दो-दो साल की सजा, पांच-पांच हजार का अर्थदंड
विशेष अदालत ने 27 साल बाद सुनाया फैसला
इंदौर. विनोद शर्मा ।
तीन हजार किलो से ज्यादा विदेशी चांदी की तस्करी के मामले में विशेष न्यायालय (सीबीआई एवं आर्थिक अपराध) ने 27 साल बाद फैसला दिया है। कोर्ट ने 14 में से 9 लोगों को तस्करी के साथ ही टैक्स चोरी का दोषी माना। सभी दोषियों को 2-2 साल की सश्रम कैद और 5-5 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई एवं आथिर्क अपराध) जय कुमार जैन ने 1997 में सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम विभाग के सहायक आयुक्त (प्रिवेंटिव) द्वारा दायर परिवाद की सुनवाई के बाद मंगलवार को फैसला दिया। तेली बाखल निवासी ओमप्रकाश नीमा, शिक्षकनगर निवासी नितिन कुमार सोनी, शिक्षकनगर निवासी अमन सोनी, उषानगर निवासी सुरेश (सूरज) कतलाना, गणेशनगर निवासी दिनेश कतलाना और मंदसौर निवासी अमरलाल पिता कन्हैयालाल, आगरा निवासी मधुसूदन मिश्रा, फिरोजाबाद निवासी शशीपाल मिश्रा, कोलकाता निवासी अमरीक सिंह को सीमाशुल्क अधिनियम 1962 की धारा 135 के तहत दोषी माना गया। इन्हें दो-दो के कारावास और 5-5 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा दी गई। अर्थदंड न चुकाने पर दो महीने अतिरिक्त कारावास में रहना होगा।
कोर्ट ने कहा कि मामले का फैसला होने में 27 साल लग गए हैं। आज की स्थिति में सभी आरोपी तकरीबन 55 से 65 साल के हो चुके हैं। इसीलिए इन्हें तीन साल की न्यूनतम सजा में से कम सजा दी जा रही है।
आधी रात को दी थी दबिश
आदेश के अनुसार मामला 27 फरवरी 1992 का है। जब रात 2 बजे केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क के अधिकारियों ने मुखबिर की सूचना पर 42ए और 43 सी सेक्टर ई सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में दबिश दी थी। कार्रवाई के दौरान विदेश मार्का वाली चांदी बड़ी मात्रा में लाई गई थी। तलाशी के दौरान परिसर में खड़े एक ट्रक (ओआर-04-3735) में तीन व्यक्ति (अमरीक सिंह उर्फ सतनाम सिंह, कलविंदर सिंह व रामसिंह) बैठे मिले। अमरीक ने स्वयं को ट्रक मालिक बताया। कलविंदर ने खालसी और रामसिंह ने ड्राइवर होना बताया। अमन सोनी और शशीपाल मिश्रा चांदी के पाट उतार रहे थे। परिसर के पीछे की तरफ एक शेड में कच्ची जमीन पर एक गड्ढा था। जहां ओमप्रकाश नीमा खड़ा था। चांदी ट्रक के पिछले हिस्से में कृत्रिम दीवार खड़ी करके उसकी आड़ में रखी गई थी।
भट्टी में पाट गलाकर ईंट बनाते थे
कार्रवाई के दौरान ट्रक से 9 चांदी के पाट मिले। गड्ढे से 71 पाट मिले। भट्टी के पास से 6 पाट मिले। वहां मधुसूदन और सुरेशचंद्र थे। गलाई भट्टी में दो तौल कांटे, चांदी के चौरसे बनाने के 100 सांचे, ग्रेल करल के कपड़ों की थैलियां, संडासी, हथौड़ी व अन्य औजार मिले। थैलियां चांदी के चौरसे भरने के काम आती थी।
चांदी जब्त, कारखाना सील
कंपनी नितिन सोनी की थी, उसने कहा काम नीमा करता है। जांच के दौरान मौके पर मारूती वैन से चार व्यक्ति कृष्ण गोपाल, अमरलाल, महेंद्र नीमा और दिनेश कतलाना बैठे मिले। दूसरी वैन में सूरज कतलाना, दीदार सिंह, हरदयाल सिंह थे। बाद में चांदी राजसात कर ली गई। वाहन व अन्य संसाधन जब्त करके कारखाना सील कर दिया गया था।
कहां से कितनी चांदी मिली थी
कहां से बरामद पाट किलोग्राम
ट्रक से 9 304.795
गड्ढे से 71 2396.729
भट्टी के बाहर से 4 134.611
भट्टी में से 6 205.351
कुल 90 3041.496
तब 2 करोड़ की थी, आज 29 करोड़ की चांदी
तब चांदी की कीमत 8100 रुपए/किलोग्राम थी। उस हिसाब से 3041.493 किलोग्राम चांदी की कीमत 2 करोड़ 46 लाख 36 हजार 093 आंकी गई। अभी इसी चांदी की कीमत 28 करोड़ 89 लाख 42 हजार 120 की होती है।
बोट के जरिए आई थी चांदी
पूछताछ के बाद पता चला कि 22 फरवरी 1992 को हल्दिया से करीब 50 किलोमीटर दूर समुद्र के किनारे से एक बोट में से ये 90 पाट उतारकर इंदौर लाए गए थे। ट्रक 26 फरवरी 1992 को देवास नाका पहुंचा था। बाद में खालसी को एक आदमी सांवेर रोड स्थित कारखाने में ले गया था।
सरकारी टकसाल भेजे 88 पाट
जब्त की गए 90 पाट में से 2 करोड़ 40 लाख 98 हजार 845 रुपए की 2975.166 किलोग्राम (88 पाट) सरकारी टकसाल भेज दिए गए। 66.623 किलोग्राम के दो पाट नमूने के लिए रख लिए गए।
No comments:
Post a Comment