8.79 लाख वर्गफीट की अनुमति, निर्माण हुआ 17.13 लाख वर्गफीट
8.74 लाख वर्गफीट अतिरिक्त निर्माण करके निगम को दिया 12 करोड़ का फटका
अफसरों की जेब भरकर बिल्डरों ने पर्मिशन रख दी किनारे
इंदौर. विनोद शर्मा ।
अवैध निर्माण और निर्माणकर्ता को संरक्षण देना नगर निगम के अफसरों में पूराना रिवाज है। राजनीतिक संरक्षण का नाम देकर बिल्डिंगें कैसे बचाई जाए? इसमें उन्हें महारथ है। ऐसी ही शिकायतों को नजरअंदाज करके अफसर खुद तो फसते ही हैं लेकिन उनकी हरकते इंदौर से भोपाल तक में बैठे जनप्रतिनिधियों को भी उलझा देती है। इसका उदाहरण हैं पूर्व पार्षद परमानंद सिसोदिया की शिकायत। जिस पर बीओ-बीआई से लेकर संभागायुक्त तक महापौर से लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक के खिलाफ लोकायुक्त ने केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
सिसोदिया ने मई 2024 में लोकायुक्त को शिकायत की थी। शिकायत में उन्होंने शहर के विभिन्न जोन में बनी 67 इमारतों में हुए अवैध निर्माण की जानकारी दी है। आरोप है कि इन इमारतों को नगर निगम ने 8 लाख 39 हजार 134 वर्गफीट निर्माण की अनुमति दी थी। इसके विपरीत रोड सेटबैक, मार्जिनल ओपन स्पेस (एमओएस), फुटपाथ, पार्किंग की जमीन पर कब्जा करके करीब 17 लाख 13 हजार 216 वर्गफीट निर्माण किया गया है। जो मंजूर निर्माण से तकरीबन 8 लाख 74 हजार 082 वर्गफीट अधिक और अवैध है।
मतलब मंजूर निर्माण से औसतन 204 प्रतिशत अधिक निर्माण करके बिल्डरों ने न सिर्फ शहर में भविष्य के लिए पार्किंग-यातायात की समस्या को बढ़ाया है बल्कि 8.74 लाख वर्गफीट अतिरिक्त निर्माण करके नगर निगम को भी तकरीबन 12 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई है।
सिसोदिया बताते हैं कि जिस तरह नगर निगम ने संपत्ति कर और जल कर की जोनवार दरें बना रखी है। उसी तरह भवन अनुज्ञा का शुल्क भी तय है। ऐसे में यदि निर्माणकर्ता मंजूरी से 200 प्रतिशत अधिक और अवैध निर्माण करते हैं इसका है कि मनमानी पर आमादा बिल्डरों ने जानबुझकर अनुमति कम ली ताकि फीस कम चुकाना पड़े और निर्माण ज्यादा किया। इनकी साजिश से आर्थिक बोझ से दबी जा रही नगर निगम को 12 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
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शिकायत में इन बिल्डरों के नाम...
धर्मादेवी रियल एस्टेट : ये कंपनी डॉ. नरेश डोडेजा की है। लॉर्ड शिवा रेसीडेंसी, शिव नेस्ट, सेवक एवेन्यू, राज नेस्ट अपार्टमेंट जैसे आधा दर्जन प्रोजेक्ट पर काम किया है। इसमें 193091 वर्गफीट की अनुमति लेकर कुल 392031 वर्गफीट निर्माण किया है। मतलब 198940 वर्गफीट अधिक और अवैध निर्माण किया है।
विशाल बिल्डर : ये कंपनी भीषमलाल मदान की है। विशाल एमिनेंट, विशाल पैलेस, मानस एन्क्लेव, विशाल पैराडाइज, विशाल अरबन, ववियााल ग्रीन अपार्टमेंट जैसे 13 प्रोजेक्ट पर काम किया है। कर रहा है। कंपनी को कुल 247054 वर्गफीट निर्माण की मंजूरी दी। काम हुआ 485580 वर्गफीट निर्माण किया। जो 238526 वर्गफीट अधिक और अवैध है।
राजकुमार पिता जमनादास लालवानी : कंपनी स्नेहा रेसीडेंसी, स्नेहा कार्नर, सनव्यू रेसीडेंसी, स्टारलिंग टॉवर, स्नेहा प्लाजा, आकांक्षा ट्रेड हाउस जैसे 12 प्रोजेक्ट पर काम किया। कर रही है। कुल 223052 वर्गफीट की अनुमति ली थी लेकिन मौके पर 207918 वर्गफीट निर्माण अधिक और अवैध किया है।
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इन बिल्डरों के भी नाम है :- सत्यनारायण बाहेती (बड़ा सराफा), निलेश बाहेती (गाडराखेड़ी), सीमा अरविंद माहेश्वरी (वायएन रोड), महेश उमेश डेमला(मॉडल टाउन), वर्षा दिलीप गुरनानी (रूपरामनगर), शोभा ओमप्रकाश (वायएन रोड), महेंद्र सुरेंद्र सुराना (वायएन रोड)।
अफसरों का मिलाजुला खेल
अनुमति के बाद बिल्डिंग अनुमति के अनुसार ही बन रही है इसकी निगरानी रखने की जिम्मेदारी भवन निरीक्षक और भवन अधिकारी की है। जो हर जोन पर नियुक्त है। भवन निरीक्षक और भवन अधिकारी सही काम कर रहे हैं या नहीं? ये देखने का काम अपर आयुक्त और फिर आयुक्त है। चूंकि अधिकारी अवैध निर्माण और निर्माणकर्ता को यह कहकर संरक्षण देते हैं कि राजनीतिक दबाव आ गया था। कभी किसी विधायक का नाम गिना दिया तो कभी किसी मंत्री का नाम।
जैसे 16/2 साउथ तुकोगंज पर बन रहे आर.आर. बिजनेस पार्क में भवन अनुज्ञा नगर निगम द्वारा निरस्त किए जाने के बावजूद मौके पर काम चल रहा है। पर्दा डालकर। टीन शेड लगाकर। अब नगर निगम अफसरों के दिमाग में भर दिया गया है कि अब मार्केट में मंत्री विजयवर्गीय के करीबी भागीदार है इसीलिए काम को जारी रखा जाए। शिकायत में इसका भी जिक्र है।
इसीलिए विजयवर्गीय के खिलाफ भी दर्ज प्रकरण
चूंकि कैलाश विजयवर्गीय नगरीय प्रशासन मंत्री हैं और नगर निगम उनके ही मंत्रालय का हिस्सा है। नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर उन्हें सख्ती करना चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसीलिए अफसरों की मनमानी जारी रही। ऐसे में 11 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त ने जो प्रकरण (131/ई/2024) दर्ज किया है उसमें भी विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अन्य अधिकारी लिखा है।
कार्रवाई, भैया कोई सुनने को तैयार नहीं
भवन निर्माण की अनुमति और निगरानी को लेकर नगर निगम के पास अपना मैदानी सिस्टम है। इसके बाद भी बिल्डिंगें मनमानी बन रही है, मतलब सिस्टम सेट है। पहली बात तो यह कि जब आपके पास दी गई अनुमति है और मौके पर बन रहा है वो आपको भी दिख रहा है फिर शिकायत का इंतजार क्यों होता है। मैंने बीओ-बीआई, अपर आयुक्त, आयुक्त, कलेक्टर, संभागायुक्त सबको शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कार्रवाई तो दूर की बात है। कार्रवाई वहीं होती है जहां मामला सेट नहीं होता। जहां
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