Thursday, August 21, 2025

बहू की फर्जी साइन करके करवाता रहा काम, झूठा शपथ-पत्र देकर बना पार्षद


सामने आने लगे जीतू देवतवार(जाटव) के झूठ दर झूठ
11 अपराध दर्ज है, शपथ-पत्र में बताए दो
परिषद की बैठकों में एक साल भी नहीं आई थी पूर्व पार्षद प्रिया यादव
इंदौर. विनोद शर्मा ।
भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर गुंडे भेजने वाले पार्षद जीतू जाटव (देवतवार) बड़े जादूगर निकले। उनके खिलाफ 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं लेकिन नामांकन में शपथ-पत्र देकर बताए सिर्फ दो मामले। इतना ही नहीं पिछली बार छोटे भाई की पत्नी प्रिया यादव को पार्षद बनाया था लेकिन पूरी पार्षदी जीतू जाटव ने की। प्रिया ने कुछ समय बाद ही जाटव परिवार और निगम से नाता तोड़ दिया था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है 2015 से 2022 तक प्रिया यादव के साइन किसने किए। 
 प्रिया यादव ने कांग्रेस की उम्मीद्वार कुसुम मरमट को हराया था। इसके बाद मरमट ने प्रिया के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती दी थी। मरमट का आरोप था कि संविधान के अनुसार जाति का निर्धारण जन्म के समय से होता है। इस लिहाज से प्रिया यादव की जाति अन्य पिछड़ा वर्ग है, लेकिन उन्होंने खुद को शेड्यूल कास्ट (एससी) का बताते हुए टिकट लिया। प्रतिपरीक्षण के दौरान यादव ने स्वीकार किया कि उन्होंने महू में स्कूल में पढऩे के दौरान अनूसुचित जनजाति कोर्ट की स्कॉलरशिप हासिल की थी। हालांकि यह भी कहा, चुनाव लड़ते समय आयोग को गलत या झूठी जानकारी नहीं दी। वार्ड 24 अनुसूचित जाति के प्रत्याशी के लिए आरक्षित था। यादव ने खुद को अनुसूचित जाति का बताकर नामांकन पत्र दाखिल किया, जबकि उनके स्कूली शिक्षा के दस्तावेज में वर्ग अनुसूचित जनजाति दर्ज है।
 इसके बाद जाटव परिवार में कुछ विवाद हुआ। कुछ समय तक नगर निगम में जाने के बाद प्रिया यादव ने निगम जाना बंद कर दिया। बताया जा रहा है कि जाटव का घर भी छोड़ दिया था। इसके बाद भी वार्ड में 20 करोड़ से ज्यादा काम हुए थे। ये काम जीतू ने प्रिया की जगह दस्तखत करके मंजूर कराए और कराए थे। इसकी पुष्टी नगर निगम के परिषद सम्मेलन का हाजिरी रजिस्टर भी करता है। जिसमें 2015-16 में ही प्रिया के दस्तखत है। उसके बाद नहीं। 
झूठा शपथ-पत्र देकर लड़ा चुनाव 
भाजपा से छह साल के लिए निष्काशित होने और एमआईसी से हटाए जाने के बाद जीतू जाटव निर्दलीय पार्षद बचे हैं। ऐसे में अब चुनाव के दौरान उनके द्वारा दायर शपथ-पत्र सार्वजनिक हो रहा है जिसमें उन्होंने अपराध वाले कॉलम में स्वीकारा है कि उन पर दो अपराध दायर हैं वहीं पुलिस ने पिछले दिनों जो सूची जारी कि उसमें जीतू पर 11 अपराध दर्ज हैं। इसका सीधा मतलब है कि जीतू ने अपने शपथ-पत्र में नौ अपराध छिपाए। 
जीतू यादव पर दर्ज हैं 11 मामले
अपराध क्र. थाना
1-108/1999 परदेशीपुरा
2-141/1999 परदेशीपुरा
3-112/2005 परदेशीपुरा
4-217/2005 परदेशीपुरा
5-960/2005 संयोगितागंज
6-28/2010 परदेशीपुरा
7-178/2010 परदेशीपुरा
8-257/2011 परदेशीपुरा
9-64/17 परदेशीपुरा
10-303/19 परदेशीपुरा
11-17/10 परदेशीपुरा
(जीतू पर शहर के दो थानों में 11 केस है। 10 केस परदेशीपुरा ओर। संयोगितागंज थाने में है। उस पर चाकूबाजी, जुआ खेलने, हत्या का प्रयास, लूट का प्रयास करने, सरकारी अधिकारियों को धमकाने, बलवा, हत्या के प्रयास के भी केस दर्ज है। उसके अपराध देख पुलिस बाउंडओवर भी कह चुकी है।)

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