पैकेज लेकर दी जा रही है राहत, छोड़ा साेना, नकद भी नजरअंदाज
इंदौर. विनोद शर्मा ।
अपनी छापेमार कार्रवाइयों से कारोबारियों की नींद उड़ाने वाली इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग में इन दिनों कुछ तो ऐसा हो रहा है जो अब तक नहीं हुआ। अफसरों के बीच आपसी समन्वय नहीं है। न ही मैदानी अमला सीनियर्स के फैसले से सहमत है। इसकी वजह है पिछले महीने धार में हुई छापेमार कार्रवाई। जो एक आला अधिकारी की व्यक्तिगत रूचि के चलते मैनेज होती नजर आ रही है।
दिसंबर के महीने में इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने सलाउद्दीन शेख, राजेश शर्मा, आसिफ शेख, पंकज शर्मा, अमित शर्मा, पंकज जैन के साथ ही सावन पहाड़िया के ठिकानों पर दबिश दी थी। इनकम टैक्स का दस्ता कार्रवाई की सफलता को लेकर आश्वस्त तो था ही लेकिन जिस कदर की टैक्स चोरी सामने आई उसने अफसरों को हैरान कर कर दिया। सूत्रों की मानें तो मामला 500 करोड़ के इर्द-गिर्द पहुंच गया।
एक तरफ तकरीबन 52 ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई चल रही थी तो दूसरी तरफ विंग के एक अधिकारी स्कीम-140 स्थित एक बार में शराब की बाेतलें खाली कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने पैसा देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्होंने आज बड़े-बड़े लोगों पर छापेमार कार्रवाई की है। पंगा लोगे तो तुम भी नहीं बचोगे। हंगामा मचाने के बाद वे इनोवा मेें बैठकर निकल गए। जो कि मां सरस्वती ट्रेवल्स से छापे के लिए हायर की थी। अधिकारी का वहां बाटा अपना नंबर और ट्रू कॉलर पर उनकी पुरानी तस्वीर कई दिन तक वायरल होती रही। वीडियो फुटेज भी सामने आए लेकिन उन्हें साहब के दूसरे दिन होश में आने के बाद मामला दबा दिया गया। हालांकि पूरे विभाग को इस बारे में पता है। ऐसी स्थिति में अधिकारी 'मैं नहीं था' कहकर विभाग के हम नाम कर्मचारी का नाम बता देता है। बताया जा रहा है छापे के दिन पब में साहब की इंट्री जांच के दायरे में है।
इसके बाद विभागीय छापा पीड़ितों ने अधिकारियों की दलाली करने वाले एक सीए की शरण ली। जिसने अधिकारियों से कहकर तीन किलोग्राम से अधिक सोना और बड़ी तादाद में नकद को नजरअंदाज करवाया। सोना संजय नाम के व्यक्ति का था। जबकि नकदी सावन पहाड़िया की थी। जिसकी मोटी फीस मिली लेकिन ये रकम किसी एक अधिकारी के पास गई। जिससे नीचे के दूसरे अधिकारी नाराज हो गए। जिस आदमी का सोना छोड़ा उसके बैंक अकाउंट खुलवाने की बात आई तो नीचले अधिकारियों ने यह कहकर भगा दिया कि जिनसे तुम्हारी बात हो चुकी है उन्हीं के पास जाओ। हम भी देखते हैं वे तुम्हारी मदद कैसे करते हैं।
सीबीआई को शिकायत
अरसे बाद यह ऐसा हुआ है कि किसी रेड के दौरान अधिकारी दो धड़े में बंट गए। एक धड़ा सेटलमेंट करके काले कुबेरों को राहत देना चाहता है तो दूसरा सख्त कार्रवाई का पक्षधर है। बहरहाल, मामले में सीबीआई तक शिकायत पहुंची है। जिस तरह से 2012 में रूचि सोया पर इनकम टैक्स की छापेमार कार्रवाई हुई और उसके आठ दिन बाद सीबीआई ने रेड करके एक सीए की गाड़ी से लाखों रुपया बरामद किया था जो कि चीफ कमिश्नर तक पहुंचाने के लिए लाया गया था। इसी तरह इस बार भी सीबीआई बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
No comments:
Post a Comment