अपने ही शहर में अकेले पड़े विजयवर्गीय
तिखी कलम
विनोद शर्मा
इंदौर में भाजपा के नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष की लिस्ट आज शाम तक आ जाएगी...। पिछले तीन दिन से यह बात सुनी और पढ़ी जा रही है...। लिस्ट है कि जारी नहीं हो रही..। वजह है स्वयं मंत्री और मालवा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय..। जिन्हें अपनी पसंद का जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष बनाने में इस बार उनके ही सहयोगी नेताओं ने जोर कर दिए हैं...। दूसरे शब्दों में ये भी कहा जा सकता है कि नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष की लड़ाई में वे अकेले पड़ गए हैं..। हालांकि अपनी आदत के अनुसार विजयवर्गीय आखिर तक हार नहीं मानने को तैयार नहीं है..। जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष का चयन उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है..।
62 में से 56 जिलों के नगर व जिलाध्यक्षों की घोषणा पार्टी कर चुकी है। इंदौर नगर-जिला अध्यक्ष सहित चार जिलों का फैसला और होना है। 2023 के विधानसभा चुनाव में स्वयं को राष्ट्रीय स्तर का नेता बताकर विजयवर्गीय ने प्रदेश की राजनीति में वापसी की थी। इसमें कोई संदेह नहीं कि मालवा-निमाड़ में उनके कद का कोई दूसरा नेता नहीं है। चिंटू वर्मा को जिलाध्यक्ष बनाने के साथ ही संजय शुक्ला और विशाल पटेल जैसे कांग्रेस नेताओं को तोड़कर वे ये साबित भी कर चुके हैं।
सियासत में समय बदलते देर नहीं लगती। शायद यही वजह है कि 12.40 लाख पौधे रोपकर देश-दुनिया में छाए विजयवर्गीय चिंटू को दोबारा जिलाध्यक्ष बनाने और नगर में अपनी पसंद का अध्यक्ष बनाने के लिए पसीना बहा रहे हैं। इसी को लेकर विजयवर्गीय और सिंधिया गुट के मंत्री तुलसीराम सिलावट के बीच भी ठनी हुई है। सिलावट ने अंतर दयाल जैसे मैदानी कार्यकर्ता का नाम आगे बढ़ाकर चिंटू के साथ ही विजयवर्गीय की मुश्किल भी बढ़ा दी।
जुबान ने बिगाड़ा खेल...
इंदौर के सियासी समीक्षकों की मानें तो विजयवर्गीय बढ़बोलेपन में विवादित बयान देने में माहिर है। फिर भले चुनाव के दौरान देपालपुर विधायक मनोज पटेल के बारे में कुछ भला-बूरा कहना हो या फिर विधायक उषा ठाकुर को। उनके कारिंदे इस मामले में और उनसे दो कदम आगे हैं। जिन्होंने डॉ.मोहन यादव के सीएम बनने के बाद शहर में चिंटू ने ऐसे कटाउट लगा दिए थे जिनमें यादव को विजयवर्गीय ने एक बांह में ऐसे भर रखा है। जैसे कोई कार्यकर्ता हो। इससे खफा होकर सीएम ने 24 घंटे में सभी कटाउट हटवा दिए थे। बात ये भी हुई कि यादव का टिकट बॉस ने ही फाइनल करवाया है। इन्हीं बातों से सीएम से विजयवर्गीय की बात बिगड़ी।
कांग्रेसी सीखाएंगे कैसे चलेगी बीजेपी
चर्चा में एक बात और है। जिसकी कहीं पुष्टी तो नहीं है लेकिन आग की तरह फैली हुई है। बात यह है कि जब चिंटू वर्मा की दावेदारी का मंत्री तुलसीराम सिलावट ने विरोध किया तो विजयवर्गीय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कह दिया कि अब कल के आए कांग्रेसी हमें सीखाएंगे कि बीजेपी में जिलाध्यक्ष कौन बनेगा? ये बात न सिर्फ सिलावट बल्कि सिंधिया तक पहुंची। सिंधिया से सीएम व पीएम तक। भाजपा पार्षद कमलेश कालरा और जीतू यादव विवाद ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी।
अकेले खड़े हैं कैलाश...
नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को लेकर जारी तनातनी में अभी की स्थिति में विजयवर्गीय अकेले खड़े हैं। मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक मनोज पटेल, उषा ठाकुर, मालिनी गौड़ और गोलू शुक्ला की राय उनसे मेल नहीं खाती। ऊपर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर जिले के प्रभार के साथ वीटो पॉवर भी अपने पास रख लिए हैं। ये तो तय है कि विजयवर्गीय की पसंद से दोनों नाम तो तय नहीं होंगे। हुआ भी तो कोई एक। चिंटू से मोह छोड़े या फिर टीनू जैन से।
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