समय तक नगर निगम ने काम भी रुकवाए रखा लेकिन बाद में ले-देकर काम शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि संघ से जुड़े पदाधिकारियों ने क्षेेत्र के पार्षद और विधायक तक को फोन करके बिल्डिंग-बिल्डर को संरक्षण देने की बात कही थी।

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