Thursday, August 21, 2025

कलेक्टर ने फोड़ा बम...नौ दशक का होप ध्वस्त*

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*1000 करोड़ की 22.24 एकड़ जमीन सरकारी, कब्जा लिया* 
सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने का कलेक्टर आशीष सिंह का अभियान जारी है। इस कड़ी में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने होप टेक्सटाइल की 86 साल पुरानी लीज निरस्त कर दी। सीमांकन कराकर तकरीबन 22 एकड़ जमीन का कब्जा ले लिया, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत 1000 करोड़ से ज्यादा है। भाजपा के आयातित नेता अक्षय बम के कब्जे में रही यह जमीन जिला कोर्ट के पीछे है। 
  पिछले दिनों जमीन को लेकर प्रशासन ने नोटिस जारी किए थे, लेकिन प्रबंधन की तरफ से जवाब में कहा गया कि जमीन की लीज शासन द्वारा दी गई है। लीजधारक शासकीय पट्टेदार की श्रेणी में है, इस कारण उसके खिलाफ सुनवाई का अधिकार शासन या कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण बुधवार को कलेक्टर ने सर्वे नंबर 282/2 की 22 एकड़ जमीन की लीज निरस्त कर दी। अपने आदेश में कलेक्टर ने पूर्व में इस तरह के मामले में हुई कोर्ट निर्णय का हवाला भी दिया गया।   
99 साल की लीज पर मिली थी जमीन 
सितंबर 1939 में नंदलाल एंड भंडारी संस को सर्वे नंबर 148, 151/1654, 148/1653 की 3.18 एकड़ और सर्वे नंबर 282/2 की 22.24 एकड़ जमीन इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए दी गई। जमीन 99 साल की लीज पर पांच लाख रुपए में दी गई। पांच लाख की राशि 50-50 हजार की किश्तों में चुकाई जाएगी और साथ ही 6 हजार रुपए/साल किराया होगा। 1967 में सरकार के आदेश पर जमीन की सब लीज हुई। संकट के दौरान सरकार ने मजदूरों के हित में 1.35 करोड़ की गारंटी दी। बदले में जमीन का एक हिस्सा शासन में समाहित कर दिया। तय हुआ 8.24 एकड़ पर जो होप मिल है, वह चलती रहेगी। बाकि 14 एकड़ जमीन में से 2.60 एकड़ सड़क में जाएगी। बची 11.37 एकड़ में से 6.8 एकड़ सरकार के पास रहेगी। 4.5 एकड़ का व्यावसायिक-आवासीय उपयोग होगा। जो पैसा मिलेगा उससे मजदूरों का बकाया भुगतान होगा।
10.2 एकड़ पर न्यू सियागंज डेवलप करके बेच दिया
2012 में जिला प्रशासन को शिकायत मिली। बताया गया कि बम परिवार ने मनमाने तरीके से न्यू सियागंज बनाकर आधी जमीन बेच दी। पूर्व कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने जांच कराई। पता चला 4.5 एकड़ की व्यावसायिक-आवासीय अनुमति के विपरीत 10.2 एकड़ जमीन पर न्यू सियागंज डेवलप करके बेच दिया। अब 12 एकड़ जमीन ही खाली है। बम ने अपने जवाब में बताया कि 1996 के आदेश से पूरी जमीन मिल गई थी। न्यू सियागंज डेवलप करके मजदूरों की 14.25 करोड़ की देनदारी खत्म की। कलेक्टर कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई और इसे लीज शर्तों का उल्लंघन माना। 
2012 में ही सरकारी हो गई थी जमीन 
2012 में कलेक्टर ने जमीन सरकारी घोषित की थी। बम कोर्ट चले गए। 
अप्रैल 2025 को कोर्ट ने कलेक्टर के आदेश को रद्द किया। कहा विधिवत सुनवाई नहीं हुई, फिर से सुने। 
कलेक्टर आशीष सिंह ने दो बार बम को नोटिस जारी किया। बम ने मामला कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से बाहर का है। 
20 अगस्त को कलेक्टर ने लीज निरस्त कर दी। उसी आदेश पर एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी ने जमीन का कब्जा लिया।

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