भ्रष्ट खा रहे हैं महाकाल में मलाई
मंदिर समिति का पूर्व पदाधिकारी दीपक मित्तल भी आरोपी, फरार
तीन पत्रकारों के नाम सामने आए, एक गिरफ्तार
उज्जैन. विनोद शर्मा ।
महाकाल मंदिर को पंडे, पुजारियों, सफाईकर्मियों से लेकर मीडियाकर्मियों तक ने कैसे कमाई का अड्डा बना दिया था? इसका खुलासा रिमांड के दौरान आरोपियों द्वारा लगातार किया जा रहा है। इस कडी में एक बडा नाम जुडा है दीपक िमत्तल का। जो कि कांग्रेस नेता हैं और कमलनाथ की 15 महीने की सरकार में ही उन्हें पूर्व विधायक बटूक शंकर की अनुसंशा पर मंदिर समिति की सदस्यता मिली थी।
महाकाल मंदिर में हुए भ्रष्टाचार की सूची लंबी होती जा रही है। अब मंदिर समिति के पूर्व सदस्य दीपक मित्तल की कारगुजारियां सामने आई है। एफआईआर में नाम आने के बाद सवे ही दीपक फरार है। 2018 से फरवरी 2020 के बीच कांग्रेस सरकार अस्तित्व में आई थी। इसी दौरान मित्तल मंदिर से जुड़ा। तीन साल पूरे होने के बाद मित्तल को हटा दिया गया था लेकिन जब तक समिति में रहे तूती बोलती रही। सवाल चर्चा में है कि मित्तल का नाम किसने बताया? महाकाल पुलिस के अनुसार मित्तल के खाते में लाखों का ट्रांजेक्शन सामने आया है। लिहाजा उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
मामले में तीन पत्रकारों के नाम भी सामने आए हैं जो महाकाल दर्शन के एवज में लोगों से पैसा एंठते थे। इनमें पंकज शर्मा और विजेंद्र यादव के साथ तीसरा नाम भी शामिल है। जिसका खुलासा अभी नहीं हुआ है।
लगातार बढ़ रही है आरोपियों की फेहरिस्त
पिछले दिनों कलेक्टर नीरज सिंह ने मंदिर परिसर का औचक निरीक्षण किया। सुबह-सुबह नंदी हॉल में भक्तों की भीड़ दिखी। पूछताछ में पता चला उन्हें पैसा लेकर नंदी हॉल तक लाया गया है। इसके बाद 6600 रुपए देकर दर्शन करने आए श्रृद्धालुओं के माध्यम से केस दर्ज कराया गया था। केस में पूछताछ और मोबाइल डिटेल के आधार पर लगातार आरोपियों की संख्या बढ़ती जा रही है। सूची में अब 17 नाम जुड़ चुके हैं।
इनकी रेट लिस्ट
मंदिर परिसर में वीआईपी इंट्री : 500 रुपए/व्यक्ति
नंदी हॉल में बैठाना : 1000 रुपए/व्यक्ति
भस्म आरती के दर्शन : 1500 रुपए/व्यक्ति
गर्भगृह में दर्शन : 2500 रुपए/व्यक्ति
कमाई का खेल....
महाकाल मंदिर समिति में काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वा 8 हजार से लेकर 50 हजार रुपए तक है। वहीं दिनभर में 12-15 लोगों को मंदिर में वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाकर ये लोग 15000 से लेकर 30000 रुपए रोज तक कमा लेते हैं। ज्यादातर खेल भस्मआरती में होता है।
रोजाना 5 लाख रुपए से ज्यादा का खेल....
भक्ताें की भीड़ को भ्रष्टाचारी भूना रहे हैं। लोग कम समय में दर्शन करने के लिए पैसे देते हैं। ताकि सहुलियत और करीब से दर्शन हो जाए। एक-एक दलाल दिनभर में ऐसे 10 से 12 दर्शनार्थी पकड़ता है। यदि 1000 रुपए औसत भी मानें तो 10 से 12 हजार रुपए/रोज की कमाई होती है। अब तक 17 नाम सानमे आए हैं जबकि सूत्रों की मानें तो पंडे-पूजारी सहित ऐसे 50 लोग हैं। जो दिनभर में 6 लाख से ज्यादा का खेल करते हैं।
चौकी की बंधी भी तय है...
महाकाल थाने की एक चौकी महाकाल परिसर में ही है। हैरानी की बात यह है कि पैसा लेकर दर्शन कराने के मामले में 17 आरोपियों पर कार्रवाई होने के बावजूद चौकी पर तैनात एक पुलिसकर्मी का नाम इस मामले में सामने नहीं आया। जबकि पुलसकर्मी भी इन दलालों से मिले हुए थे। किसी से प्रति व्यक्ति 150 रुपए मिलते थे, तो किसी से 300 रुपए तक।
ऐसे जुड़ते गए नाम....
नितेश फरार था। जिसे पुलिस ने पकड़ा। रिमांड के दौरान उसने पत्रकारों पंकज शर्मा और विजेंद्र यादव सहित मेवाड़ा के नाम लिए। क्रिस्टल कंपनी के सुपरवाइजर करण राठौर और मंदिर समिति के उमेश पंड्या को कोर्ट में पेश किया। पत्रकारों में पंकज शर्मा ही पकड़ाया, बाकि फरार है। तीसरे पत्रकार की पहचान मेवाड़ा के रूप में हुई है। जो दिनभर मंदिर में ही रहता था। इसे पहले भी ब्लैकलिस्टेड करके मंदिर परिसर में इसके प्रवेश पर रोक लगा दी थी।
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